अगर आप सोशल मीडिया (Social Media) पर एक्टिव हैं, और आपके 5 लाख सब्सक्राइबर या फॉलोअर्स हैं, तो फिर आपको 'सेलिब्रिटी' माना जाएगा. दरअसल बाजार नियामक सेबी फाइनेंशियल विज्ञापनों के नियमों में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है. सेबी ने एक नया प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत सोशल मीडिया पर 5 लाख से अधिक फॉलोअर्स वाले इन्फ्लुएंसर्स को 'सेलिब्रिटी' माना जाएगा.
सेबी के इस प्रस्ताव का सीधा मतलब यह है कि अब डिजिटल क्रिएटर्स पर भी वही सख्त नियम और पाबंदियां लागू होंगी, जो बड़े-बड़े विज्ञापनों में आने वाले स्टार्स पर होती हैं. सेबी ने इस नए कोड में 'सेलिब्रिटी' की परिभाषा को काफी बड़ा कर दिया है. सोशल मीडिया स्टार्स वो कहलाएंगे, जिनके किसी एक भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 5 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं.
कौन-कौन इसके दायरे में
इंटरनेशनल लेवल पर देश का नाम बढ़ाने वाले एथलीट और टीवी पर दिखने वाले लोकप्रिय खेल जैसे कि क्रिकेट और कबड्डी के खिलाड़ी इसमें शामिल होंगे. किसी भी टीवी शो, क्विज, कुकिंग, न्यूज, कॉमेडी या डांस-सिंगिंग कॉम्पिटिशन के होस्ट या एंकर भी इस लिस्ट में रहेंगे, जो कम से कम 10 एपिसोड किए हों. टीवी या ओटीटी पर आने वाले रियलिटी शोज के विनर और रनर-अप भी इसके दायरे में आएंगे.
बाजार नियामक ने इस ड्राफ्ट पर आम जनता और एक्सपर्ट्स से 14 जुलाई 2026 तक सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा.
कंप्यूटर से बने 'AI अवतारों' पर भी कड़ा पहरा
इस प्रस्ताव में AI-जनरेटेड वर्चुअल किरदार (AI Avatars) को भी शामिल किया गया है. अगर कंप्यूटर द्वारा बनाए गए ऐसे किसी काल्पनिक या डिजिटल अवतार के पास इंसानों जैसी विशेषताएं हैं और वह दर्शकों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है, तो वित्तीय विज्ञापनों में इस्तेमाल होने पर उसे भी मानव सेलिब्रिटी की तरह ही नियमों का पालन करना होगा.
इस नियम से क्या बदलेगा?
अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो वित्तीय कंपनियों (जैसे कि म्यूचुअल फंड या शेयर ब्रोकर) और इन इन्फ्लुएंसर्स के लिए विज्ञापन करना आसान नहीं होगा. ये सेलिब्रिटीज केवल कंपनी के ब्रांड का प्रचार कर सकेंगे. वे किसी खास स्कीम, शेयर या म्यूचुअल फंड को खरीदने की सलाह या गारंटी नहीं दे पाएंगे. बिना जांच-परख के ये विज्ञापन जनता के सामने नहीं आ सकेंगे. सेलिब्रिटी वाले विज्ञापनों को पहले सेबी से मंजूरी दिलानी होगी.
गौरतलब है कि विज्ञापनों में गारंटी प्रॉफिट का दावा करने, भ्रामक तुलना करने या ज्यादा ट्रेडिंग करने पर कैशबैक/वाउचर देने जैसे प्रलोभनों पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी है. सेबी का मानना है कि युवा पीढ़ी निवेश करने के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर बहुत भरोसा करती है, इसलिए उनके हितों की रक्षा करना जरूरी है.