मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर बने रिश्ते, भरोसे की मीठी बातें, भविष्य के सपने और फिर लाखों रुपये की ठगी. केरल के कोच्चि में सामने आए एक साइबर फ्रॉड केस ने ऑनलाइन दुनिया में छिपे उस खतरनाक जाल को उजागर कर दिया है, जिसे कंबोडिया से बैठकर संचालित किया जा रहा था. इस मामले में साइबर पुलिस ने गैंग के किंगपिन को गिरफ्तार कर लिया है.
कोच्चि साइबर पुलिस ने रविवार को अब्दु रहमान (24) को दिल्ली से गिरफ्तार किया. पलक्कड़ जिले के थूथा का रहने वाला रहमान कंबोडिया से संचालित एक बड़े ऑनलाइन फ्रॉड सिंडिकेट का सदस्य था. यह नेटवर्क भारतीय नागरिकों को निशाना बनाकर विभिन्न तरह के साइबर अपराधों को अंजाम दे रहा था. इस गिरोह के शिकार पढ़े-लिखे लोग भी बन रहे थे.
यह मामला तब सामने आया जब कोच्चि के एक डॉक्टर को मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए संपर्क कर ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कीम में निवेश का झांसा दिया गया. शुरुआत दोस्ती से हुई, फिर भरोसा जीता गया और उसके बाद पीड़ित को अधिक मुनाफे का सपना दिखाकर 37 लाख निवेश करवा लिए गए. बाद में पता चला कि पूरा ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और निवेश योजना फर्जी थी.
जांच में खुलासा हुआ कि कंबोडिया भारत को निशाना बनाने वाले ऑनलाइन फ्रॉड ऑपरेशनों का एक बड़ा केंद्र बन चुका है. पुलिस का दावा है कि ऐसे कई नेटवर्क चीनी नागरिकों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जहां भारत समेत कई देशों के युवाओं को नौकरी का झांसा देकर साइबर ठगी के कारोबार में लगाया जाता है. इसके लिए बहुत सुनियोजित साजिश रची जाती थी.
पुलिस के मुताबिक, भारत के युवा लड़कों और लड़कियों को विजिटिंग वीजा पर थाईलैंड और वियतनाम भेजा जाता है. वहां से उन्हें सड़क मार्ग के जरिए कंबोडिया पहुंचाया जाता है. शुरुआत में उन्हें ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म, कस्टमर सपोर्ट या दूसरे कारोबारों में नौकरी का भरोसा दिया जाता है, लेकिन बाद में उन्हें स्कैम सेंटर में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है.
इन स्कैम सेंटरों में नए लोगों को बाकायदा प्रशिक्षण दिया जाता है. उन्हें सिखाया जाता है कि सोशल मीडिया, डेटिंग प्लेटफॉर्म, मैट्रिमोनियल वेबसाइट और निवेश योजनाओं के जरिए लोगों का भरोसा कैसे जीता जाए और उनसे पैसे कैसे ठगे जाएं. अब्दु रहमान साल 2022 से कंबोडिया के एक स्कैम सेंटर में काम कर रहा था. पहले उसका काम शिकार लोगों को मैसेज भेजना था.
इसके बाद लोगों फोन कॉल करना था. लेकिन ठगी के मामलों में उसकी सफलता को देखते हुए तियान नामक एक चीनी नागरिक ने उसे टीम लीडर बना दिया. इसके बाद रहमान को भारत से लोगों की भर्ती करने की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई. पुलिस का कहना है कि वह युवाओं को विदेश में अच्छी नौकरी और बेहतर वेतन का लालच देकर नेटवर्क से जोड़ता था.
जांच में यह भी सामने आया कि सिंडिकेट ने शुरुआत में सोशल मीडिया पर ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और लोन एप्लिकेशन के विज्ञापनों के जरिए लोगों को निशाना बनाया. लेकिन जब सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के जागरूकता अभियानों की वजह से लोगों ने ऐसे जाल में फंसना कम कर दिया, तब गिरोह ने अपनी रणनीति बदल दी.
इसके बाद अपराधियों ने मैट्रिमोनियल वेबसाइटों पर पुरुषों और महिलाओं के फर्जी प्रोफाइल बनाने शुरू कर दिए. ये लोग संभावित दूल्हा-दुल्हन बनकर पीड़ितों से संपर्क करते, दोस्ती बढ़ाते और फिर शादी का भरोसा दिलाकर उन्हें निवेश योजनाओं में पैसा लगाने के लिए तैयार करते थे. शादी के वादे और निवेश पर ऊंचे रिटर्न के लालच में कई लोग इस जाल में फंस गए.
कोच्चि साइबर पुलिस ने जांच के दौरान ऐसे एक हजार से ज्यादा फर्जी मैट्रिमोनियल प्रोफाइल की पहचान की है, जिन्हें बाद में हटाया गया. इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में कई देशों के ऑपरेटिव शामिल थे. इस मामले में इससे पहले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. जांच एजेंसियों को कंबोडिया स्थित फ्रॉड नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं है.