अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिका के एक कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है. न्यूयाॉर्क के एक संघीय कोर्ट के जज ने फैसला सुनाया है कि जिन कंपनियों ने अब अमान्य टैरिफ का भुगतान किया था, अब वे रिफंड के हकदार हैं. कोर्ट के इस फैसले का मतलब है कि टैरिफ वसूली वापस हो सकती है, जो अमेरिकी व्यापार इतिहास में सबसे बड़ा रिफंड हो सकता है.
एपी की रिपोर्ट के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय के न्यायाधीश रिचर्ड ईटन ने बुधवार को कहा कि सभी रजिस्टर्ड इम्पोर्टर, जिनपर पिछले साल ट्रंप का टैरिफ लगा था, अब रिफंड पाने के हकदार हैं. क्योंकि पिछले महीने अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने 1977 के अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को रद्द कर दिया था.
इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि रिफंड सिर्फ चुनिंदा व्यापारी के लिए नहीं है, बल्कि IEEPA कानून के तहत शुल्क का भुगतान करने वाली सभी कंपनियों पर लागू है. ईटन ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अकेले IEEPA टैरिफ रिफंड से संबंधित मामलों की सुनवाई करेंगे, जिससे इस जटिल और उच्च जोखिम वाली प्रक्रिया की केंद्रीय निगरानी तय की जा सके.
कितना रिफंड देना होगा?
पेन व्हार्टन बजट मॉडल के अनुमानों के अनुसार, अमेरिका को एक बड़ा रिफंड देना होगा. क्योंकि सरकार ने दिसंबर मिड तक टैरिफ से 130 अरब डॉलर से अधिक की वसूली की थी. अनुमान है कि कुल रिफंड 175 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. कोर्ट ने फरवरी में ही बड़ा फैसला सुनाते हुए ट्रंप टैरिफ को खारिज कर दिया था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि रिफंड कब और कैसे मिल सकता है. हालांकि अब इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट ने टैरिफ पर रिफंड की बात कही है.
अभी देशों पर कितना है टैरिफ?
कोर्ट का फैसला आने के बाद ट्रंप टैरिफ को अवैध कर दिया गया है, लेकिन अभी अमेरिका ने Trade Act 1974 की Section 122 के तहत लगभग 15% तक का वैश्विक टैरिफ लागू रखा है. यह टैरिफ ज्यादातर देशों से आने वाले आयात पर लागू है. यह अधिकतम 150 दिनों (करीब 5 महीने) तक लागू रह सकता है, उसके बाद इसे जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी चाहिए. हालांकि कुछ सेक्टर्स पर पहले वाला ही टैरिफ लागू है, जिसमें स्टील और एल्युमिनियम, ऑटोमोबाइल, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कुछ औद्योगिक उत्पाद शामिल हैं.