
देश की राजधानी में साइबर अपराध पर बड़ा प्रहार करते हुए दिल्ली पुलिस ने Operation CyHawk 4.0 के तहत एक बड़ा अभियान चलाया. 6 और 7 अप्रैल को चलाए गए इस ऑपरेशन में पुलिस ने 600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 8300 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई. यह कार्रवाई साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क को तोड़ने के मकसद से की गई थी. अधिकारियों के मुताबिक, यह अब तक का सबसे बड़ा और संगठित अभियान माना जा रहा है. इस ऑपरेशन ने साइबर अपराधियों में हड़कंप मचा दिया है.
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस ऑपरेशन का मकसद केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि पहले से ही साइबर अपराध के नेटवर्क को खत्म करना था. इसके लिए वित्तीय नेटवर्क और ऑपरेशन सिस्टम को टारगेट किया गया. पुलिस ने बैंक खातों, कॉल सेंटर और तकनीकी कड़ियों को जोड़कर बड़ी कार्रवाई की. यह रणनीति साइबर अपराध के खिलाफ एक नई दिशा मानी जा रही है.
इस ऑपरेशन के दौरान कुल 8371 लोगों को हिरासत में लेकर उनकी जांच और सत्यापन किया गया. इनमें से 1429 लोगों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया या कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाया गया. पुलिस ने डिजिटल और फाइनेंशियल डेटा के आधार पर इन आरोपियों को साइबर ठगी से जोड़ने में सफलता हासिल की.
दिल्ली पुलिस ने इस अभियान के तहत 2203 लोगों को नोटिस भी जारी किए हैं, जो साइबर अपराध के फाइनेंशियल नेटवर्क से जुड़े होने के शक में हैं. ये लोग सीधे तौर पर अपराध में शामिल नहीं थे, लेकिन उनके बैंक खातों या अन्य संसाधनों का इस्तेमाल ठगी के पैसे को इधर-उधर करने में किया गया था.
इस बड़े ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने 499 नए साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज किए हैं. इसके अलावा 324 पुराने मामलों में भी बड़ी सफलता मिली है, जहां डिजिटल सबूतों के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इससे यह साफ हो गया है कि पुलिस अब पुराने मामलों को भी तेजी से सुलझा रही है.
द्वारका इलाके में पुलिस ने एक बड़े पैन-इंडिया म्यूल अकाउंट सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, जो 67 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी से जुड़ा था. यहां से 109 चेकबुक, 12 मोबाइल फोन और चार शेल कंपनियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए. यह नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ था और संगठित तरीके से काम कर रहा था.

वहीं, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में पुलिस ने एक अनोखे मैट्रिमोनियल फ्रॉड केस का खुलासा किया, जिसमें AI से बनाई गई तस्वीरों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगा जा रहा था. इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. यह दिखाता है कि साइबर अपराधी अब नई तकनीकों का भी गलत इस्तेमाल कर रहे हैं.
इस ऑपरेशन में साइबर अपराध के फाइनेंशियल ढांचे को खास तौर पर निशाना बनाया गया. इसमें म्यूल बैंक अकाउंट, कैश निकालने वाले एजेंट और फर्जी कॉल सेंटर शामिल थे. ये कॉल सेंटर नकली जॉब ऑफर, डिजिटल अरेस्ट, कस्टमर केयर बनकर ठगी और टेलीमार्केटिंग फ्रॉड जैसे अपराध कर रहे थे.
जांच के दौरान पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 3564 शिकायतों को संदिग्ध बैंक खातों और मोबाइल नंबरों से जोड़ा. इन शिकायतों के आधार पर 519 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी का पैसा ट्रेस किया गया. यह रकम देशभर में फैले साइबर गिरोहों से जुड़ी हुई थी.
रोहिणी इलाके में पुलिस ने एक और बड़े नेटवर्क का खुलासा किया, जहां NGO से जुड़े बैंक खातों का इस्तेमाल म्यूल अकाउंट के रूप में किया जा रहा था. इस नेटवर्क का संबंध 63 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी और 80 से अधिक शिकायतों से पाया गया.
यह पूरा ऑपरेशन गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के सहयोग से चलाया गया. करीब एक महीने तक इंटेलिजेंस जुटाई गई, जिसमें संदिग्ध लेनदेन, बैंक खातों की जांच और देशभर की शिकायतों का विश्लेषण किया गया. I4C की रियल-टाइम एनालिटिक्स ने इस ऑपरेशन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई.
दिल्ली पुलिस ने आम जनता को भी सतर्क रहने की सलाह दी है. लोगों से कहा गया है कि वे अपनी बैंकिंग जानकारी, OTP या पर्सनल डिटेल किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें. पुलिस ने यह भी साफ किया है कि ऐसे इंटेलिजेंस-आधारित ऑपरेशन आगे भी जारी रहेंगे, ताकि साइबर अपराधियों पर लगातार दबाव बना रहे और लोगों को सुरक्षित रखा जा सके.