scorecardresearch
 

किराये पर रहते हैं? फिर फंस गए आप, सबसे पहले खरीदें अपना घर... डबल फायदे

Rent vs Buy Home: सीमित आमदनी और ज्यादा खर्चीले लोगों के लिए होम लोन एक तरह से फोर्स्ड सेविंग (Forced Saving) बन जाता है. EMI भरते-भरते 15–20 साल में एक बड़ी संपत्ति बन जाती है.

Advertisement
X
कमाई की शुरुआत में घर खरीदने का फैसला कैसे बेहतर. (Photo: ITG)
कमाई की शुरुआत में घर खरीदने का फैसला कैसे बेहतर. (Photo: ITG)

घर खरीदना चाहिए या नहीं? इसे लेकर बहस आम बात है, कुछ एक्सपर्ट्स राय देते हैं कि नौकरी पकड़ते ही घर खरीद लेने से आप वित्तीय तौर पर बंधकर रह जाते हैं. ऐसे लोग घर खरीदने के बाद बड़े वित्तीय फैसले नहीं ले पाते, इसलिए जरूरी है कि जब आप फाइनेंशियली आत्मनिर्भर हो जाएं, तभी घर खरीदें, ताकि EMI सिरदर्द न बने. 

लेकिन ये सिक्के का एक पहलू है, दूसरा पहलू कुछ लोगों के लिए जिंदगी का सबसे बेहतर फैसला साबित हो सकता है. यानी घर खरीदना चाहिए, सबसे पहले खरीदना चाहिए. इसके फैसले के पीछे आर्थिक अनुशासन और सुरक्षा का मजबूत गठजोड़ है.  

खर्चीले लोगों के लिए ये फॉर्मूला 

आपके आसपास भी तमाम ऐसे लोग होंगे, जिन्होंने घर नहीं खरीदा होगा, और वर्षों से किराये पर रह रहे होंगे. लेकिन उनके पास सेविंग भी नहीं है, जो कमाते हैं, वो सब किराया देने के बाद अन्य चीजों पर खर्च कर देते हैं. ऐसे में जब लोग घर नहीं खरीदते हैं, तो उनकी सैलरी का बड़ा हिस्सा घूमने-फिरने, महंगी चीजें, गाड़ी या लाइफस्टाइल पर खर्च हो जाता है. जब तक वो कमा रहे हैं, तब तक तो सब ठीक है, लेकिन जब नौकरी नहीं रहेगी, तो फिर वो खुद कहां रहेंगे, परिवार को कहां रखेंगे, क्योंकि कमाई के दौरान बचत पर फोकस बिल्कुल नहीं था, क्योंकि EMI की टेंशन भी नहीं थी. 

Advertisement

आपको लाखों लोग ऐसे मिल जाएंगे, जो अच्छी-खासी सैलरी होने के बावजूद घर नहीं खरीद पाते, और किराये पर रहकर पूरी सैलरी खर्च करते हैं. लेकिन अगर इन्होंने नौकरी पकड़ते ही घर लेना का फैसला कर लेते तो स्थिति कुछ और होती. क्योंकि हर महीने EMI की टेंशन होती, हर महीने एक तय रकम निवेश की तरह घर में लगती रहती.

फिर बचत मजबूरी बन जाती है, सीमित आमदनी और ज्यादा खर्चीले लोगों के लिए होम लोन एक तरह से फोर्स्ड सेविंग (Forced Saving) बन जाता है. EMI भरते-भरते 15–20 साल में एक बड़ी संपत्ति बन जाती है. जबकि किराये पर रहते हुए कुछ हासिल नहीं कर पाते. 

किराया देने से बेहतर- खरीदें एक छोटा घर
अगर आप भी किराये के घर में रहते हैं, तो हर महीने दिया गया किराया किसी और की संपत्ति बना रहा होता है. लेकिन EMI देने से वही पैसा आपकी अपनी संपत्ति में बदल जाता है. समय के साथ प्रॉपर्टी की कीमत भी बढ़ती है, जिसका अलग से लाभ मिलता है. इसलिए जल्दी घर खरीदने से कम कीमत पर एंट्री मिल जाती है और भविष्य में बड़ा लाभ मिल सकता है. 

