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चीन में कौड़ियों के भाव बिक रहे घर, 20 साल पहले का भाव, भारत में क्यों डर

चीन में रियल एस्टेट मार्केट के धराशायी होने से घरों की कीमतें 20 साल पुराने स्तर पर गिर गई हैं, जिससे दुनिया भर के निवेशकों में खलबली मच गई है. दिग्गज कंपनियों के डूबने और भारी ओवर-सप्लाई के कारण आए इस संकट ने भारतीय निवेशकों के मन में भी डर पैदा कर दिया है.

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चीन के रियल एस्टेट मार्केट में क्यों मचा हाहाकार (Photo-Reuters)
चीन के रियल एस्टेट मार्केट में क्यों मचा हाहाकार (Photo-Reuters)

चीन के प्रॉपर्टी बाजार में आई गिरावट ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चीन में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमतें इतनी गिर चुकी हैं कि वे अब 20 साल पुराने स्तर पर पहुंच गई हैं.यानी जो भाव साल 2005 में था, आज कीमतें फिर वहीं लौट आई हैं. यह गिरावट किसी युद्ध या प्राकृतिक आपदा की वजह से नहीं, बल्कि बाजार के आंतरिक असंतुलन के कारण हुई है.

बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS), जिसे दुनिया के केंद्रीय बैंकों का बैंक कहा जाता है, की रिपोर्ट ने इस संकट की गंभीरता को उजागर किया है. BIS के प्रॉपर्टी इंडेक्स के अनुसार, साल 2021 में चीन का रियल एस्टेट बाजार अपने चरम पर था, जो अब गिरकर 86.79 पर आ गया है. साल 2005 में यह इंडेक्स 87.95 पर था. यानी पिछले तीन-चार वर्षों में ही बाजार 40% से ज्यादा टूट चुका है, जिससे निवेशकों की जीवन भर की कमाई दांव पर लग गई है.

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बिना बिके घरों का अंबार और दिग्गज कंपनियों का पतन

इस संकट की सबसे बड़ी वजह 'ओवर सप्लाई' है बताई जा रही है. वर्तमान में चीन में 39 करोड़ स्क्वायर मीटर से ज्यादा बिना बिके घरों की इन्वेंटरी है, जो दुनिया में सबसे अधिक है. इसके साथ ही, चीन की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां ताश के पत्तों की तरह ढह रही हैं. एवरग्रैंड (Evergrande) 300 अरब डॉलर के कर्ज के साथ डूब चुकी है, जबकि कंट्री गार्डन और वके जैसी दिग्गज कंपनियां भी भारी घाटे और डिफॉल्ट के संकट से जूझ रही हैं. 

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चीनी सरकार के राहत पैकेज हुए नाकाम

हांलाकि चीन की सरकार ने  हालात को सुधारने की कोशिश भी नाकाम रही, सरकार ने ब्याज दरों में कटौती की, घर खरीदने वालों को सब्सिडी दी और यहां तक कि बिना बिकी प्रॉपर्टी खरीदने के लिए 300 अरब युवान का भारी-भरकम फंड भी बनाया, लेकिन बाजार में लोगों में ऐसा भय  है कि लोग प्रॉपर्टी में निवेश से डर रहे हैं. यहां तक की चीन के बैंक अब इस सेक्टर को और कर्ज देने से कतरा रहे हैं, जिससे यह संकट अब चीन की कुल जीडीपी के लिए खतरा बन गया है.

भारत में क्या असर

चीन के हालात को देखकर भारत में भी लोगों में डर हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत में चीन जैसे संकट की संभावना न के बराबर है, क्योंकि दोनों देशों के रियल एस्टेट बाजारों की संरचना और नियम पूरी तरह भिन्न हैं, नाइट फ्रैंक इंडिया (Knight Frank India) और RBI के हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत में रियल एस्टेट संकट की संभावना इसलिए नहीं है क्योंकि यहां का बाजार 'एंड-यूज़र' द्वारा संचालित है, न कि केवल सट्टेबाजी से.

चीन में 'ओवर-सप्लाई' और 'घोस्ट टाउंस' की समस्या है, जबकि भारत ऐसा देश है जहां आज भी मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए घरों की भारी कमी है. इसके अलावा, भारत में RERA (रेरा) जैसे सख्त नियमों और एस्क्रो अकाउंट की अनिवार्यता ने बिल्डरों द्वारा पैसों की हेराफेरी पर लगाम लगाई है, जबकि चीन में खरीदारों का भरोसा टूटने की मुख्य वजह प्रोजेक्ट्स का अधूरा छूटना और रेगुलेशन की कमी थी.

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