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PG या को-लिविंग, नए शहर में शिफ्ट होने वाले बैचलर्स के लिए क्या बेस्ट

दूसरे शहर में शिफ्ट होना जितना रोमांचक है, रहने की सही जगह ढूंढना उतना ही बड़ा सिरदर्द. बैचलर्स अक्सर इस उलझन में रहते हैं कि कम बजट वाला पीजी सही रहेगा या हाई-टेक सुविधाओं वाला को-लिविंग? अपनी जरूरत और लाइफस्टाइल के हिसाब से सही फैसला लेने के लिए पढ़ें यह खबर

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पीजी या को-लिविंग, क्या है आपकी पसंद (Photo: Pixabay)
पीजी या को-लिविंग, क्या है आपकी पसंद (Photo: Pixabay)

नया शहर, नई नौकरी और आंखों में बड़े सपने... सुनने में यह सब जितना रोमांचक लगता है, घर से दूर अपना एक आशियाना ढूंढना उतना ही चुनौतीपूर्ण होता है. जब कोई बैचलर (पुरुष या महिला) पहली बार किसी दूसरे शहर में कदम रखता है, तो उसके सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर रहा कहां जाए? क्या पुराने ढर्रे पर चलने वाले पीजी (PG) में कमरा लिया जाए या फिर आज के दौर के आधुनिक को-लिविंग (Co-living) स्पेस का रुख किया जाए. आपकी लाइफस्टाइल और जेब पर क्या सूट करेगा, यह जानना आपके आने वाले सफर के लिए बेहद जरूरी है.

आधुनिक लाइफस्टाइल के शौकीनों की पहली पसंद है को-लिविंग

अगर आप घर से दूर रहकर भी एक प्रीमियम लाइफस्टाइल और शानदार अनुभव की तलाश में हैं, तो को-लिविंग आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. यहां आपको हाई-स्पीड वाई-फाई, हाउसकीपिंग और लॉन्ड्री जैसी तमाम वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलती हैं, इसलिए आपको घर के छोटे-मोटे कामों या बिजली-पानी के बिल भरने की चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ती.

इतना ही नहीं, इस जगह रहने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां पारंपरिक पीजी के मुकाबले पाबंदियां बहुत कम होती हैं, जिससे आप अपनी मर्जी और वर्किंग आवर्स के हिसाब से जीवन जी सकते हैं.

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इसके अलावा को-लिविंग स्पेस को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वहां रहने वाले लोग आपस में घुल-मिल सकें. यहां अक्सर कम्युनिटी इवेंट्स, गेमिंग नाइट्स और वर्कशॉप्स होते हैं, जो नए शहर में अकेलेपन को दूर करने और प्रोफेशनल नेटवर्किंग बढ़ाने में काफी मददगार साबित होते हैं. हालांकि, इन हाई-फाई सुविधाओं के कारण इसका किराया थोड़ा महंगा हो सकता है, पर फिर भी इसे मिलने वाली आजादी और लग्जरी के हिसाब से आज के न्यू-एज बैचलर्स के लिए वैल्यू फॉर मनी माना जाता है.

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बजट और सादगी को प्राथमिकता देने वालों के लिए है पीजी

दूसरी ओर, अगर आप अभी अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं और आपका पूरा फोकस फिलहाल अपनी मेहनत की कमाई को बचाने पर है, तो पारंपरिक पीजी आज भी सबसे भरोसेमंद विकल्प बना हुआ है. यहां रहने की लागत को-लिविंग के मुकाबले काफी कम होती है, जिससे नए शहर में आपके शुरुआती महीनों का वित्तीय बोझ थोड़ा कम हो जाता है. यही नहीं, पीजी में रहने का एक सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि यहां आपको समय पर घर जैसा सादा और शुद्ध खाना मिल जाता है, इसलिए आपको रोजाना बाहर के अनहेल्दी खाने या किसी कुक को ढूंढने के झंझट में नहीं पड़ना पड़ता.

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साथ ही यहां बिजली, पानी और खाने का खर्च अक्सर किराए में ही शामिल होता है, जिससे महीने के अंत में किसी छुपे हुए खर्च का डर नहीं रहता. हालांकि, पीजी में रात को आने-जाने के समय और बाहरी मेहमानों के आने पर कुछ सख्त नियम और पाबंदियां हो सकती हैं, जो कभी-कभी आपको असहज कर सकती हैं. लेकिन अगर आप अनुशासन और कम खर्चे के बीच संतुलन बनाकर चलना चाहते हैं, तो पीजी आपके लिए एक सुरक्षित और किफायती ठिकाना साबित होगा.
 

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