scorecardresearch
 

सीतापुर: ऑनलाइन गेम के चक्कर में बच्चों ने घर से उड़ाए हजारों रुपये और जेवर

इंटरनेट पर इन दिनों बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय खेल 'फ्री फायर' को लेकर सीतापुर के सिधौली कस्बे में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने यहां के लोगों को चकित कर दिया है.

Advertisement
X
बच्चों को लगी ऑनलाइन गेम की लत (ऐप से ली गई फोटो)
बच्चों को लगी ऑनलाइन गेम की लत (ऐप से ली गई फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बच्चों को लगी ऑनलाइन गेम की लत
  • अपने ही घर से चुराए हजारों रुपये और जेवर

सीतापुर की सिधौली कोतवाली पुलिस ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया है जिसमें छोटे-छोटे बच्चों ने अपने ही घर से हजारों रुपए व जेवर चुराकर एक ऑनलाइन गेम में खर्च कर डाले. 'फ्री फायर गेम' के नाम से इंटरनेट पर चल रहे इस गेम में बेहतरीन सुविधाएं लेने के लिए इन 8 से 12 साल तक के बच्चों ने घर से पैसों व जेवर की चोरी तो की ही. साथ ही ऑनलाइन पेमेंट कर लंबे समय तक गायब हुए इन पैसों व जेवरों को लेकर अपने घर वालों को गुमराह भी किये रखा.

मालूम हो कि इंटरनेट पर इन दिनों बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय खेल 'फ्री फायर' को लेकर सीतापुर के सिधौली कस्बे में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने यहां के लोगों को चकित कर दिया है. कस्बे के गांधीनगर मोहल्ले की रहने वाली महिला ने अपने घर में रखे ₹85000 व कुछ जेवरों के चोरी चले जाने की रिपोर्ट 20 जुलाई 21 को सिधौली कोतवाली में दर्ज कराई थी.

चूंकि महिला का मकान मोहल्ले में ऐसी जगह स्थित था जहां किसी के आने जाने की कोई गुंजाइश नहीं थी. इसलिए पुलिस के लिए यह एक ऐसा टास्क था जिसे सुलझा पाना काफी मुश्किल नजर आ रहा था. पहले पुलिस की नजर इस घर में रहने वाली दो किराएदार लड़कियों पर गई, लेकिन पुलिस की तफ्तीश इस दिशा में आगे नहीं बढ़ सकी. इसके बाद पुलिस ने रिपोर्ट लिखने वाली महिला के 8 व 12 साल के दो लड़कों से यूं ही कुछ बातचीत शुरू की. बातचीत में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए जिससे खुद विवेचना कर रहे सिधौली के कोतवाल आलोक मणि त्रिपाठी के पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई. 

Advertisement

उन्हें जानकारी मिली कि यह बच्चे एंड्राइड मोबाइल पर एक ऑनलाइन गेम खेलते हैं. इस गेम खेलने को लेकर जब विवेचक की तफ्तीश आगे बढ़ी तो उन्होंने यह भी जाना कि इस गेम को खेलते वक्त फायरिंग करने वाले खिलाड़ी को गोली खरीदने व गेम में ही अन्य बेहतर सुविधाएं पाने की जरूरत होती है तो उसे कुछ पेमेंट करना पड़ता है. 

यह जानकर कोतवाल ने पहले समझाते हुए और फिर कुछ डर दिखाते हुए बच्चों से जब गहराई से पूछताछ की तो पता चला की उनके इस गेम में उसे मिलाकर कुल तीन बच्चे शामिल थे. दो लड़के राजस्थान का रहने वाले है. यह लोग गेम में बेहतर सुविधाएं पाने के लिए ऑनलाइन पेमेंट भी करते थे. आगे की तफ्तीश में यह भी पता चला कि इन्हीं बेहतरीन सुविधाओं को लेने के लिए बच्चों द्वारा एक आईडी अपने घरवालों से छुपा कर बनाई गई है और अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक बार 14000 व एक दो बार और भी छोटे-छोटे पेमेंट किए गए. 

और पढ़ें- ऑनलाइन गेम के शौक के चलते 350 किमी दूर पहुंचा बच्चा, पुलिस अपहरण के एंगल पर करती रही जांच

इसी पेमेंट के लिए ₹85000 चुराए गए थे. जिनमें से ₹35000 नकद व छिपाए गए जेवर पुलिस ने बरामद किए हैं. पूछताछ में राजस्थान के रहने वाले लड़के से भी पुलिस ने बात की और उसे भेजा गया कुछ पेमेंट ऑनलाइन ही वापस पीड़ित महिला के अकाउंट में मंगवाया.

Advertisement

'आजतक' से बात करते हुए विवेचक आलोक मणि त्रिपाठी ने बताया की यह गेम एक आईडी बनाकर कुछ बच्चों द्वारा आपस में ही ग्रुप बनाकर इंटरनेट पर खेला जाता है. जिसमें गेम प्रोवाइडर पैसे लेकर और सुविधाएं प्रोवाइड करता है. यह बच्चे, गेम खेलते खेलते इसके इतने आदी हो गए कि और सुविधाएं लेने के लिए अंततः चोरी करने तक पहुंच गए.

पुलिस के मुताबिक क्योंकि मामला 8 से 12 साल तक के नाबालिग स्कूली बच्चों से जुड़ा है व खुद पीड़ित महिला के 2 बच्चे इसमें शामिल हैं. इसलिए उसके आग्रह तथा सिधौली के शामिल एक अन्य बच्चे व राजस्थान वाले बच्चे के परिजनों के इस विवेचना को फिलहाल खुलासे के बाद इसी स्थान पर रोक दिया गया है. लेकिन बच्चों के परिजनों को इस बात की विशेष ताकीद दी गई है कि वे मोबाइल इस्तेमाल करते समय बच्चों पर विशेष नजर रखें.

 

Advertisement
Advertisement