
भारत में हर दिन कोरोना केसों का नया रिकॉर्ड दर्ज हो रहा है. अब ये महामारी धीरे-धीरे देश के दूर-दराज के इलाकों में भी फैल रही है. भारतीय जिलों के आंकड़ों से पता चलता है कि जहां कोरोना केस ज्यादा हैं, वहां तो ये वायरस खत्म नहीं हो रहा है, लेकिन नए क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले रहा है.
वेबसाइट ‘covid19india.org’ ने जिला स्तर पर दर्ज होने वाले आधिकारिक आंकड़ों को एकत्र किया है. ये आंकड़े दिखाते हैं कि 29 अगस्त को भारत में जितने नए केस दर्ज हुए, वे सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों से नहीं थे, बल्कि सबसे ज्यादा नए केस उन जिलों से थे जहां कुल केस 500 से कम है.
दिल्ली और तेलंगाना जैसे कुछ राज्य जिला-स्तरीय डेटा जारी नहीं करते हैं, इसलिए उन्हें इस विश्लेषण में शामिल नहीं किया गया है.
9 जिले जहां 1 हजार से ज्यादा केस
29 अगस्त को 15,000 से ज्यादा नए केस सिर्फ 9 जिलों में दर्ज हुए. ये 9 जिले ऐसे हैं जहां 1,000 से ज्यादा केस दर्ज हुए. इनमें से ज्यादातर शहरी जिले हैं और सबसे ज्यादा प्रभावित दक्षिणी राज्यों के हैं. इनमें 5 जिले महाराष्ट्र (पुणे, नागपुर, मुंबई, ठाणे और नासिक) के हैं. इस लिस्ट में बेंगलुरु और चेन्नई भी हैं. इसमें आंध्र प्रदेश के भी 2 जिले (पूर्वी गोदावरी और नेल्लोर) हैं.

500 से लेकर 1,000 तक केस वाले जिले आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में हैं, जबकि 100 से लेकर 500 केस वाले जिले पूरे देश में हैं. कर्नाटक और तमिलनाडु में ऐसे जिलों की संख्या सबसे ज्यादा है.
भारत के जिलों में हर दिन नए केस की संख्या के आंकड़ों पर नजर डालें तो महामारी पर वास्तविक तस्वीर सामने आती है. जून की शुरुआत से हर हफ्ते महामारी भारत के दूर-दराज के इलाकों में और गहरे तक फैल रही है. एक तरफ नए केस दर्ज करने वाले जिलों की संख्या में वृद्धि हुई है तो दूसरी तरफ जिन जिलों में कोरोना पहले ही पहुंच चुका था, वहां के आंकड़ों में बदलाव आया है.
हर दिन 500 तक केस दर्ज
रोजाना 100 से कम केस दर्ज करने वाले जिलों की संख्या में बहुत ज्यादा अंतर नहीं आया है, लेकिन कई जिले अब हर दिन 100 से लेकर 500 केस तक दर्ज कर रहे हैं.

पिछले 3 महीनों में हर दिन 100 से कम केस दर्ज करने वाले जिलों की संख्या 400 से ऊपर बनी हुई है. लेकिन इसी अवधि में हर दिन 100 से 500 तक केस दर्ज करने वाले जिलों की संख्या 6 से बढ़कर 141 हो गई है.
ये जिले देश में सबसे ज्यादा प्रभावित होने के लिए सुर्खियों में तो नहीं आ सकते, लेकिन ज्यादातर जिलों में हर दिन जितने केस आ रहे हैं, वे सार्वजनिक हेल्थ सुविधा के लिए बहुत बड़ी चुनौती होंगे.