दिल्ली के भारत मंडम में AI इम्पैक्ट समिट के दौरान हुए 'शर्टलेस प्रोटेस्ट' के मामले में कार्रवाई तेज हो गई है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले से तीन और कांग्रेस वर्कर को हिरासत में लिया है. इसके साथ ही इस मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 11 हो गई है.
पुलिस के मुताबिक, सौरभ, सिद्धार्थ और अरबाज को शिमला जिले के रोहड़ू सबडिविजन के एक होटल से पकड़ा गया. तीनों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली लाने हेतु ट्रांजिट रिमांड दे दिया गया. हालांकि, घटनाक्रम ने नाटकीय मोड़ ले लिया.
हिमाचल पुलिस ने दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम को उस वक्त रोक दिया, जब वे आरोपियों को राष्ट्रीय राजधानी ले जा रहे थे. दिल्ली पुलिस ने स्थानीय पुलिस को पहले से सूचना दिए बिना ऑपरेशन किया था. इस पर हिमाचल पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को ले जा रही गाड़ियों को रोक लिया.

दो गाड़ियों को शिमला में रोका गया, जबकि तीसरी को सोलन जिले के धरमपुर के पास रोका गया. सूत्रों का दावा है कि पुलिसकर्मियों समेत करीब 15 से 20 लोगों को हिरासत में लिया गया. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर दिल्ली पुलिस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई.
यह मामला 20 फरवरी को भारत मंडपम में हुए 'शर्टलेस प्रोटेस्ट' से जुड़ा है. इस हाई-प्रोफाइल इंटरनेशनल इवेंट में बड़ी संख्या में विशिष्ट लोग और डेलीगेट मौजूद थे. इस घटना के बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दंगे जैसे आरोप लगाए थे.
पुलिस को मिले इनपुट और टेक्निकल सर्विलांस के आधार पर कार्रवाई की गई. जांच में सामने आया कि गिरफ्तार किए गए लोग प्रदर्शन को कोऑर्डिनेट और सपोर्ट किए थे. इससे पहले इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब और पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता भूदेव शर्मा को भीगिरफ्तार किया गया था.
इस पूरे घटनाक्रम पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' और संवैधानिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया था. इस मामले ने अब सियासी रंग भी ले लिया है. दिल्ली और हिमाचल पुलिस के बीच समन्वय को लेकर सवाल उठने लगे हैं.