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मिडिल ईस्ट संकट के बीच क्या दुबई के रियल एस्टेट में निवेश अब जोखिम भरा है

दुबई के लिए 2025 का साल ऐतिहासिक रहा, यहां करीब 187 मिलियन डॉलर की रिकॉर्ड तोड़ प्रॉपर्टी की सेल हुई. इसके साथ ही दुनिया भर से हजारों करोड़पति यहां शिफ्ट भी हुए. लेकिन मिडिल ईस्ट के तनाव ने दुबई के रियल एस्टेट मार्केट को भी हिलाकर रख दिया है.

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तनाव के चलते दुबई के रियल एस्टेट में पैसा लगाने से डर रहे हैं लोग (Photo-Pexels)
तनाव के चलते दुबई के रियल एस्टेट में पैसा लगाने से डर रहे हैं लोग (Photo-Pexels)

पिछले कुछ सालों से वैश्विक स्तर पर निवेश का स्वर्ग माने जाने वाले दुबई के रियल एस्टेट मार्केट पर अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं. क्षेत्रीय अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों के भरोसे को डगमगा दिया है, जिससे बाजार एक बड़े 'स्ट्रेस टेस्ट' के दौर से गुजर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना महामारी के बाद यह पहला मौका है जब दुबई के प्रॉपर्टी बाजार में इस स्तर की सावधानी और सुस्ती देखी जा रही है

रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि 'लग्जरी' और 'अल्ट्रा-लग्जरी' प्रॉपर्टी सेगमेंट में सबसे पहले सुस्ती देखी जा सकती है. वे अमीर निवेशक (HNIs) जो टैक्स लाभ या लाइफस्टाइल के लिए यूएई आए थे, वे अब अपनी स्थिति पर दोबारा विचार कर सकते हैं. विला की तुलना में अपार्टमेंट की कीमतों में ज्यादा गिरावट आएगी. इसका मुख्य कारण बाजार में अपार्टमेंट्स की भारी सप्लाई का होना है.

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नए प्रोजेक्ट्स की प्री-सेल में कमी आ सकती है, प्रॉपर्टी की सप्लाई बढ़ेगी, क्योंकि निवेशक अपनी संपत्ति बेचकर निकलना चाहेंगे. विशेष रूप से वे विदेशी निवेशक, जिनके प्रोजेक्ट्स पूरे होने वाले हैं, वे अपनी यूनिट्स बेचने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे बाजार की कीमतों पर दबाव और बढ़ेगा. दुबई के निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स की बनावट काफी जटिल है. डेवलपर्स अक्सर आक्रामक पेमेंट प्लान पर घर बेचते हैं, लेकिन भविष्य की नकदी की वसूली पूरी तरह से खरीदारों की वित्तीय क्षमता और उनके भरोसे पर टिकी है, जो मौजूदा संकट में जोखिम भरा हो सकता है.

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दुबई को दुनिया के सबसे सुरक्षित देशों में से एक माना जाता रहा है, और इसी 'सेफ हेवन' की छवि के दम पर वहां का रियल एस्टेट फल-फूला है. युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के समय भी वहां के प्रशासन ने इस धारणा  को बनाए रखने की पूरी कोशिश की है ताकि निवेशकों में डर पैदा न हो. हालांकि, हकीकत यह है कि मौजूदा भू-राजनीतिक संकट ने इस सुरक्षा कवच को चुनौती दी है, जिससे अब निवेशकों के बीच वह पहले जैसा अटूट भरोसा कम होता दिख रहा है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

आज तक रेडियो के शो प्रॉपर्टी से फायदा में रियल एक्सपर्ट सौरव शर्मा कहते हैं- 'दुबई की असली चुनौती वहां आने वाली घरों की भारी सप्लाई है. वर्तमान में वहां जितने घर बने हुए हैं, उसका 50% हिस्सा (लगभग 4-5 लाख यूनिट्स) अगले 5-6 वर्षों में बनकर तैयार होने वाला है. इतनी बड़ी सप्लाई को खपाने के लिए जिस स्तर की डिमांड चाहिए, वह फिलहाल नजर नहीं आ रही है. अगर हर साल 2 लाख नए लोग दुबई शिफ्ट भी होते हैं, तो भी उपलब्ध घरों की तुलना में खरीदारों की संख्या काफी कम रहने वाली है, जिससे मार्केट क्रैश होने का गंभीर जोखिम बना हुआ है.'

दुबई जाने वाले लोगों में एक बड़ा हिस्सा (लगभग 70-75%) उन श्रमिकों और प्रोफेशनल्स का है, जो वहां लग्जरी अपार्टमेंट खरीदने की क्षमता नहीं रखते, हालांकि युद्ध प्रभावित देशों (रूस, यूक्रेन आदि) के अमीर लोग और ग्लोबल एचएनआई (HNIs) वहां शिफ्ट हो रहे हैं, लेकिन उनकी संख्या कुल आबादी का मात्र 25-30% ही है. ये मुट्ठी भर रईस निवेशक उस विशाल सप्लाई को कवर नहीं कर पाएंगे जो आने वाले समय में बाजार में आने वाली है. जब सप्लाई डिमांड से कहीं ज्यादा हो जाएगी, तो कीमतों में बड़ा सुधार होना तय है.

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