scorecardresearch
 

IPC Section 168: गैरकानूनी तरीके से कारोबार करने वाले अधिकारी पर लागू होती है ये धारा

आईपीसी की धारा 168 (IPC Section 168) में उस लोक सेवक के बारे में बताया गया है, जो अवैध तरीके से किसी कारोबार में शामिल होता है. आइए जानते हैं कि आईपीसी (IPC) की धारा 168 इस संबंध में क्या प्रावधान करती है?

X
किसी भी लोकसेवक के कारोबार करने से जुड़ी है ये धारा
किसी भी लोकसेवक के कारोबार करने से जुड़ी है ये धारा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • किसी अधिकारी के कारोबार करने से जुड़ी है ये धारा
  • अंग्रेजी शासनकाल में लागू हुई थी आईपीसी
  • जुर्म और सजा का प्रावधान बताती है IPC

Indian Penal Code: भारतीय दंड संहिता की धाराओं में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों (Officers and employees) से संबंधित कई तरह प्रावधान (Provision) किए गए हैं और उनकी सजा भी बताई गई है. ऐसे ही आईपीसी की धारा 168 (IPC Section 168) में उस लोक सेवक के बारे में बताया गया है, जो अवैध तरीके से किसी कारोबार में शामिल होता है. आइए जानते हैं कि आईपीसी (IPC) की धारा 168 इस संबंध में क्या प्रावधान करती है?

आईपीसी की धारा 168 (Indian Penal Code Section 168) 
भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 168 (Section 168) में उस लोक सेवक (Public Servant) के बारे में प्रावधान (Provision) किया गया है, जो विधिविरुद्ध (Unlawful) रूप से व्यापार (Trade) में लगता है. IPC की धारा 168 के अनुसार, जो कोई लोक सेवक होते हुए और ऐसे लोक सेवक के नाते इस बात के लिए वैध रूप से आबद्ध (Legally bound) होते हुए कि वह व्यापार में न लगे, यदि वह व्यापार में लगेगा, तो अपराधी (Offender) माना जाएगा.

आसान भाषा में समझाने की कोशिश करें तो यदि कोई भी व्यक्ति जो लोकसेवक यानी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी है और वह लोकसेवक होने के नाते अगर कोई ओर व्यापार करता है, तो उस व्यक्ति पर धारा 168 लागू होगी और इस धारा के अनुसार उसे दंडित किया जाएगा.

सजा का प्रावधान (Punishment provision)
ऐसा करने वाला लोक सेवक या सरकारी अफसर दोषी पाए जाने पर एक वर्ष के लिए साधारण कारावास से दंडित होगा. या उस पर जुर्माना किया जाएगा. या फिर उसे दोनों ही प्रकार से दंडित किया जाएगा. यह एक जमानती (Bailable) और गैर-संज्ञेय अपराध (Non-cognizable offenses) है. जिसकी सुनवाई प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट (First Class Magistrate)  की जाती है. यह अपराध समझौता योग्य नहीं (Not negotiable) है.

इसे भी पढ़ें--- IPC Section 167: अगर गलत दस्तावेज तैयार करेगा कोई सरकारी अफसर, तो लागू होगी ये धारा 

क्या होती है आईपीसी (IPC)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक (Citizen) द्वारा किये गये कुछ अपराधों (certain offenses) की परिभाषा (Definition) और दंड (Punishment) का प्रावधान (Provision) करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी (IPC) जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.

अंग्रेजों ने लागू की थी IPC
ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले (Lord Macaulay) ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.

ये भी पढ़ेंः

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें