पंजाब में एक के बाद एक हुए दो धमाकों ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. जालंधर और अमृतसर में बीएसएफ और आर्मी से जुड़े इलाकों के पास हुए इन धमाकों ने बड़े आतंकी मॉड्यूल की आशंका को जन्म दिया है. शुरुआती जांच में खालिस्तानी कनेक्शन और ISI की साजिश के संकेत मिल रहे हैं. अब इस पूरे मामले की जांच NIA को सौंप दी गई है. सवाल यह है कि क्या ये सिर्फ लोकल वारदात है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है?
इससे पहले कि हम हालिया धमाकों और आतंकी नेटवर्क की बात करें, पहले ये आपको बता दें कि पंजाब में इस तरह की ये कोई पहली वारदात या धमाके नहीं हैं, पिछले कुछ सालों में ऐसी कई घटनाएं पहले भी सामने आई हैं-
30 मार्च 2026
अमृतसर ग्रामीण के भिंडी सैदां पुलिस स्टेशन परिसर में धमाका हुआ, जिसे नकाबपोशों ने फेंका था.
27 अप्रैल 2026
पटियाला के राजपुरा में रेलवे ट्रैक पर IED लगाने की कोशिश के दौरान धमाका हुआ, जिसमें आरोपी की मौत हो गई.
14 दिसंबर 2024
गुरदासपुर के घनिया के बांगर पुलिस स्टेशन पर ग्रेनेड से हमला किया गया.
17 दिसंबर 2024
वहीं इस्लामाबाद पुलिस स्टेशन पर ग्रेनेड अटैक किया गया.
18 दिसंबर 2024
इसी तरह बख्शीवाला पुलिस पोस्ट पर ग्रेनेड फेंका गया.
20 दिसंबर 2024
वडला बांगर पुलिस पोस्ट पर ग्रेनेड हमला किया गया.
23 नवंबर 2024
अमृतसर के अजनाला पुलिस स्टेशन पर ग्रेनेड फेंका गया.
29 नवंबर 2024
अमृतसर के गुरबख्श नगर पुलिस पोस्ट पर ग्रेनेड हमले की कोशिश हुई.
10 दिसंबर 2022
तरनतारन के सरहाली पुलिस स्टेशन पर RPG हमला किया गया.
9 मई 2022
मोहाली में पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर पर RPG हमला किया गया.
इन हमलों का मकसद पुलिस के मनोबल को गिराना और राज्य में अशांति फैलाना माना जा रहा है. इन सब मामलों की जांच में पाकिस्तान समर्थित आतंकी मॉड्यूल, खालिस्तानी आतंकी जैसे लखबीर लंडा और गैंगस्टर नेटवर्क का हाथ सामने आया. इन हमलों में मिलिट्री-ग्रेड हथियारों, विशेषकर RPGs का इस्तेमाल किया गया, जो ड्रोन के माध्यम से सीमा पार से आए थे. इन घटनाओं के बाद पंजाब पुलिस ने ऑपरेशन प्रहार जैसे कदम उठाए और सुरक्षा पुख्ता की है.
हाल के दो धमाकों से दहला पंजाब
सबसे पहले जालंधर में बीएसएफ मुख्यालय के बाहर धमाका हुआ, जिसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी. यह ब्लास्ट रात करीब 8 बजे हुआ और इसकी आवाज दूर तक सुनी गई. धमाके के बाद वहां खड़ी एक स्कूटी में आग लग गई, जिससे शुरुआत में यह शक हुआ कि ब्लास्ट उसी में हुआ है. लेकिन बाद में जांच में सामने आया कि स्कूटी सिर्फ उसकी चपेट में आई थी. घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं और पूरे इलाके को सील कर दिया गया.
जालंधर ब्लास्ट की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. सूत्रों के मुताबिक, IED पहले से ही अलग जगह पर रखा गया था और उसी में धमाका हुआ. स्कूटी का इससे कोई सीधा संबंध नहीं था. CCTV फुटेज में कुछ संदिग्ध लोगों की गतिविधियां भी देखी गई हैं, जो घटना से पहले और बाद में वहां घूमते नजर आए. इन संदिग्धों की पहचान करने के लिए पुलिस लगातार फुटेज खंगाल रही है और कई एंगल से जांच आगे बढ़ रही है.
