मुरादाबाद से बीडीएस छात्र हारिश अली की गिरफ्तारी के बाद कई अहम खुलासे हुए हैं. उस पर ISIS के ऑनलाइन मॉड्यूल से जुड़े होने का गंभीर आरोप है. जांच में सामने आया है कि वह युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहा था. उसकी गतिविधियों से जुड़े कई अहम सुराग भी एजेंसियों के हाथ लगे हैं. खास बात यह है कि आरोपी की पहुंच अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तक थी. अब एटीएस उसे पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की तैयारी में है. इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है.
आतंकी नेटवर्क से जुड़ाव
हारिश अली मुरादाबाद के एक निजी मेडिकल कॉलेज से बीडीएस की पढ़ाई कर रहा था. पढ़ाई के दौरान ही उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए कट्टरपंथी संगठनों से संपर्क बनाया. शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि वह दिखने में एक सामान्य छात्र था, लेकिन अंदर ही अंदर खतरनाक विचारधारा से प्रभावित हो चुका था. कॉलेज के माहौल का फायदा उठाकर उसने अन्य युवाओं तक भी अपनी पहुंच बनाई. यही वजह है कि एटीएस अब उसके संपर्क में आए सभी लोगों की पहचान करने में जुटी है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, उसका नेटवर्क काफी व्यापक हो सकता है.
NEET की तैयारी, ISIS कनेक्शन
जांच में खुलासा हुआ है कि हारिश अली पहली बार राजस्थान में NEET की तैयारी के दौरान ISIS के संपर्क में आया था. वहीं से उसकी कट्टरपंथ की ओर झुकाव शुरू हुआ. धीरे-धीरे उसने ऑनलाइन माध्यमों से विदेशी हैंडलर्स से जुड़ना शुरू कर दिया. यह संपर्क आगे चलकर एक संगठित नेटवर्क में बदल गया. जांच एजेंसियों का मानना है कि इसी दौरान उसे ब्रेनवॉश किया गया और उसे आतंकी विचारधारा से जोड़ा गया. इसके बाद उसने खुद भी अन्य युवाओं को इस रास्ते पर लाने का काम शुरू कर दिया.
VPN से चला रहा था गुप्त नेटवर्क
हारिश अली ‘Session’ और ‘Discord’ जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल कर रहा था. इन प्लेटफॉर्म्स पर वह फर्जी नामों से ग्रुप बनाकर युवाओं को जोड़ता था. अपनी पहचान छिपाने के लिए वह VPN का इस्तेमाल करता था, जिससे उसकी लोकेशन ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था. जांच में सामने आया है कि वह इन ग्रुप्स के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार करता था. विदेशी हैंडलर्स से सीधे संपर्क में रहकर वह भारत के खिलाफ साजिशों में भी शामिल था. एटीएस अब इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के डेटा को खंगाल रही है.
क्रिप्टोकरेंसी से फंडिंग के पुख्ता सुराग
एटीएस की जांच में यह भी सामने आया है कि हारिश अली को क्रिप्टोकरेंसी के जरिए फंडिंग मिल रही थी. यह फंडिंग कहां से आ रही थी और किसके जरिए भेजी जा रही थी, इसकी जांच जारी है. एजेंसियों को कुछ डिजिटल ट्रांजैक्शन के पुख्ता सबूत भी मिले हैं. माना जा रहा है कि इस पैसे का इस्तेमाल नेटवर्क को मजबूत करने और गतिविधियों को बढ़ाने में किया जा रहा था. यूपी एटीएस अब इस फंडिंग चैनल को पूरी तरह ट्रैक करने की कोशिश कर रही है. यह मामला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क से भी जुड़ सकता है.
प्रोपेगेंडा मैटेरियल का खुलासा
हारिश अली ने ‘अल इत्तेहाद मीडिया फाउंडेशन’ नाम से एक गुप्त ग्रुप बना रखा था. इस ग्रुप में वह ISIS की प्रोपेगेंडा मैगजीन ‘दाबिक’ और ‘अल-नाबा’ शेयर करता था. इन सामग्रियों के जरिए वह युवाओं को भड़काने और कट्टरपंथ की ओर मोड़ने का काम करता था. जांच में यह भी सामने आया है कि वह मारे गए आतंकियों की तस्वीरें और भड़काऊ भाषण भी शेयर करता था. सोशल मीडिया को उसने अपने प्रचार का हथियार बना लिया था. एटीएस अब इस पूरे डिजिटल नेटवर्क को ध्वस्त करने की कार्रवाई में जुटी है.
फिदायीन हमलों की साजिश
सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर इस समय आधा दर्जन से अधिक संदिग्ध हैं, जो इस नेटवर्क का हिस्सा बताए जा रहे हैं. जांच में पता चला है कि यह मॉड्यूल युवाओं को फिदायीन हमलों के लिए प्रेरित कर रहा था. इसके साथ ही शरिया कानून लागू करने की कट्टरपंथी सोच को बढ़ावा दिया जा रहा था. हारिश अली लोकतंत्र को खारिज कर खिलाफत व्यवस्था स्थापित करने की मानसिकता रखता था. एटीएस अब इन सभी संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रख रही है और लगातार छापेमारी कर रही है. इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने की कोशिश जारी है.
रिमांड पर लेकर होगी गहन पूछताछ
यूपी एटीएस अब हारिश अली को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ करेगी. एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं. खासकर विदेशी हैंडलर्स, फंडिंग नेटवर्क और अन्य सहयोगियों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है. इसके अलावा यह भी पता लगाया जाएगा कि उसने अब तक कितने युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल किया. एटीएस का फोकस पूरे मॉड्यूल को जड़ से खत्म करने पर है. आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं.