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तुर्कमान गेट हिंसा: सभी 12 आरोपियों को बड़ी राहत, इन शर्तों के साथ कोर्ट ने दी जमानत

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में पिछले महीने हुई हिंसा के मामले में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है. दिल्ली की एक अदालत ने इस केस में गिरफ्तार सभी 12 आरोपियों को जमानत दे दी है. इसे दिल्ली पुलिस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

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हिंसा रामलीला मैदान के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुई थी. (Photo: PTI)
हिंसा रामलीला मैदान के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुई थी. (Photo: PTI)

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई हिंसा मामले में गिरफ्तार सभी 12 आरोपियों को कोर्ट ने जमानत दे दी है. इस हिंसा के दौरान हुई पत्थरबाजी में छह पुलिसकर्मी घायल हुए थे. सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाए जाने के बाद मस्जिद के पास भीड़ जमा हो गई थी. 

एडिशनल सेशंस जज भूपिंदर सिंह ने तुर्कमान गेट हिंसा के आरोपी मोहम्मद कैफ, मोहम्मद काशिफ, मोहम्मद उबैदुल्लाह, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद अदनान, समीर हुसैन, मोहम्मद नावेद, मोहम्मद अतहर, मोहम्मद अरीब, मोहम्मद आदिल, आमिर हमज़ा और अदनान को 50 हजार के बेल बॉन्ड पर राहत दी.

कोर्ट में सुनवाई करते हुए जज ने कहा, "जमानत पर विचार करने के इस स्टेज पर कोर्ट को सबूतों की विस्तृत जांच करने की जरूरत नहीं है. हालांकि, यह देखना जरूरी है कि क्या आरोपियों को लगातार कस्टडी में रखना आवश्यक है." जमानत की शर्तों में कहा गया है कि सभी आरोपी हर सुनवाई पर कोर्ट में पेश होंगे.

इसके साथ सबूतों से छेड़छाड़ और गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे. उन्हें अपना मोबाइल फोन चालू रखना होगा और लोकेशन सर्विस सक्रिय रखनी होगी. ट्रायल के दौरान घटना से जुड़ा कोई भी कंटेंट सोशल मीडिया पर शेयर नहीं करने का निर्देश दिया गया है. सरकारी वकील ने दलील दी थी कि पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग है. 

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कोर्ट ने कहा कि सुनवाई के दौरान कोई ऐसा खास फुटेज नहीं दिखाया गया, जिससे पहली नजर में यह स्पष्ट हो सके कि मौजूदा आवेदकों में से कोई पत्थरबाजी में सक्रिय रूप से शामिल था या किसी खास भूमिका में था. जज ने कहा कि केस डायरी में अन्य सामग्री हो सकती है, लेकिन इस स्तर पर पहचान से जुड़े ठोस साक्ष्य का अभाव है.

भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1) यानी हत्या की कोशिश के आरोप पर कोर्ट ने कहा कि प्रावधान गंभीर है, लेकिन मेडिकल रिकॉर्ड से यह नहीं दिखता कि पुलिसकर्मियों को लगी चोटें गंभीर थीं. कोर्ट ने कहा, "सिर्फ अपराध की गंभीरता ही जमानत से इनकार का आधार नहीं हो सकती. ट्रायल से पहले हिरासत सजा देने के समान नहीं हो सकती."

इससे पहले 24 जनवरी को एक सेशंस कोर्ट ने आरोपी उबैदुल्लाह को जमानत दी थी. यह आदेश तब आया था, जब दिल्ली हाई कोर्ट ने 20 जनवरी को पहले दिए गए बेल ऑर्डर को रद्द करते हुए मामले को दोबारा सेशंस कोर्ट के पास भेज दिया था. इसके बाद सभी आरोपियों को कोर्ट ने बड़ी राहत दी है.

गौरतलब है कि 6 और 7 जनवरी की रात रामलीला मैदान इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हिंसा भड़की थी. उस समय सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलाई गई कि तुर्कमान गेट के सामने स्थित मस्जिद को तोड़ा जा रहा है. इसके बाद बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए.

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पुलिस का आरोप था कि करीब 150 से 200 लोगों की भीड़ ने पुलिसकर्मियों और निगम कर्मचारियों पर हमला कर दिया. उन पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी गई थीं. इस झड़प में इलाके के स्टेशन हाउस ऑफिसर समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए थे. फिलहाल सभी आरोपियों को जमानत मिल गई है.

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