अमेरिका डॉलर को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है और इसकी विश्वसनीयता को बढ़ाने के लिए साम, दाम, दंड और भेद की नीति अपना रहा है. इसी क्रम में अमेरिका अब रूस के साथ एक बड़ी डील करने की फिराक में है. अगर ऐसा होता है तो ग्लोबल स्तर पर शेयर बाजार के सेंटिमेंट सुधर सकते हैं, लेकिन सोने-चांदी में बड़ी गिरावट आ सकती है.
दरअसल, गुरुवार को ब्लूमबर्ग ने एक रिपोर्ट पब्लिश की, जिसके मुताबिक रूसी राष्ट्रपति पुतिन डोनाल्ड ट्रंप के साथ संभावित आर्थिक साझेदारी के तहत अमेरिकी डॉलर सेटलमेंट सिस्टम में वापसी के लिए एक्टिव तौर पर विचार कर रहा है. इसका मतलब साफ है कि कोई भी लेनदेन रूस का अमेरिका के साथ डॉलर में हो सकता है.
सोने-चांदी में बड़ी गिरावट
जैसे ही यह खबर सामने आई सोने चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली. गुरुवार देर रात इंटरनेशनल स्तर पर सोना 4 फीसदी और सिल्वर 8 फीसदी से ज्यादा टूट गए थे. एमसीएक्स पर भी भारी गिरावट रही. अचानक चांदी में दो बार लोअर सर्किट देखने को मिली. आखिर में चांदी 26000 रुपये टूटकर बंद हुई थी और सोना 6000 रुपये से ज्यादा गिरा था. अमेरिका-रूस के बीच डॉलर में ट्रेड समझौते की खबर के अलावा सोने और चांदी में गिरावट की एक और वजह मजबूत अमेरिकी जॉब डाटा और फेड रेट कटौती की उम्मीद का कमजोर पड़ना भी रहा.
अमेरिका और रूस में क्या चल रही बात
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, इस प्रस्ताव में जीवाश्म ईंधन, प्राकृतिक गैस, तेल और महत्वपूर्ण कच्चे माल पर फोकस अमेरिका और रूस के बीच आर्थिक समझौता के सात क्षेत्रों की रूपरेखा दी गई है. इस प्रस्ताव के तहत सबसे ज्यादा फोकस करने वाली बात रही- पश्चिमी प्रतिबंधों और 2022 में SWIFT फाइनेंशियल सिस्टम से हटाए जाने के बाद सालों तक डॉलर बेस्ड व्यापार से दूर रहने के बाद अब फिर से डॉलर बेस्ड व्यापार में एंट्री.
अभी स्थानीय मुद्रा में व्यापार कर रहा रूस
हालांकि इससे पहले रूस ने स्थानीय मुद्रा में ही ट्रेड किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने चीन और भारत के साथ अपने लगभग 90% व्यापार को राष्ट्रीय मुद्रा में ही किया है. ब्रिक्स देशों में स्थानीय मुद्रा सेटलमेंट लगभग 60-67% तक बढ़ गया है. वरिष्ठ रूसी अधिकारियों के बीच प्रसारित और ब्लूमबर्ग द्वारा समीक्षा किए गए इस उच्च-स्तरीय दस्तावेज में 'जीवाश्म ईंधन को प्राथमिकता' देने की रणनीति की रूपरेखा दी गई है. अगर इस प्रस्ताव की मंजूरी मिलती है तो दुनिया की दो सबसे बड़ी ऊर्जा शक्तियां प्रतिद्वंद्वी से साझेदार बन जाएंगी.
सोने और चांदी में आएगी गिरावट?
इस डील के बाद यह माना जा रहा है कि सोने-चांदी जैसे सेफ निवेश में बिकवाली हावी हो सकती है. डॉलर के मजबूत होने से लोग सोने और चांदी को छोड़कर शेयर बाजार में निवेश कर सकते हैं. जिससे गोल्ड सिल्वर के रेट करेक्ट हो सकते हैं.