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India Today Conclave 2026: अंकुर अग्रवाल ने बताया UAE रियल एस्टेट की सफलता का राज

India Today Conclave 2026 में अंकुर अग्रवाल ने कहा कि गोल्डन वीजा और एस्क्रो-संरक्षित रियल एस्टेट जैसे सुधारों ने निवेशकों में वह भरोसा पैदा किया है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी यूएई के बाजार को स्थिरता प्रदान करता है.

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इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में अंकुर अग्रवाल (Photo-ITG)
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में अंकुर अग्रवाल (Photo-ITG)

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 के पहले दिन BNW डेवलपमेंट्स के चेयरमैन और फाउंडर  डॉ. (सीए) अंकुर अग्रवाल ने यूएई (UAE) रियल एस्टेट के असाधारण सफर की कहानी बताई. उन्होंने बताया कि कैसे यह कहानी एक मामूली 135 वर्ग फुट के दफ्तर से शुरू होकर आज 32 बिलियन दिरहम ($32 billion AED) की विकास वैल्यू तक पहुंच गई है.

अंकुर के मुताबिक, यह केवल ईंट-पत्थर या ऊंची इमारतों की कहानी नहीं है, बल्कि एक पूरी व्यवस्था यानी 'सिस्टम' के उदय की कहानी है, जो आज रेगिस्तानी जमीन से निकलकर हर भारतीय के डिनर टेबल की चर्चा का मुख्य हिस्सा बन चुकी है. कॉन्क्लेव की थीम 'ब्रेकथ्रू और ब्रेकडाउन' पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि क्या उसकी रफ्तार उसके ढांचे से आगे निकल जाती है या उसका ढांचा उस रफ्तार को सही सहारा देता है. 

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यूएई ने वैश्विक और क्षेत्रीय अनिश्चितताओं के बीच यह साबित किया है कि एक मजबूत ढांचा ही प्रगति का आधार होता है. राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद के नेतृत्व में यूएई ने न केवल अपनी सुरक्षा को पुख्ता किया है, बल्कि अपनी संस्थाओं और जनता के बीच एक अटूट बंधन बनाया है, जो संकट के समय में भी बाजार को स्थिरता प्रदान करता है.

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भारत और यूएई के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए अंकुर ने कहा कि यह रिश्ता अब केवल 'भावनात्मक कूटनीति' तक सीमित नहीं है, बल्कि एक 'नियोजित अर्थशास्त्र' में बदल चुका है. 2022 के CEPA समझौते के बाद द्विपक्षीय व्यापार 100 बिलियन डॉलर की ओर अग्रसर है. एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में उन्होंने आंकड़ों पर जोर देते हुए बताया कि जब भारत का पैमाना यूएई के ढांचे से मिलता है, तो प्रगति की गति कई गुना बढ़ जाती है, उन्होंने यूएई के 10 वर्षीय गोल्डन वीजा, 100% विदेशी स्वामित्व और एस्क्रो-संरक्षित रियल एस्टेट जैसे सुधारों को निवेशकों के भरोसे की असली वजह बताया.

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भारतीय निवेशकों को सलाह

रास अल-खैमा (RAK) के उभरते बाजार का जिक्र करते हुए उन्होंने कुछ चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए. 2024 में इस क्षेत्र ने रियल एस्टेट लेनदेन में 35,000 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बनाया और कीमतें अपनी मूल लागत से तीन गुना तक बढ़ गईं. अग्रवाल ने भारतीय निवेशकों को सलाह दी कि वे बाजार के शिखर के पीछे भागने के बजाय चक्र के शुरुआती दौर में प्रवेश करें. उनके अनुसार, रास अल-खैमा आज निवेश के उसी मोड़ पर खड़ा है जहां दुबई एक दशक पहले था. उन्होंने जोर दिया कि निवेश में 'स्पष्टता' ही डर को कम करती है और यही कारण है कि आज दुनिया भर के निवेशक यहां खिंचे चले आ रहे हैं.

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अंकुर ने 'ROI' की एक नई परिभाषा देते हुए कहा कि यह केवल 'रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट' नहीं बल्कि 'रिटर्न ऑन इंडिविजुअल' भी है अगर लोग सुरक्षित और गौरवान्वित महसूस करते हैं, तो समुदाय और बाजार अपने आप मजबूत होते हैं. 

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