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यूपी के बाहुबलीः कभी सूबे के कई जिलों में बोलती थी तूती, अब गुजरात की जेल में बंद है दबंग नेता अतीक अहमद

अतीक अहमद ने भी जुर्म की दुनिया से सियासत के गलियारों का रुख किया. मगर पूर्वांचल और इलाहाबाद में सरकारी ठेकेदारी, खनन और उगाही के कई मामलों में उसका नाम बार-बार आता था.

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अतीक अहमद को गुजरात की जेल में रखा गया है सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अतीक अहमद को गुजरात की जेल में रखा गया है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गुजरात की जेल में बंद है अतीक अहमद
  • जरायम की दुनिया में अतीक की एंट्री 1979 में हुई थी

यूपी की सियासत में कई ऐसे नेता हैं, जिन्होंने जुर्म की दुनिया से निकलकर राजनीति की गलियारों में कदम रखा. वे चुनाव लड़कर विधान सभा से लेकर संसद तक पहुंचे. मगर इतना सब होने के बाद भी वे लोग अपनी माफिया वाली छवि से बाहर नहीं निकल पाए. ऐसे ही एक बाहुबली नेता का नाम है अतीक अहमद. जो सियासत में तो आ गए लेकिन उनका माफिया वाला अंदाज कभी बदला नहीं. फिलहाल वो गुजरात की जेल में बंद हैं.

कौन है अतीक अहमद

पूर्व विधायक और पूर्व सांसद अतीक अहमद मूल रूप से उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के रहने वाले हैं. उनका जन्म 10 अगस्त 1962 को हुआ था. उस वक्त उनके परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी. उनके पिता फिरोज अहमद इलाहाबाद स्टेशन पर तांगा चलाते थे. लेकिन फिर भी वो अतीक को पढ़ाना चाहते थे. मगर पढ़ाई लिखाई में उनकी कोई खास रूचि नहीं थी. इसलिये उन्होंने हाई स्कूल में फेल हो जाने के बाद पढ़ाई छोड़ दी. कई माफियाओं की तरह ही अतीक अहमद ने भी जुर्म की दुनिया से सियासत की दुनिया का रुख किया. पूर्वांचल और इलाहाबाद में सरकारी ठेकेदारी, खनन और उगाही के कई मामलों में उनका नाम बार बार आता था.

अपराध की दुनिया में पहला कदम

जरायम की दुनिया में अतीक की एंट्री 1979 में हुई थी. तब इलाहाबाद के एक मर्डर केस में उनका नाम आया था. उस वक्त अतीक की उम्र महज 17 साल थी. अगले तीन दशकों तक इलाहाबाद, फूलपुर और चित्रकूट में अतीक का माफिया राज था. लोग उनके नाम से खौफ खाते थे. जानकारी के मुताबिक इलाहाबाद के खुल्‍दाबाद थाने में अतीक अहमद की हिस्‍ट्री शीट खोली गई थी. जिसका नंबर 39ए है. 

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अतीक के खिलाफ दर्ज हैं दर्जनों केस

1992 में इलाहाबाद पुलिस ने अतीक अहमद का कच्चा चिट्ठा जारी किया था. जिसमें बताया गया था कि अतीक अहमद के खिलाफ उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कौशाम्बी, चित्रकूट, इलाहाबाद ही नहीं बल्कि बिहार राज्य में भी हत्या, अपहरण, जबरन वसूली आदि के मामले दर्ज हैं. अतीक के खिलाफ सबसे ज्यादा मामले इलाहाबाद जिले में ही दर्ज हुए. उपलब्ध आकड़ों के अनुसार वर्ष 1986 से 2007 तक ही उसके खिलाफ एक दर्जन से ज्यादा मामले केवल गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज किए गए. 

सियासत में पहला कदम

अपराध की दुनिया में नाम कमा चुके अतीक अहमद को समझ आ चुका था कि सत्ता की ताकत कितनी अहम होती है. इसके बाद अतीक ने राजनीति का रुख कर लिया. वर्ष 1989 में पहली बार इलाहाबाद (पश्चिम) विधानसभा सीट से अतीक ने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसके बाद अतीक अहमद ने 1991 और 1993 का चुनाव निर्दलीय लड़ा और फिर से जीते. 1996 में उसी सीट पर अतीक को समाजवादी पार्टी ने टिकट दिया और वह एक बार फिर से विधायक चुने गए. अतीक अहमद पांच बार इलाहाबाद (पश्चिम) से विधायक रहे. जबकि एक बार वह फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद रहे.

