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हाथरस की निर्भया: सफदरजंग में धरने पर बैठे परिजनों को साथ ले गई पुलिस

हाथरस गैंगरेप पीड़िता के पिता और भाई सफदरजंग अस्पताल में धरने पर बैठे थे. पुलिस अब उन्हें अपने साथ ले गई है. इससे पहले परिजनों ने आरोप लगाया कि हमारी अनुमति के बिना शव को अस्पताल से ले जाया गया. हमें कोई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट नहीं मिली.

सफदरजंग अस्पताल (फाइल फोटो) सफदरजंग अस्पताल (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पिता और भाई अस्पताल में धरने पर बैठे थे
  • 'बिना अनुमति के शव को ले जाया गया'
  • परिवार का कहना-हमें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी नहीं मिली

हाथरस गैंगरेप पीड़िता की मौत के बाद देश में गुस्से का माहौल है. आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की जा रही है. पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए मुहिम भी छिड़ गई है. देश के कई हिस्सों में कैंडल मार्च निकाला गया. वहीं, पीड़िता के परिजनों ने सफदरजंग अस्तपाल पर कई आरोप लगाए हैं. पीड़िता के पिता और भाई सफदरजंग अस्पताल में धरने पर बैठ गए थे. हालांकि, पुलिस ने बाद में उन्हें हटा दिया.  

परिजनों ने आरोप लगाया कि हमारी अनुमति के बिना शव को अस्पताल से ले जाया गया. हमें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट नहीं मिली. हमने किसी कागजात पर हस्ताक्षर नहीं किए. परिवार का कहना है कि हमारी अनुमति के बिना अस्पताल शव को कैसे ले जा सकता है.

पीड़िता के भाई ने पुलिस पर लगाए आरोप

पीड़िता के भाई ने हाथरस पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि पुलिसवालों ने एंबुलेंस नहीं मंगाई. बहन जमीन पर लेटी हुई थी. पुलिसवालों ने कह दिया था कि इन्हें यहां से ले जाओ. ये बहाने बनाकर लेटी हुई है. पीड़िता के भाई ने कहा कि 10 से 15 दिन तक तो दीदी की ब्लीडिंग रुकी तक नहीं थी. 22 सितंबर के बाद उन्हें अच्छा इलाज मिलना शुरू हुआ. उनके साथ लापरवाही बरती गई. उन्हें ठीक से इलाज नहीं दिया गया.

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हाथरस में भी लोगों का गुस्सा

पीड़िता की मौत के बाद गुस्साए लोगों ने हाथरस के चंदपा थाने के पास सड़क जाम कर दिया है. उन्हें समझाने के लिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पहुंच गए हैं.

अलीगढ़ के डॉक्टर ने क्या कहा 

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जेएन मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के डॉ एमएफ हुड्डा ने कहा कि पीड़िता को 14 सितंबर की रात को हमारे अस्पताल लाया गया था. उनके शरीर पर काफी चोट थी. उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई थी, जिसके परिणामस्वरूप पूरे शरीर को लकवा मार गया था. बता दें कि पीड़िता अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज से ही दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल रेफर की गई थी.

परिवार बोला- एडीजी झूठ बोल रहे हैं

पीड़िता के परिवार ने एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार के बयान पर प्रतिक्रिया दी है. परिवार का कहना है कि एडीजी झूठ बोल रहे हैं. पीड़िता ने 22 सितंबर को अपना पहला बयान दिया था और गैंगरेप की बात कही थी. इससे पहले किसी को नहीं पता था कि उनके साथ गैंगरेप किया गया था, क्योंकि वो बेहोश थीं.

एडीजी ने क्या कहा था

आजतक से बात करते हुए एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने कहा कि यह घटना 14 सितंबर को सुबह 9.30 हुई. उसके बाद लड़की अपने भाई के साथ थाने पर पहुंची और गला दबाकर हत्या करने की कोशिश का मामला दर्ज कराया गया. इसके बाद लड़की को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया. मामला SC/ST एक्ट का था, इसलिए क्षेत्राधिकारी स्तर के अधिकारी को जांच दी गई.


 

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