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अलवरः दिव्यांग लड़की के साथ दरिंदगी के मामले में नया मोड़, पुलिस बोली- रेप की पुष्टि नहीं

हैरानी की बात है कि 24 घंटे पहले तक राजस्थान पुलिस जिस वारदात को जघन्य बलात्कार मान रही थी. उसे अब दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की जा रही है.

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इस घटना को पहले जघन्य बलात्कार माना जा रहा था, अब पुलिस रेप से इनकार कर रही है इस घटना को पहले जघन्य बलात्कार माना जा रहा था, अब पुलिस रेप से इनकार कर रही है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मंगलवार को गंभीर हालत में मिली थी पीड़िता
  • अलवर से डॉक्टरों ने किया था जयपुर रेफर
  • 8 घंटे की सर्जरी के बाद बची लड़की की जान


राजस्थान के अलवर में एक मूक बधिर बच्ची के साथ दरिंदगी के मामले में नया मोड़ आ गया है. पुलिस ने जांच के बाद लड़की के साथ रेप की घटना से इनकार कर दिया है. शुक्रवार को अलवर के पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम ने खुद मीडिया को इस बारे में जानकारी दी. उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में अभी रेप की पुष्टि नहीं हुई है.
 
पीड़िता का इलाज जयपुर में किया जा रहा है. वहां के डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर अलवर की एसपी तेजस्विनी गौतम ने कहा कि लड़की जिस ऑटो में सवार थी, उसकी भी एफएसएल जांच कराई गई लेकिन कोई संशय नजर नहीं आया है. जो लास्ट सीसीटीवी फुटेज मिला है, वह घटना स्थल से 300 मीटर पहले का है. जिसमें लड़की करीब 7:30 बजे के करीब चलते हुए दिख रही है.

पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी ने बताया कि इस बीच 20 मिनट में घटना कैसे हुई, उसी पर पुलिस की टीमें फोकस कर रही हैं. उधर, अलवर के जिला कलेक्टर नन्नूमल पहाडिया का कहना है कि लड़की के साथ बलात्कार हुआ है या नहीं, यह अभी नहीं कहा जा सकता. 

हैरानी की बात है कि 24 घंटे पहले तक राजस्थान पुलिस जिस वारदात को जघन्य बलात्कार मान रही थी. उसे अब दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की जा रही है. आज तक से बातचीत के दौरान लड़की का इलाज करने वाले डॉक्टर ने कहा था कि लड़की के प्राइवेट पार्ट्स पर काफ़ी ज़्यादा ज़ख्म थे. 

पहले तो अलवर की एसपी तेजस्विनी गौतम ने भी इस घटना को कैमरे पर सेक्शुअल असॉल्ट माना था. लेकिन अब वह भी रेप की घटना से इनकार करती नजर आ रही हैं. पुलिस ने पीड़िता का एक छोटा वीडियो भी जारी किया है, जिसमें वह घटनास्थल से 2 सौ मीटर दूर ओवरब्रिज पर स्वतंत्र रूप से जाते हुए दिख रही है.

मगर जयपुर से अलवर पहुंची फॉरेंसिक टीम ने कैमरे पर कहा था कि जांच में ऐसा लगता है कि ओवरब्रिज पर किसी गाड़ी से उतारकर लड़की को फेंका गया है. दरअसल, तीन दिन बाद भी अपराधी पकड़े नहीं गए हैं. इस मामले को लेकर राजस्थान सरकार भारी दबाव में है. जयपुर में बच्ची के मां-बाप को भी मीडिया से दूर रखा जा रहा है. पुलिसकर्मी उन्हें किसी से बात करने नहीं दे रहे हैं. 

पीड़िता को 6 लाख का मुआवजा

बच्ची की हालत जानने पहुंची राजस्थान के महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश ने भरोसा दिलाया कि अपराधी जल्दी पकड़े जाएंगे. साथ ही उन्होंने पीड़िता के लिए छह लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया, जिसमें पांच लाख रुपये मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तरफ से मुआवजा दिया गया है जबकि एक लाख रुपया महिला विकास मंत्रालय की तरफ से दिया गया है. अलवर से आने वाले सामाजिक न्याय मंत्री टीकाराम जूली ने भी अलवर में परिजनों को साढ़े 3 लाख रुपया की आर्थिक सहायता दी.

ये था मामला

बता दें कि बीते मंगलवार को यह घटना सामने आई थी. पीड़िता उस दिन आखरी बार लोगों को 12 बजे दिखाई दी थी. तब वह खेत के रास्ते सड़क पर जा रही थी. लेकिन उसके बाद वो लहूलुहान हालत में ओवर ब्रिज के नीचे मिली थी. पहले उसे अलवर के स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया था. वहां से गंभीर हालत के चलते उसे जयपुर रेफर कर दिया गया था. जहां 8 घंटे चले लंबे ऑपरेशन के बाद उसकी जान बचाई गई. बच्ची का इलाज कर रहे JK लोन अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर अरविंद शुक्ला ने कहा कि अब वह खतरे से बाहर है, मगर डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है.

 

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