भारत और अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग लगातार गहरा हो रहा है. हाल ही में हुए ट्रेड डील के बाद पहला बड़ा रक्षा एक्सरसाइज भारत में होने जा रहा है. दोनों देशों की स्पेशल फोर्सेज का संयुक्त अभ्यास वज्र प्रहार हिमाचल प्रदेश के हाई-ऐल्टीट्यूड इलाके बकलोह में 23 फरवरी से 16 मार्च तक चलेगा. यह एक्सरसाइज आतंकवाद विरोधी ऑपरेशंस और स्पेशल ऑपरेशंस में दोनों सेनाओं की आपसी तालमेल बढ़ाने के लिए है.
क्या है वज्र प्रहार एक्सरसाइज?
वज्र प्रहार भारतीय सेना और अमेरिकी आर्मी स्पेशल फोर्सेज का संयुक्त अभ्यास है. इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (एक साथ काम करने की क्षमता), कोऑर्डिनेशन और जॉइंट ऑपरेशनल स्किल्स बढ़ाना है. यह खासतौर पर काउंटर-टेररिज्म और स्पेशल ऑपरेशंस पर फोकस करता है.
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यह अभ्यास हर साल बारी-बारी से भारत और अमेरिका में होता है. इस बार हिमाचल के बकलोह में होगा, जो पहाड़ी इलाका है. यहां ठंडा मौसम और मुश्किल टेरेन में ट्रेनिंग होगी. यह एक्सरसाइज हाई-ऐल्टीट्यूड वॉरफेयर, स्पेशल ऑपरेशंस प्लानिंग, इंटेलिजेंस शेयरिंग और प्रिसीजन स्ट्राइक टैक्टिक्स पर जोर देगा. सैनिकों को चुनौतीपूर्ण मौसम और इलाके में टेस्ट किया जाएगा.

ट्रेड डील के बाद पहला बड़ा एक्सरसाइज
यह अभ्यास भारत-अमेरिका ट्रेड डील के तुरंत बाद हो रहा है, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करेगा. ट्रेड डील से जहां व्यापार बढ़ेगा, वहीं सैन्य सहयोग से सुरक्षा संबंध मजबूत होंगे. यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक माहौल में दोनों देशों की रणनीतिक एकजुटता दिखाता है.
क्या-क्या होगा एक्सरसाइज में?
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भारत-अमेरिका सैन्य संबंधों का बढ़ता ग्राफ
यह एक्सरसाइज दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य कूटनीति का हिस्सा है. पिछले साल 'युद्ध अभ्यास' नाम का बड़ा एक्सरसाइज हुआ था, जिसमें कन्वेंशनल और सब-कन्वेंशनल ऑपरेशंस पर फोकस था.

अब अमेरिका भारतीय नौसेना के बड़े इवेंट्स में भी शामिल होगा...
इससे थल और समुद्री दोनों क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा. लगातार हो रहे एक्सरसाइज से भारत-अमेरिका की सेनाएं एक-दूसरे की तकनीक, रणनीति और ऑपरेशंस को बेहतर समझ रही हैं.
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क्यों है यह खास?
भारत-अमेरिका संबंध आर्थिक से लेकर रक्षा तक हर क्षेत्र में मजबूत हो रहे हैं. 'वज्र प्रहार' जैसे एक्सरसाइज इस साझेदारी को और गहरा करेंगे. रक्षा मामलों में आधिकारिक बयानों पर नजर रखें. यह अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के लिए एक बड़ा मौका है.