भारत में घर खरीदने का फैसला इमोशन से भी जुड़ा हुआ होता है, किराये पर रहने में हमेशा इस बात की टेंशन रहती है, कि मकान मालिक कभी भी घर खाली करने को कह सकते हैं. अपना घर होने से तनाव थोड़ा कम होता है. नौकरी में उतार-चढ़ाव के दौरान भी घबराहट कम होती है, कि मेरे पास एक घर है रहने के लिए, मुसीबत में इस्तेमाल कर सकते हैं. 

Advertisement

आइए एक उदाहरण से समझते हैं, अगर कोई शख्स परिवार के साथ मंथली 20 हजार रुपये के किराये पर मकान में रहता है, किराया साल-दर-साल बढ़ता है, कम से कम 8 से 10 फीसदी सालाना बढ़ोतरी संभव है. आप चाहे 10 साल किराये के मकान में रहें, या फिर 20 साल. बचत कुछ भी नहीं है, जब आप छोड़कर जाएंगे, तो कुछ नहीं मिलने वाला है. 20 हजार के हिसाब से ही 20 साल आप किराये करीब 48 लाख रुपये भर देंगे, इसमें सालाना बढ़ोतरी को नहीं जोड़ा गया है, अगर किराये में सालाना 8 फीसदी की बढ़ोतरी होती है, तो 20 साल में कुल किराये में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा चला जाएगा. 20वें साल में मासिक किराया ही बढ़कर करीब 86,000 रुपये हो जाएगा. यानी करीब 1 करोड़ से ज्यादा किराये में चला जाता है, लेकिन बदले में कोई संपत्ति नहीं बनती.

घर खरीदने के डबल फायदे 

अब यही शख्स अगर मकान खरीदने का फैसला ले लेता है, तो वह जब किराये के लिए 20 हजार रुपये महीने दे सकता है तो फिर होम लोन की EMI मंथली 25 हजार तक भी आसानी से भर सकता है, क्योंकि मकान का किराया भी हर साल बढ़ने वाला है, लेकिन होम लोन की EMI अगले 20 साल तक फिक्स रहने वाली है. 

Advertisement

अगर व्यक्ति घर खरीद लेता है, जिसकी अनुमानित कीमत 35-40 लाख रुपये हो सकती है. थोड़ा बहुत डाउन पेमेंट के बाद 25,000 रुपये की EMI अगले 20 साल तक देते हैं, तो कुल 60 लाख रुपये देना होगा. अब फायदे देखते हैं, आप इस घर में रह भी सकते हैं. इस दौरान प्रॉपर्टी की कीमत भी बढ़ती रहेगी, भारत में कई शहरों में प्रॉपर्टी की कीमत औसतन 6–8% सालाना बढ़ती है, इस हिसाब से 40 लाख रुपये तक का घर खरीदने पर 20 साल के बाद कीमत बढ़कर करीब 1.2 करोड़ रुपये हो सकती है. हालांकि प्रॉपर्टी की कीमत लोकेशन पर ज्यादा निर्भर करती है. 

इसी वजह से कई फाइनेंशियल एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर EMI किराये के आसपास है, तो जल्दी घर खरीदना लंबे समय में फायदेमंद हो सकता है. खासकर ऐसे लोगों के लिए जो बहुत खर्चीले हैं और किराये पर रहकर बचत नहीं कर पा रहे. हालांकि हर स्थिति में तुरंत घर खरीदना जरूरी नहीं होता है. अगर किसी शहर में नौकरी अस्थायी है या EMI आय के मुकाबले बहुत ज्यादा है, तो पहले बचत और निवेश करना भी बेहतर रणनीति हो सकती है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement