खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते हमलों और तनाव के कारण दुबई का तेजी से बढ़ता प्रॉपर्टी बाजार अब एक बड़े तनाव के दौर से गुजर रहा है. इन हालातों ने न केवल निवेशकों के भरोसे को कम करना शुरू कर दिया है, बल्कि सुरक्षित निवेश के केंद्र के रूप में दुबई की छवि को भी चुनौती दी है.
ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे पर हुए सिलसिलेवार हमलों ने भू-राजनीतिक जोखिमों को बढ़ा दिया है. इससे क्षेत्रीय बाजारों में अस्थिरता पैदा हुई है और उन वैश्विक निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है, जो दुबई के रियल एस्टेट में आई हालिया तेजी के मुख्य चालक रहे हैं.
पिछले कई सालों से दुबई दुनिया भर के अमीरों और बड़े निवेशकों के लिए निवेश की सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद जगह बना हुआ था. अपनी इसी खूबी की वजह से इसने दुनिया भर के धनकुबेरों और बड़ी कंपनियों को अपनी ओर खींचा. लेकिन खाड़ी क्षेत्र में हाल ही में हुए हमलों और बढ़ते तनाव ने अब इन निवेशकों को चिंता में डाल दिया है, और वे अब यहां पैसा लगाने को लेकर दोबारा सोचने पर मजबूर हो गए हैं.

सबसे सुरक्षित शहर माना जाता है दुबई
पैसों के फायदे के अलावा, दुबई को इस पूरे इलाके का सबसे सुरक्षित शहर माना जाता रहा है. इसी वजह से दुनिया भर के हुनरमंद लोग और बड़े कारोबारी यहाँ खिंचे चले आते हैं, लेकिन अब दुबई की इस 'सेफ' इमेज पर खतरा मंडराने लगा है. उड़ानों में आती रुकावटों और सुरक्षा के डर ने यहां रहने वाले लोगों और निवेशकों को सोच में डाल दिया है कि क्या यहां पैसा लगाना और रहना अब भी सुरक्षित है."
ब्लूमबर्ग (Bloomberg) ने हाल ही में रिपोर्ट दी है कि बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण दुबई की 'सुरक्षित निवेश' (Safe-haven) वाली साख अब दबाव में है, क्योंकि ये जोखिम अब निवेशकों के व्यवहार को प्रभावित करने लगे हैं. वेल्थ मैनेजर्स (Wealth managers) का कहना है कि अभी घबराहट में बाजार छोड़ने जैसी स्थिति तो नहीं है, लेकिन निवेश के फैसले लेने की रफ्तार धीमी हो गई है.
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तनाव के शुरुआती संकेत
निवेशकों के बदलते मिजाज का असर अब वित्तीय बाजारों में दिखने लगा है. रॉयटर्स (Reuters) के अनुसार, संघर्ष बढ़ने के बाद से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शेयरों में भारी गिरावट आई है. निवेशकों के बीच जोखिम लेने की क्षमता कम होने के कारण एमार प्रॉपर्टीज (Emaar Properties) जैसे रियल एस्टेट से जुड़े शेयरों पर दबाव बढ़ गया है.
Debt market जो डेवलपर्स के लिए फंड जुटाने का मुख्य जरिया है, वहां भी अब सावधानी बरती जा रही है. रॉयटर्स की रिपोर्ट है कि बढ़ते जोखिम के कारण नए बॉन्ड जारी करने की रफ्तार धीमी हो गई है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि प्रॉपर्टी की कीमतें गिर गई हैं, लेकिन यह निवेशकों के बदलते मूड का साफ संकेत है.

विदेशी निवेश पर निर्भरता
दुबई का प्रॉपर्टी बाजार पिछले कुछ सालों में विदेशी निवेश, टैक्स में छूट और महामारी के बाद बढ़े प्रवास के कारण तेजी से ऊपर चढ़ा है. रॉयटर्स का अनुमान है कि 2022 से 2025 की शुरुआत के बीच प्रॉपर्टी की कीमतों में लगभग 60 प्रतिशत का उछाल आया है, जिससे यह दुनिया के सबसे डिमांड वाले रियल एस्टेट बाजारों में से एक बन गया है.
हालांकि, इस जबरदस्त तेजी ने बाजार को बाहरी झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील भी बना दिया है. बाजार के जानकारों ने रॉयटर्स को बताया, "रियल एस्टेट निवेश पूरी तरह से स्थिरता और निवेशकों के भरोसे पर टिका होता है." उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह भू-राजनीतिक अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रही, तो यह भरोसा और निवेश दोनों को कमजोर कर सकती है.
लग्जरी विला सौदों पर दबाव
तनाव के अलावा, कुछ बुनियादी कारण भी दबाव बढ़ा रहे हैं. हाल के दिनों में हुए सौदों का एक बड़ा हिस्सा 'ऑफ-प्लान' (निर्माणाधीन) सेगमेंट में रहा है, जो बाजार में सट्टेबाजी वाली मांग की ओर इशारा करता है. साथ ही, अगले कुछ वर्षों में बाजार में नई प्रॉपर्टीज की बड़ी खेप आने वाली है. ऐसे में चिंता यह है कि अगर विदेशी निवेश धीमा हुआ, तो इतनी बड़ी सप्लाई की खपत कैसे होगी.
विदेशी निवेश पर भारी निर्भरता और बाजार में घरों की बढ़ती सप्लाई ने दुबई के रियल एस्टेट मार्केट को निवेशकों के बदलते मूड के प्रति बहुत संवेदनशील बना दिया है. बाजार के ऊपरी स्तर यानी 'लग्जरी सेगमेंट' में अब कीमतों पर दबाव के शुरुआती संकेत दिखने लगे हैं. कुछ लग्जरी विला (Luxury Villa) के सौदों पर फिर से मोलभाव किया जा रहा है, जहां अनिश्चितता के माहौल को देखते हुए खरीदार डिस्काउंट मांग रहे हैं और विक्रेता भी अब कीमतों में लचीलापन दिखा रहे हैं.
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हालांकि, अभी तक बाजार में किसी बड़ी गिरावट या 'करेक्शन' के सबूत नहीं मिले हैं. डेवलपर्स का कहना है कि काम सामान्य रूप से चल रहा है और प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे हो रहे हैं. कुछ उद्योग विशेषज्ञों ने रॉयटर्स (Reuters) को बताया कि भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद बाजार में 'मजबूती' बनी हुई है, क्योंकि असल मांग अभी भी मौजूद है.
लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तनाव का असली असर दिखने में समय लग सकता है. एक विशेषज्ञ ने रॉयटर्स से कहा, "इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि यह संघर्ष कब तक खिंचता है. अगर तनाव और बढ़ा, तो मौजूदा स्थिरता को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है."
अब सब कुछ इस बात पर टिका है कि आने वाले समय में हालात कैसे करवट लेते हैं. अगर तनाव कम होता है, तो मजबूत बुनियादी ढांचे और विदेशी निवेश के दम पर बाजार जल्द ही संभल सकता है. लेकिन अगर अनिश्चितता लंबी खिंचती है और साथ ही कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो प्रॉपर्टी की मांग और कीमतों पर दबाव बढ़ना तय है. फिलहाल बाजार टूटा नहीं है, लेकिन जोखिम बढ़ता जा रहा है.
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