scorecardresearch
 

World Bank on US-Iran War: 'अभी तो और बुरा होना...' अमेरिका-ईरान तनाव के बीच विश्‍व बैंक की चेतावनी

विश्‍व बैंक ने चेतावनी दी है कि युद्ध के बाद स्थिति और खराब होने वाली है. खासकर विकासशील देशों की अर्थव्‍यवस्‍थाओं को सबसे ज्‍यादा झटका लगेगा.

Advertisement
X
विश्‍व बैंक की चेतावनी. (Photo: File/ITG)
विश्‍व बैंक की चेतावनी. (Photo: File/ITG)

अमेरिका और ईरान के बीच जंग ने दुनिया भर की हेडक बढ़ा दी है, क्‍योंकि तेल के दाम रिकॉर्ड उछले हैं और 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब बने हुए हैं. साथ ही दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट भी देखने को मिली है. भारत समेत कई देशों का आयात-निर्यात भी प्रभावित हो गया है. ऐसे में विश्‍व बैंक की ओर से एक बड़ी चेतावनी आई है. 

विश्व बैंक के प्रमुख अजय बंगा ने चेतावनी देते हुए कहा कि अभी तो कुछ नहीं, युद्ध खत्‍म होने के बाद और बुरे हालात होने वाले हैं. जंग खत्‍म होने के बाद भी  नुकसान लंबे समय तक बना रह सकता है. उनका कहना है कि तत्‍काल और स्थायी युद्धविराम भी अर्थव्यवस्थाओं में व्यापक मंदी को नहीं रोक पाएगा. 

अगर युद्धविराम कायम रहता है, तो भी वैश्विक विकास में 0.3 से 0.4 प्रतिशत अंकों की गिरावट आ सकती है. अगर सीजफार फिर से टूट जाता है, तो गिरावट 1 प्रतिशत अंक तक बढ़ सकती है, जिसका व्यापक प्रभाव व्यापार, ऊर्जा बाजारों और फाइनेंस सिस्‍टम पर पड़ेगा. 

उन्‍होंने कहा कि महंगाई का दबाव भी साथ-साथ बढ़ने की आशंका है. बंगा ने संकेत दिया कि युद्धविराम की स्थिति में ग्‍लोबल महंगाई 200 से 300 आधार अंकों तक बढ़ सकती है और अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसमें 0.9 फीसदी अंकों तक की और बढ़ोतरी हो सकती है. विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए स्थिति और भी गंभीर दिखती है, जहां सबसे खराब स्थिति में महंगाई 6.7% तक पहुंच सकती है. 

Advertisement

खतरे की चपेट में विकासशील देश
विश्व बैंक ने ऊर्जा आयात पर निर्भर द्वीप अर्थव्यवस्थाओं समेत संवेदनशील देशों के साथ संकटकालीन सहायता के माध्यम से इमरजेंसी फंड उपलब्ध कराने के लिए बातचीत शुरू कर दी है. हालांकि, बंगा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सरकारों को ऐसी अस्थिर ऊर्जा सब्सिडी में नहीं फंसना चाहिए जो बाद में राजकोषीय अस्थिरता को पैदा कर दे. 

इसके विपरीत, उनका कहना है कि ऊर्जा में विविधता लाने में विफल रहने वाले देशों को लॉन्‍गटर्म आर्थिक अस्थिरता का खतरा रहता है. बंगा ने नाइजीरिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 20 अरब डॉलर की रिफाइनरी परियोजना ने घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है और यहां तक ​​कि पड़ोसी देशों को जेट ईंधन जैसे निर्यात को भी संभव बनाया है. 

बंगा ने इस बात पर जोर दिया कि लंबे समय समाधान वैकल्पिक ऊर्जा- परमाणु, जल, भूतापीय, पवन और सौर ऊर्जा - को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने में निहित है. इस बदलाव के बिना, देश पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर वापस लौट सकते हैं, जिससे आर्थिक और पर्यावरणीय जोखिम दोनों बढ़ जाएंगे. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement