युद्ध लंबा खींचता जा रहा है और शेयर बाजार में गिरावट भी गहराता जा रहा है. एक महीने पहले युद्ध शुरू हुआ था, किसी को ये अनुमान नहीं था कि इतना लंबा युद्ध चलेगा. लेकिन अब समय के साथ युद्ध और भीषण रूप ले रहा है. युद्ध की वजह से मुख्यतौर कच्चे तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है. कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिली है. फिलहाल ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है.
युद्ध की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान दुनियाभर के शेयर बाजारों को हुआ है. भारतीय शेयर बाजार पर भी तगड़ी मार पड़ी है. पिछले एक महीने में यानी मार्च महीने में युद्ध की वजह से बीएसई के मार्केट कैप में 51 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है. जिससे निवेशकों में हाहाकार मच गया है. एक उदाहरण से देखें तो पिछले एक महीने में RIL जैसी तीन कंपनियों के बराबर BSE के मार्केट कैप घट चुके हैं.
सेंसेक्स 10 हजार टूटे
दरअसल युद्ध शुरू होने से अब तक सेंसेक्स 12 फीसदी से ज्यादा (करीब 10,000 अंक) टूट चुका है. जबकि निफ्टी लुढ़कर 22,500 से नीचे पहुंच गया है, जो कि चिंता का विषय है. इस गिरावट के चलते BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप फरवरी के लगभग 463 लाख करोड़ रुपये से घटकर अब 412 लाख करोड़ रुपये रह गया है. यानी सिर्फ एक महीने में करीब 51 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. ये गिरावट कब रुकेगी, किसी को कुछ पता नहीं है.
बता दें, युद्ध की वजह से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे भारत जैसे बड़े आयातक देश पर दबाव बढ़ा है. तेल महंगा होने से कंपनियों की लागत बढ़ती है और मुनाफा घटता है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता है.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़ाई परेशानी
इसके अलावा निवेशकों में पैनिक माहौल बन गया है. क्योंकि विदेशी निवेशक (FII) भारतीय बाजार से पैसे निकाल रहे हैं, जिससे बिकवाली और तेज हो गई. साथ ही रुपये में भी भारी गिरावट भी देखने को मिल रही है, सोमवार को 94.50 रुपये प्रति डॉलर का स्तर भी टूट गया.
वहीं बाजार में गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी गिरावट देखी गई. बैंकिंग, ऑटो और कंज्यूमर सेक्टर जैसे प्रमुख सेक्टर भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. इतिहास बताता है कि ऐसे वैश्विक संकटों के दौरान बाजार में गिरावट आती है, लेकिन समय के साथ रिकवरी भी होती है. इसलिए समझदारी इसी में है कि निवेशक धैर्य बनाए रखें और जल्दबाजी में गलत फैसले न लें.
युद्ध की वजह से सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है, क्योंकि युद्ध से पहले ही सोने-चांदी में बड़ी रैली देखने को मिली थी. लेकिन युद्ध से अब महंगाई बढ़ने का खतरा मडराने लगा है, जिससे कि सोने-चांदी के भाव टूटन लगे हैं.