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पीड़ा के 15 दिन और जिंदगी की जंग हार गई हाथरस की निर्भया!

पीड़िता की मौत हो जाने के बाद इस मामले से सियासत में उबाल है. कानून व्यवस्था को लेकर योगी सरकार विपक्ष के निशाने पर है. घटना 14 सितंबर की है और आज यानी पीड़ा के पूरे 15 दिन तक जिंदगी के लिए जंग लड़ते हुए पीड़िता ने दम तोड़ दिया. 

हाथरस की निर्भया ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया हाथरस की निर्भया ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 14 सितंबर को 4 दरिंदों ने लड़की को बनाया था शिकार
  • पीड़िता की कमर तोड़ने, जीभ काटने का भी आरोप
  • हाथरस पुलिस-प्रशासन ने दी सफाई, आरोपी गिरफ्तार

हाथरस में चार लोगों की दरिंदगी का शिकार बनी ‘निर्भया’ ने आज दम तोड़ दिया. उसके साथ हैवानियत को इस कदर अंजाम दिया गया था कि उसकी जीभ कट गई और कमर की हड्डी तक टूट गई. इस निर्भया को गांव के ही चार दबंगों ने हवस का शिकार बनाया. पीड़िता की मौत हो जाने के बाद इस मामले से सियासत में उबाल है. कानून व्यवस्था को लेकर योगी सरकार विपक्ष के निशाने पर है. घटना 14 सितंबर की है और आज यानी पीड़ा के पूरे 15 दिन तक जिंदगी के लिए जंग लड़ते हुए पीड़िता ने दम तोड़ दिया. 

14 सितंबर 2020
सुबह के 9:30 बजे थे. हाथरस के चंदपा थाना क्षेत्र के गांव बूलगढ़ी में रहने वाली एक युवती रोज की तरह अपनी मां के साथ चारा काटने खेत पर गई थी. चारा काटने के दौरान युवती अपनी मां से दूर हो गई. वो दूसरी जगह चारा काट रही थी. कुछ पल ही बीते थे कि गांव के ही चार दबंग युवक लड़की के पास पहुंचे और उसे दुपट्टे से खींचकर बाजरे के खेत में ले गए. वहां उन चारों ने उसके साथ जबरदस्ती की. विरोध करने पर लड़की को जमकर पीटा. मारपीट में लड़की की रीढ़ की हड्डी टूट गई और उसकी जीभ भी कट गई. 

घटना के बाद चारों आरोपी लड़की को मरा समझकर वहां से भाग निकले. लड़की की मां उसे ढूंढते हुए वहां पहुंची तो उसके होश उड़ गए. उसने आवाज़ लगाकर लोगों को मदद के लिए बुलाया. फौरन लड़की को इलाज के लिए अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया. लड़की की हालत बहुत गंभीर थी. लेकिन उसका इलाज चलता रहा. पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर आईपीसी की धारा 307(जान से मारने का प्रयास) का मुकदमा दर्ज किया. लड़की चूंकि दलित थी इसलिए एससी-एसटी एक्ट भी लगाया गया.

19 सितंबर 2020
लड़की का ऐसा हाल किसने किया, पुलिस इस सवाल का जवाब तलाश रही थी. तभी पुलिस को पीड़िता के पड़ोस में रहने वाले एक लड़के की सूचना मिली कि वो कहीं गायब है. पुलिस शक के आधार पर उसकी तलाश में जुट गई. और पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली और इस घृणित कांड को अंजाम देने वाले आरोपी ठाकुर संदीप सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया. 

22 सितंबर 2020
घटना के बाद 8 दिन तक पीड़ित लड़की बेहोश रही. 22 सितंबर को लड़की होश में आई तो उसने आपबीती सुनाई. तीन अन्य आरोपियों के नाम भी पुलिस को बताए. पुलिस हरकत में आई और पीड़ित परिवार की तहरीर पर बलात्कार की धारा भी एफआईआर में जोड़ दी गई. आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई. 

