scorecardresearch
 

Iran War Impact: ईरान युद्ध से मूड खराब... भागने लगे विदेशी निवेशक, ताबड़तोड़ ₹52000Cr निकाले

US-Israel और Iran के बीच युद्ध के चलते मार्च का महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए अच्छा नहीं रहा है और विदेशी निवेशकों ने भी जमकर बिकवाली की है. इसमें क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों का भी बड़ा रोल रहा है.

Advertisement
X
मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते बाजार में गिरावट के बीच भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली. (Photo: Reuters)
मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते बाजार में गिरावट के बीच भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली. (Photo: Reuters)

मिडिल ईस्ट में जंग की आग से दुनिया के तमाम देश झुलस रहे हैं. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध ने खासतौर पर शेयर बाजारों में जमकर कोहराम मचाया है. भारतीय बाजार भी संभल नहीं पा रहा है, तो दूसरी ओर Iran War ने विदेशी निवेशकों का भी मूड बिगाड़ दिया है और एक बार भी एफपीआई ने तगड़ी बिकवाली की है. आंकड़े देखें, तो मार्च में ही अब तक FPI ने भारतीय बाजारों से 52000 करोड़ रुपये से ज्यादा निकाले हैं. 

इधर युद्ध की शुरुआत, उधर निकासी चालू
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव, भारतीय करेंसी रुपये में गिरावट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने विदेशी निवेशकों के सेंटीमेंट पर बुरा असर डाला है और 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान के युद्ध के बाद से मार्च महीने में अब तक जमकर बिकवाली देखने को मिली. आंकड़ों पर नजर डालें, तो विदेशी निवेशकों ने पहले पखवाड़े में 52,704 करोड़ रुपये (लगभग 5.73 अरब डॉलर) की निकासी की है. 

पिछले महीने ही लौटे थे FPI
डिजॉजिटरी के आंकड़ों को देखें, तो लगातार तीन महीने की बिकवाली के बाद फरवरी में ही विदेशी निवेशकों की वापसी देखने को मिली थी. FPI ने नवंबर 2025 में 3,765 करोड़ रुपये, दिसंबर 2025 में 22,611 करोड़ रुपये और जनवरी 2026 में 35,962 करोड़ रुपये की निकासी की थी. हालांकि, इसके बाद एफपीआई ने फरवरी में 22,615 करोड़ रुपये डाले थे, जो बीते 17 महीनों में सर्वाधिक निवेश था. लेकिन मार्च में युद्ध ने फिर विदेशी निवेशकों का मूड खराब कर दिया. 

Advertisement

तगड़ी बिकवाली के ये बड़े कारण
मार्केट एक्सपर्ट्स की मानें, तो ग्लोबल टेंशन के बीच वैश्विक अनिश्चितता और क्रूड के दाम में उछाल के साथ ही रुपये पर दबाव से भी निवेशकों का सेंटीमेंट बिगड़ा है और उनके रिस्क लेने की क्षमता कम हुई है और भारतीय बाजार से पैसे बाहर निकले हैं. Crude Price एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने से बाजार में जोखिम से बचाव की प्रवृत्ति में इजाफा हुआ है. 

शेयर बाजार क्रैश से निवेशक बेहाल 
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के साथ ही अगर भारतीय शेयर की स्थिति पर गौर करें, तो बीते सप्ताह सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स भरभराकर टूटे थे. पांच कारोबारी दिनों में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का Sensex 4,355 अंक या 5.51% की गिरावट में रहा, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का Nifty 1,299.35 अंक या 5.31% फिसला. इस गिरावट के बीच सेंसेक्स की टॉप-10 कंपनियों को 4.48 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा. 

(नोट- शेयर बाजार में किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें.) 

---- समाप्त ----
Live TV

TOPICS:
Advertisement
Advertisement