जालंधर धमाके के कुछ घंटों बाद ही अमृतसर के खासा इलाके में एक और ब्लास्ट हो गया. यह धमाका आर्मी कैंप की बाहरी दीवार के पास हुआ, जिससे सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं. खासा आर्मी कैंप इंटरनेशनल अटारी-वाघा बॉर्डर से करीब 15 किलोमीटर दूर है, जो इसे और भी संवेदनशील बनाता है. इस घटना ने यह संकेत दिया कि यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश हो सकती है.
अमृतसर ब्लास्ट को लेकर पुलिस ने पुष्टि की है कि यह धमाका खासा मिलिट्री कैंप के बाहर गेट नंबर 6 और 7 के बीच हुआ. शुरुआती जांच में सामने आया है कि बाइक सवार हमलावरों ने कैंप की दीवार की तरफ ग्रेनेड फेंका था. धमाके की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि आसपास के इलाकों में भी इसकी आवाज सुनी गई और कैंप की दीवारें तक हिल गईं. इससे साफ है कि हमलावरों का इरादा बड़ा नुकसान पहुंचाने का था.
अमृतसर ग्रामीण पुलिस के एसपी आदित्य वारियर के मुताबिक, रात करीब 10:30 से 11 बजे के बीच धमाके की सूचना मिली थी. इसके बाद तुरंत पुलिस और आर्मी की टीमें मौके पर पहुंचीं. फिलहाल पूरे इलाके को घेर लिया गया है और हर एंगल से जांच की जा रही है. फॉरेंसिक टीम और बम डिस्पोजल स्क्वॉड (BDS) को भी मौके पर बुलाया गया है, ताकि विस्फोटक के प्रकार और इस्तेमाल की गई तकनीक का पता लगाया जा सके.
दोनों घटनाओं में समानता को देखते हुए जांच एजेंसियां इसे एक ही मॉड्यूल का काम मान रही हैं. जालंधर और अमृतसर दोनों जगहों पर हुए धमाकों का पैटर्न काफी हद तक मिलता-जुलता है. इससे शक गहरा गया है कि इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है. खुफिया एजेंसियां इस एंगल से भी जांच कर रही हैं कि कहीं यह खालिस्तानी आतंकियों की साजिश तो नहीं है.
सीसीटीवी फुटेज दोनों घटनाओं में अहम भूमिका निभा रहे हैं. अमृतसर ब्लास्ट का वीडियो सामने आया है, जिसमें धमाके का क्षण साफ दिखाई देता है. वहीं जालंधर में भी संदिग्ध लोगों की गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं. इन फुटेज के आधार पर पुलिस संदिग्धों की पहचान करने और उनके नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की जा रही है.
जालंधर मामले में पुलिस ने एक एक्टिवा चालक को हिरासत में लिया है. उससे पूछताछ के जरिए यह जानने की कोशिश की जा रही है कि उसका इस घटना से क्या संबंध है. हालांकि अभी तक उसकी भूमिका पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि IED किसने और कैसे वहां प्लांट किया था.
इन धमाकों के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के एंगल से भी जांच शुरू कर दी है. पंजाब पहले भी कई बार ISI समर्थित आतंकी गतिविधियों का केंद्र रहा है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इन हमलों के पीछे सीमा पार से कोई साजिश हो सकती है. खासकर अटारी-वाघा बॉर्डर के पास धमाका होना इस शक को और मजबूत करता है.
खालिस्तानी आतंकवाद का मुद्दा भी इस केस में अहम बनकर उभरा है. पिछले कुछ समय में पंजाब में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों में इजाफा देखा गया है. जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कहीं ये धमाके उसी नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं हैं. अगर ऐसा होता है तो यह देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है.
इन गंभीर हालात को देखते हुए अब इस पूरे मामले की जांच NIA को सौंप दी गई है. NIA की एंट्री के बाद जांच और तेज हो गई है और इंटर-स्टेट और इंटरनेशनल लिंक की भी पड़ताल शुरू हो गई है. एजेंसी तकनीकी और खुफिया इनपुट के आधार पर पूरे मॉड्यूल को ट्रैक करने में जुटी है. इससे उम्मीद है कि जल्द ही इस साजिश का पर्दाफाश हो सकता है.
फिलहाल पंजाब में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है. संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई है और बॉर्डर पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है. लगातार हो रहे इन धमाकों ने आम लोगों में भी डर का माहौल बना दिया है. अब सबकी नजर NIA की जांच पर है, जिससे यह साफ हो सके कि आखिर इन हमलों के पीछे कौन है और उनका मकसद क्या था?