सरकारी स्वामित्व वाली एक कंपनी के शेयरों में धुंआधार तेजी देखी जा रही है, क्योंकि इसकी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में हिस्सेदारी है और इसका आईपीओ जल्द आने वाला है. एनएसई सेबी के पास अपना DRHP फाइल करने वाला है, जिसके बाद इसका आईपीओ लॉन्च किया जाएगा.
NSE IPO के जल्द लॉन्च होने की खबर से IFCI लिमिटेड के शेयरों में अच्छी तेजी आई है और यह शेयर छह महीने में 86 फीसदी चढ़ चुके हैं. मंगलवार के कारोबार में यह शेयर 2.15 प्रतिशत चढ़कर 91.45 रुपये के नए 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए.
हालांकि, सत्र आगे बढ़ने के साथ ही शेयर की कीमत में गिरावट आई और अंत में यह 0.44 प्रतिशत गिरकर 89.13 रुपये पर कारोबार कर रहा था. इस स्तर पर, एक महीने में इसके शेयरों में 43.39 प्रतिशत और पिछले छह महीनों में 85.92 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.
इस वीक आ सकता है एनएसई का आईपीओ
IFCI के शेयरों में आई तेज़ी का संबंध नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में इसकी इनडायरेक्ट हिस्सेदारी से हो सकता है. सरकारी स्वामित्व वाली यह नॉन-बैंकिंग ऑर्गनाइजेशन, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SHCIL) में अपनी बहुसंख्यक हिस्सेदारी के माध्यम से NSE में हिस्सेदारी रखती है. यह उछाल NSE के लंबे इंतजार वाले IPO को लेकर नए सिरे से बनी उम्मीदों के बीच आया है, जिसके इस सप्ताह बाजार में आने की उम्मीद है.
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
एंजल वन के तकनीकी और डेरिवेटिव रिसर्च के मुख्य प्रबंधक ओशो कृष्ण ने बताया कि आईएफसीआई के मूल्य और मात्रा दोनों में जोरदार उछाल आया है और इसने 52 सप्ताह का नया उच्चतम स्तर छू लिया है. उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि जब तक यह गति बरकरार है, तब तक मुनाफा कमाते रहें.
आनंद राठी के सीनियर मैनेजर – टेक्निकल रिसर्च, जिगर एस पटेल ने कहा कि 85 रुपये पर सपोर्ट है, जबकि 91.40 रुपये के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है. 91.40 रुपये से ऊपर की निर्णायक बढ़त 94 रुपये तक और तेजी ला सकती है. शॉर्टटर्म में शेयर के 85-94 रुपये के दायरे में रहने की उम्मीद है. हालांकि, RSI संभावित मंदी के संकेत दे रहा है, इसलिए ट्रेडर्स को सतर्क रहने और 86 रुपये पर स्टॉप लॉस लगाकर मौजूदा पोजीशन बनाए रखने की सलाह दी जाती है.
चौथी तिमाही की आय
मार्च में समाप्त तिमाही के लिए गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी ने ऑपरेशन से कुल राजस्व 470 करोड़ रुपये दर्ज किया, जबकि पिछले वर्ष की इसी तिमाही में यह 413.61 करोड़ रुपये था, जो लगभग 13.63 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाता है. इस तिमाही के दौरान ब्याज से होने वाली आय पिछले वर्ष के 149.07 करोड़ रुपये से बढ़कर 153.40 करोड़ रुपये हो गई.
हालांकि, PAT वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में घटकर 34 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 260 करोड़ रुपये था. मार्च 2026 तक, सरकार के पास आईएफसीआई में 72.57 प्रतिशत हिस्सेदारी थी.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)