दल बदलू रहे अतीक अहमद

1999 में अतीक ने अपना दल का दामन थाम लिया था. उस वक्त वो प्रतापगढ़ से चुनाव लड़े पर हार गए. लेकिन 2002 में उसी पार्टी से वो विधायक चुने गए. 2003 में जब यूपी में सपा ने सत्ता में वापसी की तो अतीक ने फिर से मुलायम सिंह का हाथ थाम लिया. 2004 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अतीक को फूलपुर संसदीय क्षेत्र से टिकट दिया और वह सांसद बन गए. लेकिन मई 2007 में जब मायावती ने सूबे की कमान संभाली तो अतीक अहमद के हौसले पस्त होने लगे. उनके खिलाफ एक के बाद एक मुकदमें दर्ज हो रहे थे. हालात ये हो गए कि उस वक्त सांसद रहते हुए अतीक अहमद अंडरग्राउंड हो गए थे. इसके बाद तो 2014 समेत वो दो चुनाव भी हारे.

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चर्चित कांड

2004 में अतीक फूलपुर से सांसद बन चुके थे. उनके सांसद बन जाने से इलाहाबाद (पश्चिम) विधानसभा सीट खाली हो गई थी. उस सीट पर उपचुनाव हुआ. सपा ने अतीक के छोटे भाई अशरफ को मैदान में उतारा था. मगर बसपा ने उसके सामने राजू पाल को खड़ा किया. उस उपचुनाव में राजू ने अशरफ को हरा दिया. लेकिन पहली बार विधायक बने राजू पाल को कुछ महीने बाद यानी 25 जनवरी 2005 को दिनदहाड़े गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया. एक विधायक की हत्या से सूबे में हड़कंप मच गया. इस सनसनीखेज हत्याकांड में सांसद अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ को आरोपी बनाया गया था. इस कांड के बाद सपा मुखिया ने 2007 में अतीक को पार्टी से बाहर कर दिया था.

दिल्ली में किया था सरेंडर

गिरफ्तारी के डर से सांसद अतीक फरार थे. उनके घर, कार्यालय सहित पांच स्थानों की सम्पत्ति न्यायालय के आदेश पर कुर्क की जा चुकी थी. अतीक अहमद की गिरफ्तारी पर पुलिस ने बीस हजार रुपये का इनाम रखा था. इनामी सांसद की गिरफ्तारी के लिए पूरे देश में अलर्ट जारी किया गया था. लेकिन मायावती के डर से अतीक अहमद ने दिल्ली में समर्पण कर दिया था. हालांकि यूपी पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी का दावा किया था.

2013 में मिली थी जमानत

साल 2013 में जब सूबे में फिर से समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो, फिर से अतीक साइकिल पर सवार हो गए थे. इसके बाद वो जमानत पर बाहर भी आ गए थे. लेकिन अखिलेश सरकार में उनकी कोई पूछ नहीं थी. ना ही उनके पास पार्टी में कोई अहम पद था. उनके छोटे भाई अशरफ भी जमानत मिल गई थी. जेल से बाहर आकर वो अपना कारोबार संभालने लगा था. लेकिन इस दौरान भी अतीक अहमद कई विवादों में घिरे रहे. इस दौरान अखिलेश यादव ने एक बार साफ कह दिया था कि वो अतीक को पसंद नहीं करते.

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योगी सरकार में गिरफ्तारी

2017 में सूबे की कमान योगी आदित्यनाथ के हाथ आ गई. इसके बाद पुलिस ने कई अपराधियों के खिलाफ ऑपरेशन एनकाउंटर चलाया. अतीक की परेशानी भी बढ़ गई थी. मगर इसी दौरान एक कॉलेज में अपने गुर्गों के साथ जाकर अतीक अहमद ने मारपीट की. धमकी दे डाली. उनकी करतूत वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई. इसके बाद अतीक अहमद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भेजा गया गुजरात

इसके बाद अतीक अहमद को प्रयागराज, बरेली और देवरिया जेल में रखा गया. लेकिन अतीक अहमद का आतंक ऐसा था कि प्रदेश के जेल अधिकारी उसे अपनी जेल में रखने से घबराते थे. जेल अधिकारियों ने अदालत से अतीक को कहीं और शिफ्ट करने की गुजारिश की थी. हालांकि 19 अप्रैल 2019 को चुनाव आयोग ने अतीक अहमद को देवरिया से नैनी जेल भेज दिया था. मगर 3 जून 2019 को देश की सबसे बड़ी अदालत के आदेश पर अतीक अहमद को गुजरात की साबरमती जेल में शिफ्ट कर दिया गया था. तभी से वो वहां बंद है. इसके बाद उसके भाई अशरफ को भी गिरफ्तार कर लिया गया था.

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