उत्तर प्रदेश के कानपुर में सामने आए किडनी रैकेट केस में हर दिन नए चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. अब इस मामले में एक सरकारी अस्पताल के सिक्योरिटी गार्ड की भूमिका सामने आई है, जिसने पुलिस जांच को और भी उलझा दिया है. महज 20 हजार रुपये की नौकरी करने वाला वह गार्ड खुद एक अस्पताल का मालिक निकला और आरोप है कि वह किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लोगों को अस्पतालों से जोड़ता था.
पुलिस की पूछताछ में अब अजय नाम के इस शख्स की भूमिका उजागर हुई है, जो एक सरकारी हेलिक्स अस्पताल में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम करता है. शुरुआत में वह एक मामूली कर्मचारी लग रहा था, लेकिन जांच में उसकी भूमिका कहीं ज्यादा गहरी निकली. अजय का नाम सामने आते ही पुलिस ने उसे नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया. यह खुलासा पूरे मामले को एक नए एंगल से देखने पर मजबूर कर रहा है.
सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि अजय सिर्फ गार्ड ही नहीं, बल्कि खुद एक अस्पताल का मालिक भी रह चुका है. पुलिस के अनुसार, उसने स्टार हॉस्पिटल नाम से एक अस्पताल खोला था, जिसे कुछ समय पहले बंद कर दिया गया. एक मामूली सैलरी पाने वाले व्यक्ति का अस्पताल मालिक होना जांच एजेंसियों के लिए बड़ा सवाल बन गया है. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस अस्पताल के लिए पैसा कहां से आया और इसका किडनी रैकेट से क्या कनेक्शन था.
जांच में यह भी सामने आया है कि अजय किडनी रैकेट के मुख्य आरोपी शिवम और अन्य लोगों को अस्पतालों से जोड़ने का काम करता था. वह जरूरतमंद मरीजों और डोनर को अलग-अलग अस्पतालों तक पहुंचाने में मदद करता था. पुलिस का मानना है कि अजय इस पूरे नेटवर्क में एक अहम कड़ी के तौर पर काम कर रहा था. उसकी भूमिका सिर्फ एक कर्मचारी तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह पर्दे के पीछे एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा था.
पुलिस पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि अजय ने ही आरोपी शिवम की मुलाकात रोहन और नरेंद्र से करवाई थी. यही लोग आगे चलकर मेडलाइफ नाम का अस्पताल शुरू करने में शामिल हुए. इस अस्पताल का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यहीं पर किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े मामलों के सबूत मिलने की बात सामने आई है. पुलिस अब इस कनेक्शन को जोड़कर पूरे रैकेट की परतें खोलने में जुटी है.
मेडलाइफ अस्पताल को लेकर एक और अहम जानकारी सामने आई है. बताया जा रहा है कि यहां पहले भी कई किडनी ट्रांसप्लांट हो चुके हैं. इतना ही नहीं, इस मामले के व्हिसलब्लोअर आयुष को भी ऑपरेशन के बाद इसी अस्पताल में रखा गया था. आयुष वही शख्स है जिसने पारुल को किडनी दी थी और बाद में इस पूरे रैकेट का खुलासा हुआ. यह तथ्य जांच एजेंसियों के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है.
पुलिस को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर है कि एक गार्ड की नौकरी करने वाला व्यक्ति इतने बड़े स्तर पर कैसे काम कर सकता है. उसकी आय और संपत्ति के बीच का अंतर भी जांच के दायरे में है. इसी वजह से अजय को नोटिस देकर विस्तृत पूछताछ के लिए बुलाया गया है और उसे आगे भी जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं. पुलिस अब उसके बैंक खातों, संपत्तियों और संपर्कों की जांच कर रही है.
फिलहाल पुलिस के पास इतने ठोस सबूत नहीं हैं कि मेडलाइफ अस्पताल में हुए ट्रांसप्लांट के डोनर और रिसीवर की पूरी जानकारी सामने लाई जा सके. जांच अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और सबूतों के आधार पर ही आगे की गिरफ्तारी तय की जाएगी. यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं.