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छोटे शहरों में दोगुने हो सकते हैं जमीन के दाम, निवेश के लिए 'सोना' बनेंगे ये इलाके

टियर-2 और टियर-3 शहरों में रियल एस्टेट की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है. बेहतर कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास के चलते इन उभरते बाजारों में अगले 4 साल में जमीन की कीमतें 100% तक बढ़ने का अनुमान है.

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2028 तक छोटे शहरों में जमीन के दाम दोगुने हो सकते हैं (Photo-ITG)
2028 तक छोटे शहरों में जमीन के दाम दोगुने हो सकते हैं (Photo-ITG)

बजट 2026 में सरकार ने छोटे शहरों की कायापलट करने के लिए जो बड़ा दांव लगाया है, उसका सीधा असर अब जमीन की कीमतों पर दिखने वाला है. 'स्क्वायर यार्ड्स' की ताजा रिपोर्ट कहती है कि अगले 2 से 4 सालों में इन छोटे शहरों के कुछ खास इलाकों में जमीन के दाम 25% से लेकर 100% यानी सीधे दोगुने तक बढ़ सकते हैं.

इसकी बड़ी वजह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित 'सिटी इकोनॉमिक रीजन्स' (CERs) योजना है, जिसमें हर क्षेत्र के विकास के लिए 5,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.जहां भी मेट्रो, एक्सप्रेसवे या एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स आ रहे हैं, वहां की जमीन अब 'सोना' उगलने वाली है.

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रिपोर्ट बताती है कि अगर आपके घर के 1 किलोमीटर के दायरे में मेट्रो आ रही है, तो उसकी कीमत अभी से 25% तक बढ़ जाएगी और काम पूरा होते-होते यह उछाल 40% तक जा सकता है. वहीं, नए एयरपोर्ट या हाईवे के पास वाली जमीनों के दाम तो घोषणा से लेकर प्रोजेक्ट पूरा होने तक 70% तक चढ़ जाते हैं. साफ है कि अब रियल एस्टेट में कमाई का असली मौका बड़े महानगरों के बजाय इन उभरते हुए छोटे शहरों में है. 

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इस रिपोर्ट के अनुसार, तेजी से विकसित हो रहे शहरों के बाहरी इलाकों (peripheral micro-markets) में, खासकर प्लॉट और खाली जमीनों की कीमतों में अगले कुछ सालों में 80 से 100% तक की भारी बढ़ोतरी हो सकती है. इसकी बड़ी वजह यह है कि जैसे-जैसे इन इलाकों में कनेक्टिविटी सुधरेगी, वैसे-वैसे वहां विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी. इसके अलावा, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और लॉजिस्टिक्स हब के पास वाली जमीनों के दाम भी 20 से 60% तक बढ़ सकते हैं, क्योंकि वहां रोजगार के नए केंद्र बन रहे हैं.

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रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बने-बनाए घरों के मुकाबले खाली जमीन या लैंड मार्केट में कीमतों का उछाल बहुत ज्यादा तेज होता है. खासकर उन जगहों पर जहां पास में ही कोई एम्प्लॉयमेंट हब , लॉजिस्टिक्स नेटवर्क या इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बन रहा हो, वहां जमीन की मांग और कीमत दोनों बहुत तेजी से बढ़ती हैं. 

क्या कहतें हैं एक्सपर्ट?

हीरो रियल्टी के सीईओ रोहित किशोर कहते हैं- 'घर खरीदारों की बढ़ती दिलचस्पी के चलते अब डेवलपर्स के लिए छोटे शहर (Tier-2 और Tier-3) हॉटस्पॉट बनते जा रहे हैं. सड़कों का जाल और बढ़ता मेट्रो नेटवर्क इन इलाकों की चमक बढ़ा रहा है. खासकर सोनीपत जैसे इलाकों में लोग अब बने-बनाए फ्लैट के बजाय खाली प्लॉट खरीदने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं, ताकि वे अपनी पसंद से बड़ा घर बना सकें. दिल्ली-एनसीआर से नजदीकी और नए प्रोजेक्ट्स के आने से सोनीपत अब प्रॉपर्टी निवेश और खुद के घर के लिए एक बड़ा हब बनकर उभर रहा है.' 

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रॉयल ग्रीन रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर यशांक वासन के कहते हैं-'एक्सप्रेसवे,मेट्रो विस्तार और बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के चलते टियर-2 शहरों ने अब दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े रियल एस्टेट मार्केट्स के बीच अपनी मजबूत पहचान बना ली है. कनेक्टिविटी के मोर्चे पर समयपुर-बदली से नाथूपुर तक मेट्रो के विस्तार और 2026 तक शुरू होने वाले दिल्ली-सोनीपत-पानीपत आरआरटीएस (RRTS) जैसे प्रोजेक्ट्स ने न केवल सफर आसान किया है, बल्कि रेजिडेंशियल डिमांड को भी तेज कर दिया है. इसके साथ ही, मारुति सुजुकी जैसे बड़े प्लांट्स के संचालन और दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) के दूसरे चरण में इन शहरों की रणनीतिक स्थिति ने रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं, जिससे ये इलाके अब विकास की एक बड़ी छलांग लगाने को तैयार हैं.'

जिंदल रियल्टी के सीईओ और प्रेसिडेंट, अभय कुमार मिश्रा कहते हैं, बेहतर कनेक्टिविटी और जेवर एयरपोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स के दम पर दिल्ली-एनसीआर के टियर-2 शहर और एक्सप्रेसवे वाले इलाके अब रियल एस्टेट के नए पावर-सेंटर बन गए हैं. स्थिर ब्याज दरों और सख्त रेरा नियमों ने खरीदारों का भरोसा बढ़ाया है, जिससे अब लोग निवेश के साथ-साथ लग्जरी लाइफस्टाइल वाली प्रॉपर्टीज़ पर बड़ा दांव लगा रहे हैं.

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