उत्तर प्रदेश में निवेशकों से कथित ठगी के मामले में वॉन्टेड भगोड़ा और आर्थिक अपराधी राशिद नसीम संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में पकड़ा गया है. अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई स्थानीय एजेंसियों और भारतीय जांच एजेंसियों के समन्वय से हुई है. शाइन सिटी घोटाले में नसीम लंबे समय से भारत से फरार चल रहा था. उसके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की जांच लंबित थी. गिरफ्तारी के बाद अब उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है.
निवेश घोटाले का खुलासा
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राशिद नसीम के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और निवेशकों से बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था. जांच में आरोप है कि उसने एक इन्वेस्टमेंट स्कीम के जरिए लोगों से करोड़ों रुपये जुटाए थे. निवेशकों को ऊंचा रिटर्न देने का लालच दिया गया था. बाद में रकम को कथित तौर पर अन्य खातों और विदेशी नेटवर्क के जरिए घुमाया गया. ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कार्रवाई की थी.
यूपी में ठगी का नेटवर्क
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में निवेशकों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी जमा पूंजी वापस नहीं की जा रही है. आरोप है कि राशिद नसीम और उसके सहयोगियों ने संगठित तरीके से निवेश योजना चलाई थी. शुरुआत में कुछ लोगों को रिटर्न देकर भरोसा बनाया गया. बाद में बड़ी रकम जुटाकर नेटवर्क अचानक बंद कर दिया गया. इस मामले ने राज्य में हजारों परिवारों को प्रभावित किया.
पहले घोषित हो चुका था भगोड़ा
जांच एजेंसियों ने राशिद नसीम को आर्थिक अपराधी घोषित किया था और उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया था. अदालत से गैर-जमानती वारंट भी जारी हुआ था. उसके भारत छोड़कर विदेश भागने की पुष्टि के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी तलाश शुरू की गई. सूत्रों के अनुसार, इंटरपोल के जरिए भी अलर्ट जारी किया गया था. इसके बाद उसकी लोकेशन ट्रैक की गई.
यूएई में ऐसे हुई गिरफ्तारी
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, राशिद नसीम को UAE में हिरासत में लिया गया. स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने भारतीय एजेंसियों के इनपुट के आधार पर कार्रवाई की. गिरफ्तारी की पुष्टि आधिकारिक सूत्रों ने की है. अब भारत सरकार प्रत्यर्पण संधि के तहत उसे वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है. कानूनी औपचारिकताओं के बाद उसे भारतीय एजेंसियों को सौंपा जा सकता है.
आगे की कानूनी कार्रवाई
राशिद नसीम की गिरफ्तारी से निवेशकों में उम्मीद जगी है कि उनकी रकम की रिकवरी की दिशा में प्रगति होगी. ED पहले ही उसकी कुछ संपत्तियों को अटैच कर चुकी है. जांच एजेंसियां अब उसकी विदेशी संपत्तियों और बैंक खातों की भी जांच कर सकती हैं. प्रत्यर्पण के बाद उससे पूछताछ में और बड़े खुलासे होने की संभावना है. यह मामला आर्थिक अपराधों पर सख्ती का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है.