देश में पेट्रोल-डीजल पर महंगाई का बम (Petrol-Diesel Inflation Bomb) फूटना जारी है. पहले 15 मई, फिर 19 मई और फिर 23 मई, सिर्फ 10 दिन में ही तीन बार Petrol-Diesel Price Hike देखने को मिल चुका है. गौर करें, तो हालात बिल्कुल साल 2022 के जैसे नजर आ रहे हैं, जब रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी थी और तेल कंपनियों ने अपने घाटे की भरपाई के लिए महज 15 दिन में ही 13 बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा किया था.
पहले ₹3, फिर 90 पैसे, अब इतना इजाफा
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव (US Vs Iran) और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से गहराया तेल संकट दुनिया के लिए मुसीबत बना हुआ है. भारत में चार साल से स्थिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में पहली बार 15 मई को 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी. इसके बाद अचानक 19 मई को ईंधन का दाम 90 पैसे प्रति लीटर और बढ़ा दिया गया. ये सिलसिला यहीं नहीं रुका और 23 मई को फिर से तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल महंगा कर ट्रिपल अटैक किया है.
देशभर में पेट्रोल और डीजल के दाम में तीसरी बार किए गए इजाफे की बात करें, तो तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे की बढ़ोतरी की, जबकि डीजल के दाम में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है. बीते सिर्फ 10 दिनों में ही देश में पेट्रोल-डीजल लगभग 5 रुपये महंगा हो चुका है.
साल 2022 की क्यों आ रही याद?
अब बताते हैं कि आखिर क्यों इस लगातार Petro-Diesel Price Hike को देखकर क्यों साल 2022 की याद ताजा हो रही है. दरअसल, Russia-Ukraine War के दौरान तेल की कीमतें हाई पर थीं और तेल कंपनियों को तगड़ा घाटा उठाना पड़ रहा था और समय लगातार 15 दिन एक के बाद एक ईंधन पर महंगाई का बम फूटा था. रोजाना थोड़ी-थोड़ी बढ़ोतरी कर तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल 10 रुपये प्रति लीटर तक महंगा कर दिया था.
समय मार्च-अप्रैल 2022 का था, जब महज 15 दिनों में 13 बार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाई गई थीं. हालांकि, इनमें से 10 दिन ठीक वैसे ही प्राइस हाइक हो रहा था, जैसे फिलहाल देखने को मिल रहा है यानी थोड़ा-थोड़ा करके फ्यूल महंगा किया गया था. उस समय 10 दिन रोजाना सिर्फ 80 पैसे प्रति लीटर के हिसाब से ही कीमतें बढ़ाई गई थीं.
देश के चार महानगरों में पेट्रोल-डीजल प्राइस
| शहर | पेट्रोल की कीमत | डीजल की कीमत |
| दिल्ली | 99.51 रुपये/लीटर | 92.49 रुपये/लीटर |
| कोलकाता | 110.64 रुपये/लीटर | 97.02 रुपये/लीटर |
| मुंबई | 108.49 रुपये/लीटर | 95.02 रुपये/लीटर |
| चेन्नई | 105.31 रुपये/लीटर | 96.98 रुपये/लीटर |
तेल कंपनियों ने पहले ही दे दिए थे संकेत
देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इस तरह से बढ़ोतरी के संकेत पहले ही तेल कंपनियों ने दे दिए थे. बीते सप्ताह सरकारी तेल कंपनी IOCL के एक सीनियर ने कहा था है कि कंपनी उपभोक्ताओं पर असर कम करने और महंगाई को काबू में रखने के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें धीरे-धीरे बढ़ा रही है, हम यह सब एक साथ नहीं करना चाहते, क्योंकि इससे महंगाई पर असर पड़ेगा.
इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि, 'फिलहाल इस बात को कहना मुश्किल है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी होगी. कंपनी के मन में ईंधन की कीमतों में कुल कितनी बढ़ोतरी करनी है, इसका अभी कोई आंकड़ा तय नहीं है. जबकि वेस्ट एशिया में युद्ध के असर की वजह से लागत तेजी से बढ़ रही है.'
एक रिपोर्ट में BPCL के एचआर डायरेक्टर राज कुमार दुबे के हवाले से कहा गया है कि मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट जारी रहा, तो पेट्रोल-डीजल के रिटेल प्राइस और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. उन्होंने कहा कि हमारे सामने कुछ ही विकल्प हैं, एक कीमतों में वृद्धि, दूसरा सरकार द्वारा नुकसान भरपाई के लिए वित्तीय सहायता के माध्यम से धन उपलब्ध कराना.
कितना महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल?
बीते सप्ताह आई एक रिपोर्ट में कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के हवाले से कहा गया था कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से बने आर्थिक संकट से निपटने के लिए भारत को ईंधन की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी करने की आवश्यकता है. Crude Oil Price लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है. रिपोर्ट में कहा गया था कि अभी तक हुई बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है, तेल कंपनियों के नुकसान की पूरी तरह भरपाई के लिए प्रति लीटर ₹13-17 की अतिरिक्त बढ़ोतरी की आवश्यकता हो सकती है.
कोटक के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल महंगा करने के बाद भी तेल कंपनियां भारी नुकसान में हैं, अनुमान है कि इन्हें हर महीने 25000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. डीजल की अंडर-रिकवरी लगभग ₹11.40 प्रति लीटर और पेट्रोल की अंडर-रिकवरी लगभग ₹14.30 प्रति लीटर होने का अनुमान है. इनहीं अनुमानों के आधार पर कीमतों में ₹13-17 प्रति लीटर की और बढ़ोतरी की आवश्यकता हो सकती है.