मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध के हालातों ने दुबई के रियल एस्टेट बाजार को सुस्त कर दिया है. वहीं अब अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा है. जहां एक तरफ दुबई में प्रॉपर्टी की बिक्री में भारी गिरावट आई है, वहीं दूसरी तरफ निवेशक अब केवल ज्यादा मुनाफे के बजाय 'सुरक्षा और स्थिरता' की तलाश में भारत को एक भरोसेमंद विकल्प मान रहे हैं. इसी वजह से गुरुग्राम जैसे शहरों में प्लॉट और प्रीमियम घरों की मांग में अचानक बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि जहां विकसित अर्थव्यवस्थाएं उतार-चढ़ाव से जूझ रही हैं, वहीं भारत अपनी स्पष्ट नीतियों, नियंत्रित जोखिम और अनुमानित विकास दर के कारण निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है.
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रियल एस्टेट क्षेत्र के दिग्गजों का मानना है कि यह बदलाव केवल पूंजी का हस्तांतरण नहीं है, बल्कि निवेशकों के व्यवहार में आया बड़ा परिवर्तन है. आज खरीदार खासतौर पर गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित होते क्षेत्रों में ठोस और भविष्य के लिए तैयार संपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं. प्लॉटेड लैंड, कम ऊंचाई वाली इमारतों और मिड-टू-प्रीमियम हाउसिंग की बढ़ती मांग यह दर्शाती है कि लोग अब ऐसी संपत्तियों में निवेश करना चाहते हैं जो उन्हें सुरक्षा और वास्तविक घरेलू मांग का भरोसा दिला सकें.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
रूट्स डेवलपर्स के डायरेक्टर, जितेंद्र यादव कहते हैं- ' जब दुनिया भर के हालात अनिश्चित होते हैं तब निवेशक सिर्फ अपना फायदा नहीं देखते बल्कि ऐसे बाजार की तलाश करते हैं जहां स्थिरता हो. भारत लोगों के लिए ऐसा बाजार बनकर उभरा है जिस पर वो भरोसा कर सकते हैं.'
वो आगे कहते हैं- 'निवेश का ट्रेंड अब बदल चुका है अब बात सिर्फ रिटर्न की नहीं, बल्कि भरोसे की है. गुरुग्राम जैसे इलाकों में प्लॉट और मिड-टू-प्रीमियम घरों के लिए बढ़ती डिमांड इस बात का सबूत है कि खरीदार अब ऐसी प्रॉपर्टी चाहते हैं जो 'फ्यूचर-रेडी' और सुरक्षित हो. भारत का मजबूत इकोसिस्टम और स्थिर नीतियां निवेशकों को वो आत्मविश्वास दे रही हैं, जिसकी तलाश वे वैश्विक स्तर पर कर रहे हैं. डेवलपर्स के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वे ऐसे प्रोजेक्ट्स लाएं जो वैश्विक निवेश और भारतीय परिवारों की बदलती जरूरतों के हिसाब से हो'.

जेएमएस ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर, पुष्पेंद्र सिंह का कहना है- “मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर प्रॉपर्टी मार्केट पर दिख रहा है. लोगों में मन में सवाल है कि उनका पैसा कहां सुरक्षित है और क्या भविष्य में उसका दाम बढ़ेगा. ऐसे वक्त में निवेशकों की नजर भारत की ओर है. आज बाजार में जो मांग दिख रही है, वह दिखावटी नहीं बल्कि पूरी तरह असली है. यह उन लोगों की वजह से है जिन्हें सच में रहने के लिए घर चाहिए और जो उन शहरों में निवेश कर रहे हैं, जहां विकास प्लानिंग के साथ हो रहा है. गुरुग्राम इसका सबसे अच्छा उदाहरण है. अब खरीदार बहुत सोच-समझकर फैसला ले रहे हैं. वे उन्हीं प्रोजेक्ट्स को चुन रहे हैं जिन्हें वे आसानी से समझ सकें और जिन पर उन्हें पूरा भरोसा हो. '
लोग अब बड़े टावरों के बजाय कम ऊंचाई वाली इमारतों और मिड-सेगमेंट के घरों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं, क्योंकि यहां उन्हें अपनी प्रॉपर्टी पर बेहतर कंट्रोल महसूस होता है. यह कोई अस्थायी ट्रेंड नहीं है, बल्कि लोग अब ऐसी ठोस चीज में पैसा लगाना चाहते हैं जो लंबे समय तक उनका साथ दे और सुरक्षित रहे.
दुबई के प्रॉपर्टी मार्केट में आई गिरावट
दुबई भूमि विभाग (DLD) के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के अंत से दुबई की प्रॉपर्टी बिक्री में पिछले साल की तुलना में 40 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है. यह डेटा अमीरात के घर, विला, ऑफिस और कमर्शियल मार्केट्स में छाई सुस्ती को उजागर करता है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद, ईरान ने अमेरिकी संपत्तियों और सहयोगियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की, जिससे पश्चिम एशिया में संघर्ष और गहरा गया है.
28 फरवरी से 22 मार्च के बीच, DLD द्वारा केवल 8,059 प्रॉपर्टी बिक्री पंजीकृत की गईं. विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध और इसके बढ़ते प्रभाव ने निवेशकों को डरा दिया है. कुछ हवाई अड्डों पर हमलों के बाद क्षेत्र में उड़ानों की अनिश्चितता का भी इस पर गहरा असर पड़ा है.
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