मिडिल ईस्ट तनाव का असर अब भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर पर भी साफ दिखने लगा है. युद्ध के कारण पैदा हुए संकट से निर्माण सामग्री की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे बिल्डर्स और डेवलपर्स की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं.
क्रेडाई (CREDAI) के अनुसार अमेरिका-ईरान के तनाव से भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में निर्माण लागत में 25% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है. शेयर बाज़ार में लिस्टेड कई डेवलपर्स ने भी कच्चे माल की बढ़ती लागत को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव इसी तरह जारी रहा, तो खर्च और अधिक बढ़ सकते हैं, जिससे परियोजनाओं की व्यावहारिकता और उन्हें समय पर पूरा करने पर भारी दबाव पड़ेगा.
उद्योग जगत से जुड़े जानकारों ने आगाह किया है कि चुनौती सिर्फ बढ़ती कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ बेहद ज़रूरी निर्माण सामग्रियां ऐसी हैं, जो अब पैसा फेंकने पर भी नहीं मिल पा रही हैं. ऐसा संकट इस सेक्टर ने शायद ही पहले कभी देखा हो. सप्लाई चेन में आई इस रुकावट के चलते अब प्रोजेक्ट्स के समय पर पूरा होने पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.
यही वजह है कि डेवलपर्स अब नए सप्लायर्स की तलाश कर रहे हैं, देश के भीतर से ही माल जुटाने पर ज़ोर दे रहे हैं और कंस्ट्रक्शन के टाइम-टेबल में बदलाव कर रहे हैं ताकि काम बिना किसी बड़ी बाधा के रफ्तार पकड़ता रहे. बड़े रियल एस्टेट दिग्गजों ने भी माना है कि कच्चे माल और लेबर की बढ़ती कीमतों के कारण पूरे सेक्टर में निर्माण लागत का दबाव बहुत ज़्यादा बढ़ गया है.
निर्माण लागत क्यों बढ़ रही है?
ईरान और अमेरिका युद्ध की वजह से भारतीय रियल एस्टेट की मुश्किलें इसलिए बढ़ी हैं क्योंकि मिडिल ईस्ट में मचे इस घमासान ने कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा दी है और वैश्विक समुद्री व्यापार के रास्तों को तहस-नहस कर दिया है. ईंधन महंगा होने से सीधे तौर पर माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स का खर्च बढ़ गया है. इसके साथ ही, कंस्ट्रक्शन की रीढ़ माने जाने वाले स्टील और सीमेंट जैसे बुनियादी सामान भी महंगे हो गए हैं, जिससे आने वाले दिनों में नए घरों और संपत्तियों की कीमतें बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है.
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