23 सितंबर 2020
पीड़िता ने अपने बयान में आरोपियों के बारे में बता दिया था. सभी आरोपी पीड़िता के ही गांव के थे. लिहाजा पुलिस ने उनके ठिकानों पर दबिश देना शुरू कर दिया. इसी दौरान पुलिस ने दबिश देकर लवकुश पुत्र रामवीर सिंह को गिरफ्तार कर लिया.

24 सितंबर 2020
पुलिस ने संदीप और लवकुश को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन अभी दो आरोपी फरार थे. लिहाजा उनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही थी. उधर, सूबे की राजनीति भी इस मामले पर गर्मा चुकी थी. विपक्ष के तेवर तीखे हो रहे थे.

25 सितंबर 2020
पुलिस अपने मुखबिर तंत्र के सहारे आरोपियों की तलाश में जुटी थी. इसी बीच पुलिस को एक आरोपी का सुराग लगा. पुलिस ने फौरन बताए गए स्थान पर दबिश दी और एक और आरोपी रवि सिंह पुत्र अतर सिंह को धर दबोचा. लेकिन अभी भी एक आरोपी खुला घूम रहा था. पुलिस उसके पीछे थी.

26 सितंबर 2020
पुलिस शिद्दत से चौथे आरोपी की तलाश कर रही थी, जो पुलिस से भाग रहा था. वो आगे था और पुलिस पीछे. लगातार उसके सुराग जुटाए जा रहे थे. इसी दौरान एक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने एक जगह छापेमारी की और चौथा आरोपी रामकुमार उर्फ रामू पुत्र राकेश सिंह पुलिस के हत्थे चढ़ गया.

27 सितंबर 2020
उधर, अलीगढ़ मेडिकल अस्पताल में पीड़ित लड़की की हालत बिगड़ती जा रही थी. वहां के डॉक्टर उसे संभाल नहीं पा रहे थे. डॉक्टरों ने उसकी हालत देखने के बाद उसे रेफर करने का फैसला लिया और उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेज दिया गया. 

28 सितंबर 2020 
चारों आरोपी अब कानून के शिकंजे में फंस चुके थे. पुलिस ने राहत की सांस ली. लेकिन इधर, दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में लड़की की हालत बहुत नाजुक थी. उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था. इस मामले को लेकर कांग्रेस ने योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. यूपी में इस घटना के विरोध में धरना प्रदर्शन तेज हो गए.

29 सितंबर 2020
मंगलवार की सुबह हाथरस की निर्भया जिंदगी की जंग हार गई. सुबह 6 बजे उसने दम तोड़ दिया. वो हमेशा के लिए खामोश हो गई. मौत उसे अपनी आगोश में लेकर हमेशा के लिए चली गई. उसका इलाज करने वाले डॉक्टरों ने कहा कि लड़की की हालत बेहद गंभीर थी. उसे बचा पाना बहुत मुश्किल था. उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था. सुबह 6 बजे उसकी सांस थम गई. इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया.  

ये हैं हाथरस की निर्भया के गुनहगार
ठाकुर संदीप सिंह (22 वर्ष)   - वह 12वीं पास है और गांव में रहकर ही खेती का काम करता है.
लवकुश सिंह (19 वर्ष)          - वह 10वीं कक्षा पास है और गांव में ही रहता है. कोई काम नहीं करता.
रामकुमार उर्फ रामू (28 वर्ष) - वह 12वीं पास है. दूध के एक चिलर पर काम करता है.
रवि सिंह (35 वर्ष)                - वह 10वीं पास है. हाथरस में रहकर ही पल्लेदारी का काम करता है.  


उधर, मामले के तूल पकड़ लेने के बाद योगी सरकार के मंत्री और प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि यह दिल दहला देने वाली घटना है. सरकार ने तुरंत एक्शन लिया है. आरोपी पकड़े गए हैं और जल्द से जल्द उस लड़की को न्याय दिलाया जाएगा. मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि इस घटना को राज्य की कानून व्यवस्था से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. 

दूसरी तरफ, हाथरस जिले के डीएम ने सफाई पेश करते हुए कहा कि पीड़िता की जीभ काटने की बात झूठी है. सभी चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा लिखा गया है. पीड़िता के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई है.
 

 

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