दिल्ली से सटे सैटेलाइट शहरों नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद एक दौर में उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प थे जो दिल्ली में घर नहीं बना सकते थे. खासतौर पर मिडिल क्लास लोग जिनके लिए दिल्ली में घर खरीदना बजट के बाहर था. लेकिन किफायती विकल्प वाले एनसीआर के ये शहर अब धीरे-धीरे मिडिल क्लास लोगों के बजट से बाहर होते जा रहे हैं.
बदलते वक्त के साथ ऐसे हालात हो गए हैं कि इन शहरों में घर खरीदना अब जरूरत नहीं, बल्कि 'लग्जरी' बन गया है. अगर आपकी जेब में ₹50 लाख हैं, तो इन शहरों के मुख्य इलाकों में आपके लिए घर खरीदना बस सपना बनकर रह गया है. NCR में लग्जरी की शुरुआत गुरुग्राम से हुई. गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड और द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे इलाकों ने कीमतों के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. Anarock की रिपोर्ट बताती है कि गुरुग्राम में औसत रेट अब ₹15,000 से ₹20,000 प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गए हैं. यहां मिडिल क्लास का 2BHK का सपना अब ₹2 करोड़ के नीचे पूरा होना नामुमकिन सा हो गया है. गुरुग्राम अब 'मिडिल क्लास' की पहुंच से पूरी तरह बाहर होकर 'सुपर रिच' और NRI निवेश का हब बन चुका है.
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फरीदाबाद भी नहीं रहा अफोर्डेबल
फरीदाबाद को लंबे समय तक दिल्ली-एनसीआर का सबसे किफायती हिस्सा माना जाता था, लेकिन दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और बेहतर होती कनेक्टिविटी ने यहां भी आग लगा दी है. फरीदाबाद के 'ग्रेटर फरीदाबाद' (सेक्टर 75-89) वाले इलाकों में जो घर कभी ₹40-50 लाख में मिलते थे, उनकी कीमतें अब ₹1 करोड़ को छू रही हैं. जेवर एयरपोर्ट से बढ़ती नजदीकी ने यहां की जमीनों को भी मिडिल क्लास की पहुंच से दूर कर दिया है.
नोएडा: जेवर एयरपोर्ट और 'लग्जरी' का बढ़ता क्रेज
नोएडा, जो अपनी बेहतरीन प्लानिंग के लिए जाना जाता था, अब गुरुग्राम की राह पर है. नोएडा में लॉन्च होने वाले 60% से अधिक नए प्रोजेक्ट्स 'हाई-एंड' या 'लग्जरी' श्रेणी के हैं. 2021 तक नोएडा के सेक्टर 150 या 143 में जो फ्लैट ₹70-80 लाख में मिलते थे, आज उनकी कीमत ₹2 करोड़ के पार है.
डेवलपर्स अब 2BHK के बजाय 3BHK और 4BHK प्रोजेक्ट्स पर दांव लगा रहे हैं. सीमेंट, स्टील और जमीन की बढ़ती कीमतों का हवाला देकर बिल्डर्स का कहना है कि ₹50 लाख के बजट में घर बनाना अब व्यावहारिक नहीं रहा. इसका सीधा असर औसत वेतन पाने वाले उस तबके पर पड़ा है, जिसके लिए ₹50 लाख अब केवल एक 'डाउन पेमेंट' की रकम बनकर रह गई है.
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मिडिल क्लास के पास क्या विकल्प हैं?
वर्तमान परिदृश्य में ₹50-60 लाख के बजट वाले खरीदारों के लिए ग्रेटर नोएडा वेस्ट जैसे कुछ विकल्प हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाएं और जाम एक बड़ी चुनौती है. यमुना एक्सप्रेसवे के पास निवेश तो किया जा सकता है, लेकिन रहने लायक माहौल बनने में अभी कम से कम 5-7 साल का समय लगेगा. घर खरीदने की असमर्थता के कारण एक बड़ा वर्ग अब 'रेंट' पर रहकर ही लग्जरी लाइफस्टाइल का अनुभव करने को मजबूर है.
गुरुग्राम, फरीदाबाद और अब नोएडा तीनों शहरों ने मिडिल क्लास के लिए अपने दरवाजे लगभग बंद कर लिए हैं. जेवर एयरपोर्ट और ग्लोबल सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स ने निवेश को तो बढ़ावा दिया है, लेकिन वास्तविक खरीदार को शहर की मुख्यधारा से दूर धकेल दिया है.