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कोरोना वॉरियर्स: भागलपुर में एक अस्पताल लिख रहा इंसानियत की इबारत

मुश्किल दिनों में उम्मीद की किरण बना भागलपुर का यह अस्पताल इन दिनों आईसीयू भी चला रहा है. जिला प्रशासन ने इस अस्पताल से गुजारिश की है कि वो भागलपुर सरकारी अस्पताल के गैर Covid-19 मरीजों को अपने यहां ले ले क्योंकि सरकारी अस्पताल को Covid-19 अस्पताल बना दिया गया है.

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भागलपुर के हीलिंग टच अस्पताल में गैर कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है (फोटो-मौसमी)
भागलपुर के हीलिंग टच अस्पताल में गैर कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है (फोटो-मौसमी)

  • कोरोना की वजह से ज्यादातर अस्पताल बंद
  • डॉक्टर बहुत ही विनम्र और संवेदनशीलः शगुन
  • यह अस्पताल अपने यहां आईसीयू भी चला रहा

कोरोना संकट के दौरान छोटे शहरों में डॉक्टर फरिश्तों से कम भूमिका नहीं निभा रहे. बिहार के भागलपुर में कई अस्पतालों ने अपने शटर गिरा रखे हैं, लेकिन एक अस्पताल ऐसा भी है जो इंसानियत की नई इबारत लिख रहा है. जिन महिलाओं की डिलिवरी होनी है, उनके लिए इस अस्पताल के डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप बनकर सामने आए हैं. इस अस्पताल में कोरोना (Covid-19 ) को छोड़कर अन्य गंभीर मरीजों का इलाज हो रहा है.

कोरोना वायरस की वजह से पाबंदियों और अनिश्चितता का हर तरफ माहौल है. ऐसे में एक युवा मां के लिए अपनी नन्ही परी के पहली बार रोने की आवाज वरदान से कम नहीं. परिवार के हर सदस्य के चेहरे पर मुस्कान है.

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नन्ही परी के दुनिया में कदम रखने से पहले तक परिवार चिंतित था. जब हर तरफ दरवाजे बंद थे तो भागलपुर के हीलिंग टच अस्पताल ने वाकई इस परिवार को हीलिंग टच देकर अपने नाम को सार्थक कर दिया.

डॉक्टरों-मेडिकल स्टाफ की शुक्रगुज़ार

नन्ही परी को जन्म देने वाली मां शगुन अस्पताल के डॉक्टर, नर्स और स्टाफ का शुक्रिया करते नहीं थकती. शगुन ने कहा, 'मैं यहां डॉक्टरों और पूरे मेडिकल स्टाफ की शुक्रगुज़ार हूं. मैं जिस डॉक्टर को पहले दिखाती थी उनके उपलब्ध न होने की वजह से फिक्र बढ़ गई थी. मेरा केस भी जटिल था. इस अस्पताल के डॉक्टर बहुत ही विनम्र और संवेदनशील हैं, यहां सभी ने मेरा पूरा ख्याल रखा.'

जब शगुन को लेबर पेन शुरू हुई तो पूरा परिवार घबरा गया. ये जटिल केस था और तत्काल ख़ून की आवश्यकता थी. अधिकतर नर्सिंग होम्स या तो बंद थे या केस लेने को तैयार नहीं थे. ऐसी स्थिति में हीलिंग टच अस्पताल चलाने वाले डॉक्टर दंपति शगुन के लिए देवदूत बनकर सामने आए.

गाइनेकोलॉजिस्ट और आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ प्रतिभा सिंह ने बताया, 'ये छोटा शहर है. यहां प्रोटेक्टिव गियर भी उपलब्ध नहीं है. हमारे पास N95 मास्क भी नहीं हैं. ऐसे में संक्रमण की संभावना को रोकने के लिए हम तीन लेयर्स वाले साधारण मास्क ही पहनते हैं.'

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उन्होंने कहा कि हम मरीजों को बताते हैं कि वो क्या-क्या सावधानियां बरतें. ऐसे किसी व्यक्ति के पास जाने से बचें जिसने हाल में यात्रा की हो. तमाम एहितायत बरतने के बाद भी संक्रमण का खतरा तो हमारे लिए भी बना ही रहता है.

कोरोना वायरस का खौफ जहां हर किसी पर छाया है ऐसे में अस्पताल के स्टाफ के हौसले को ऊंचा बनाए रखना भी चुनौती से कम नहीं है.

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जरूरी प्रोटेक्टिव गियर्स नहीं- डॉ संजय सिंह

डीकेएस हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन डॉ संजय सिंह ने कहा, 'टीम को प्रेरित रखना भी बड़ी चुनौती है. वो खुद भी संक्रमण के खतरे से डरते हैं. हमारे पास जरूरी प्रोटेक्टिव गियर्स नहीं है. अगर हमें कोविड-19 मरीजों का इलाज करना पड़ जाए तो दिक्कत आ सकती है. हमने प्रशासन से प्रोटेक्टिव गियर्स मुहैया कराने के लिए आग्रह किया है.'

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शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अजय कुमार कहते हैं, 'नवजात शिशुओं को अटैंड करना जोखिम वाला होता है, उनमें से 80% को ठंड या खांसी होती है. हम उनके तीमारदारों को भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और सैनिटाइजर्स का इस्तेमाल करते रहने के लिए कहते हैं.'

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उन्होंने कहा, 'कोरोना वायरस का खतरा हर किसी के लिए है. डॉक्टर होने की वजह से हम अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहे हैं लेकिन इंसान तो हम भी हैं, ऐसे में कभी-कभी हमें भी फिक्र होती है.'

मुश्किल दिनों में उम्मीद की किरण बना ये अस्पताल आईसीयू भी चला रहा है. प्रशासन ने इस अस्पताल से गुजारिश की है कि वो भागलपुर सरकारी अस्पताल के गैर Covid-19 मरीजों को अपने यहां ले ले क्योंकि सरकारी अस्पताल को Covid-19 अस्पताल बना दिया गया है.

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