महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने मंगलवार को कहा कि भारत उन कुछ देशों में से एक है जो जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए पेरिस प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए अपने ट्रैक पर चल रहा है. महिंद्रा ने कहा कि उन्होंने अपने समूह के सभी कर्मचारियों की ओर से संकल्प लिया है कि पेरिस समझौते में दुनिया के लिए सहमत समय सीमा से 10 साल पहले पूरी तरह से समूह और उसकी सभी 100 कंपनियां कार्बन तटस्थ होंगी.
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि भारत, पश्चिम सहित कई अन्य देशों के विपरीत, पेरिस प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए ट्रैक पर है, हम पीछे नहीं हट रहे हैं. भारत में हर कोई जलवायु परिवर्तन के बारे में चिंतित है. आखिरकार हमें जीवित रहने के बारे में सोचना होगा.
भारतीय शहरों में वायु प्रदूषण की समस्या के बारे में पूछे जाने पर महिंद्रा ने कहा कि भारत सबसे युवा देशों में से एक है और युवा यह भी समझते हैं कि यह अस्तित्व का मामला है. वे जानते हैं कि यह उनका घर है, एक होटल नहीं है और कोई भी यहां से बाहर नहीं जा पाएगा.
. speaking about how business community can become a role model by taking action against , at panel discussion on Safeguarding Our Planet with &
— Tech Mahindra (@tech_mahindra)
इस दौरान पूर्व अमेरिकी उप राष्ट्रपति अल गोर ने कहा कि अमेरिका में सबसे तेजी से बढ़ती नौकरियां सौर ऊर्जा और पवन टरबाइन से संबंधित हैं. दुनिया में हर जगह तापमान बढ़ रहा है और इस शताब्दी के 19 सालों में से 18 सबसे गर्म साल रहे हैं.
उन्होंने कहा कि हमारे ग्रह पर 85 प्रतिशत ऊर्जा जीवाश्म ईंधन जलाने से आती है, लेकिन अच्छी खबर यह है कि हम इसे बदल सकते हैं. हम जलवायु परिवर्तन की समस्या को हल कर सकते हैं और हम जानते हैं कि हम इसे कैसे हल कर सकते हैं. उन्होंने सवाल पूछा कि क्या हम बदलेंगे?
ब्रॉडकास्टर और नेचर फिल्म निर्माता सर डेविड एटनबरो ने कहा कि वह ऐसी स्थिति की अधिक गंभीर कल्पना नहीं कर सकते. चीजें बहुत तेजी से खराब हो रही हैं और हम इससे कैसे निपटना चाहते हैं, हमें पता है कि हमें इसे करने की जरूरत है.
एमपी के सीएम कमलनाथ ने आजतक के से की बातचीत कहा, बीजेपी के कुछ विधायक हमारे संपर्क में. :
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— आज तक (@aajtak)
चर्चा के दौरान न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जैकिंडा अर्डर्न ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के मौजूदा खतरे की तुलना में और कोई बड़ा खतरा नहीं है. राजनेताओं के पास सत्ता में बहुत कम समय है और चुनौती है कि अल्पावधि परिवर्तन के बुनियादी ढांचे में उस समय को अंतःस्थापित किया जाए. इसे हमें व्यक्तियों से परे रखकर सोचना होगा.