Cyber Slavery Job Scam: गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी और मानव तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. इस कार्रवाई में पुलिस ने सूरत के रहने वाले दो एजेंटों गिरफ्तार किए हैं. आरोप है कि ये लोग बेरोजगार भारतीय युवाओं को विदेशों में अच्छी नौकरी और मोटी तनख्वाह का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे. इसके बाद उन्हें कंबोडिया और म्यांमार जैसे देशों में भेज दिया जाता था. वहां पहुंचने के बाद युवाओं को साइबर अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता था. पुलिस का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है और इसमें विदेशी गिरोहों की भी भूमिका सामने आई है.
सूरत के रहने वाले हैं दोनों आरोपी
पुलिस ने इस मामले में सूरत निवासी कौशिक पेथाणी और ध्रुव डोबरिया को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया है कि ये दोनों आरोपी एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह के लिए काम कर रहे थे. गांधीनगर स्थित साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की टीम ने मामले की जांच के बाद इन दोनों को हिरासत में लिया. पुलिस के अनुसार ये आरोपी चीनी साइबर माफिया के साथ मिलकर बेरोजगार युवाओं को विदेश भेजने का नेटवर्क चला रहे थे. गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ साइबर धोखाधड़ी और मानव तस्करी से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया गया है. पुलिस अब इनके संपर्कों और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है.
सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को फंसाया
साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के एसपी विवेक भेडा के मुताबिक, आरोपी सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को अपने जाल में फंसाते थे. वे व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म पर बेरोजगार युवाओं से संपर्क करते थे. इसके बाद उन्हें विदेश में आईटी कंपनियों में डेटा एंट्री जैसी नौकरियों का लालच दिया जाता था. आरोपी टेलीग्राम पर फर्जी इंटरव्यू और टाइपिंग टेस्ट भी आयोजित करते थे ताकि युवाओं को भरोसा हो जाए कि नौकरी असली है. इस पूरी प्रक्रिया को बेहद पेशेवर तरीके से अंजाम दिया जाता था, जिससे कई युवक आसानी से इनके झांसे में आ जाते थे.
विदेश पहुंचते ही छीन लिए जाते थे पासपोर्ट
जांच में सामने आया है कि जैसे ही युवक कंबोडिया या म्यांमार पहुंचते थे, वहां उनका असली शोषण शुरू हो जाता था. आरोपी सबसे पहले उनके पासपोर्ट और मोबाइल फोन छीन लेते थे. इसके बाद उन्हें एक कैंपस या परिसर में बंद करके रखा जाता था. वहां से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती थी और लगातार निगरानी रखी जाती थी. इस तरह युवाओं को पूरी तरह से बंधक बनाकर रखा जाता था. पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क का मकसद युवाओं को साइबर गुलामी में धकेलना था.
दिनभर करवाते थे साइबर ठगी
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इन युवाओं से पूरे दिन साइबर धोखाधड़ी करवाई जाती थी. उन्हें क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े घोटालों और ऑनलाइन निवेश के नाम पर लोगों को ठगने के लिए मजबूर किया जाता था. युवाओं को अलग-अलग स्क्रिप्ट दी जाती थी, जिनके जरिए वे दुनिया भर के लोगों से संपर्क करते थे. अगर कोई युवक इस काम को करने से मना करता था तो उसके साथ मारपीट की जाती थी. इतना ही नहीं, मानसिक दबाव और धमकियों के जरिए भी उन्हें काम करने के लिए मजबूर किया जाता था.
इन देशों में भी फैला था गिरोह का नेटवर्क
पुलिस की जांच में यह भी पता चला है कि यह गिरोह केवल कंबोडिया और म्यांमार तक सीमित नहीं था. इससे पहले आरोपी दुबई, लाओस, थाईलैंड और श्रीलंका जैसे देशों में भी इसी तरह की गतिविधियों में शामिल रहे हैं. वहां भी बेरोजगार युवाओं को नौकरी का लालच देकर ले जाया जाता था और साइबर ठगी के काम में लगाया जाता था. पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क कई देशों में सक्रिय है और लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता है. यही वजह है कि ऐसे गिरोहों को पकड़ना काफी चुनौतीपूर्ण होता है.
नए देशों में नेटवर्क फैलाने की तैयारी
पुलिस के मुताबिक हाल ही में कंबोडिया में साइबर अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई हुई है. इसके बाद यह गिरोह अपने नेटवर्क को दूसरे देशों में फैलाने की तैयारी कर रहा था. जांच में पता चला है कि आरोपी अब जॉर्जिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में अपना नेटवर्क स्थापित करने की योजना बना रहे थे. अगर समय रहते पुलिस कार्रवाई नहीं करती तो और भी कई भारतीय युवक इस जाल में फंस सकते थे. फिलहाल पुलिस इस पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के बाकी सदस्यों की तलाश कर रही है.
जब्त आईफोन से हो सकते हैं बड़े खुलासे
गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने दो आईफोन भी जब्त किए हैं. इन मोबाइल फोन में कई अहम डिजिटल सबूत होने की संभावना जताई जा रही है. जांच एजेंसियां अब इन फोन की फॉरेंसिक जांच कर रही हैं. उम्मीद है कि इससे पूरे अंतरराष्ट्रीय गिरोह के बारे में और भी जानकारी सामने आएगी. पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी संभव है. फिलहाल इस मामले की जांच साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की टीम आगे बढ़ा रही है.