ये गजब संयोग है, होली के दिन शेयर बाजार (Share Market Open on Holi) खुला हुआ है. दरअसल, निवेशकों के पास त्योहार के दिन भी बाजार की चाल पर नजर रखने का मौका है. होली के मौके पर आप अपने पोर्टफोलियो (Portfolio) में रंग भर सकते हैं. हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसे अवसर पर भावनाओं में आकर ट्रेडिंग करने के बजाय समझदारी से निवेश रणनीति अपनाना ज्यादा फायदेमंद होता है.
बैलेंस का गुलाल
पोर्टफोलियो में रंग भरने का मतलब है, निवेश को संतुलित और डायवर्सीफाई बना सकते हैं. सबसे पहले निवेशकों को अपने निवेश अलग-अलग सेक्टर्स में करना चाहिए. बैंकिंग, आईटी, ऑटो, फार्मा और एफएमसीजी जैसे सेक्टरों में संतुलित निवेश रखने से जोखिम कम होता है. अगर किसी एक सेक्टर में गिरावट आती है, तो दूसरे सेक्टर का प्रदर्शन नुकसान की भरपाई कर सकता है.
क्वालिटी का रंग
इस होली पर निवेशकों को दूसरी खास सलाह ये है कि मजबूत और भरोसेमंद कंपनियों का चयन करें. ऐसी कंपनियां जिनका मुनाफा लगातार बढ़ रहा हो, कर्ज कम हो और जिनका बिजनेस मॉडल साफ और टिकाऊ हो, लंबे समय में बेहतर रिटर्न दे सकती हैं. केवल बाजार में चल रही खबरों या सोशल मीडिया टिप्स के आधार पर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है.
एसआईपी की पिचकारी
अगर आप नए निवेशक हैं तो सीधे इक्विटी मार्केट में उतरने की बजाय म्यूचुअल फंड के रास्ते कदम रखें, जहां एसआईपी एक शानदार विकल्प है. बाजार में हल्की गिरावट आने पर एसआईपी के जरिए निवेश करने से औसत लागत कम होती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबी अवधि में अनुशासित निवेश ही बेहतर परिणाम देता है.
ETF भी रिटर्न का एक रंग
अनिश्चित वैश्विक माहौल को देखते हुए पोर्टफोलियो में कुछ सुरक्षित विकल्प भी रखना चाहिए. बड़े और स्थिर शेयरों के साथ-साथ गोल्ड ईटीएफ या गोल्ड फंड में 5 से 10 फीसदी निवेश संतुलन बना सकता है. जब वैश्विक तनाव या तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ता है, तो सोना अक्सर सुरक्षित निवेश माना जाता है. वैसे भी सोने-चांदी ने पिछले कुछ सालों में निवेशकों को मालामाल करने का काम किया है.
एक साथ निवेश से बचें
निवेशकों को यह भी सलाह दी जाती है कि वे पूरी पूंजी एक साथ बाजार में न लगाएं. करीब 10 से 15 फीसदी राशि नकद या लिक्विड फंड में रखना समझदारी हो सकती है. इससे बाजार में अचानक गिरावट आने पर अच्छे शेयर सस्ते दाम पर खरीदने का अवसर मिलता है.
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि होली जैसे त्योहार के दिन बाजार में कम वॉल्यूम के कारण उतार-चढ़ाव ज्यादा हो सकता है. इसलिए शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए. वहीं, लंबी अवधि के निवेशकों को बाजार की रोजाना हलचल के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्यों पर ध्यान देना चाहिए.