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Trump Tension: होर्मुज 'नाकाबंदी' पर ट्रंप ने मांगा था NATO का साथ, जबाव आया 'NO'

Donald Trump ने इस्लामाबाद में ईरान के साथ शांति वार्ता विफल होने के बाद ही सख्त रुख अपना लिया था और ईरान बंदरगाहों पर नाकाबंदी का ऐलान कर दिया था, जिसे 24 घंटे हो चुके हैं. इस बीच NATO ने ट्रंप की टेंशन फिर से बढ़ा दी है.

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नाटो ने ठुकरा दिया ट्रंप का प्रस्ताव. (Photo: GettyImage)
नाटो ने ठुकरा दिया ट्रंप का प्रस्ताव. (Photo: GettyImage)

ईरान के साथ युद्ध अमेरिका को भी भारी पड़ता नजर आया है. देश में फ्यूल समेत अन्य चीजों पर महंगाई की चोट पड़ी है, तो वहीं पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत फेल होने के बाद बौखलाए ट्रंप को एक और झटका लगा है. दरअसल, अपने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा ऐलान के साथ ट्रंप ने नाटो के सहयोगी देशों से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी में शामिल होने की अपील की थी, लेकिन NATO देशों ने इसे ठुकरा दिया है और Hormuz Blockade में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है. ये ट्रंप की टेंशन और गुस्सा दोनों बढ़ाने वाली खबर है. 

ट्रंप पहले से ही नाटो से खफा नजर आ रहे थे और अब होर्मुज प्लान में साथ न आने से ये तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. उन्होंने पहले ही नाटो से हटने की धमकी दी हुई है और कई देशों द्वारा ईरान पर हमलों के लिए अपना हवाई क्षेत्र देने से इनकार करने के बाद यूरोप से कुछ अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने पर विचार कर रहे हैं.

नाटो ने ठुकराया ट्रंप का प्रस्ताव
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, NATO सहयोगी देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरानी पोर्ट्स की नाकाबंदी के प्लान में शामिल होने से इनकार किया है. उनका कहना है कि वे लड़ाई खत्म होने के बाद ही हस्तक्षेप करेंगे. इससे पहले Donald Trump ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा था कि अन्य देश भी जल्द ही होर्मुज नाकाबंदी में शामिल होंगे. 

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इसके बावजूद, ब्रिटेन और फ्रांस सहित नाटो के सदस्यों ने इसमें शामिल होने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है. इसके बजाय Hormuz Strait को फिर से खोलने के प्रयासों पर फोकस किया है, जिससे ग्लोबल तेल शिपमेंट का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है.

किस देश ने क्या कहा? 
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने एक इंटरव्यू में कहा कि काफी दबाव के बावजूद ब्रिटेन नाकाबंदी का समर्थन नहीं करेगा और युद्ध में घसीटे जाने से बचने के अपने फैसले पर जोर दिया. इसके अलावा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने होर्मुज में आवाजाही बहाल करने के लिए एक मल्टीनेशनल मिशन के लिए ब्रिटेन और अन्य देशों के साथ एक सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई है. स्टारमर की ओर से भी कहा गया कि इस पहल का उद्देश्य तेल-गैस टैंकरों के लिए सुरक्षित आवागमन के नियम निर्धारित करना है. 

Hormuz Strait Tension

इससे पहले नाटो के 32 सदस्य देशों में से कई ने युद्ध समाप्त होने और यह आश्वासन मिलने के बाद ही Hormuz Strait में मदद करने की इच्छा जताई कि उनके जहाजों को निशाना नहीं बनाया जाएगा. रिपोर्ट की मानें तो, खाड़ी देशों, भारत, ग्रीस, स्पेन, इटली, नीदरलैंड और स्वीडन सहित लगभग 30 देशों की एक बैठक जल्द ही पेरिस या लंदन में हो सकती है, जिसमें मिशन की योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा.

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'अमेरिका बना रहा नाटो पर दबाव'
बीते सप्ताह आई रिपोर्ट पर गौर करें, तो ईरान के साथ हुए सीजफायर के ऐलान के बाद ही अमेरिका फिर से अपने यूरोपीय सहयोगियों पर दबाव बनाता दिखा. राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने यूरोपीय सहयोगियों से डिमांड की है कि वो दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित बनाने के लिए अमेरिका के साथ आएं. उन्होंने सख्त लहजे में कहा था कि अब सिर्फ समर्थन के लिए बयान देना काफी नहीं है.

रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रंप ने नाटो महासचिव मार्क रुट से मुलाकात के दौरान भी यह मुद्दा उठाया. इसके बाद NATO ने कहा था कि अमेरिका अब फिर से अपने सहयोगियों पर दबाव डाल रहा है. तो वहीं ट्रंप कई बार नाटो की भूमिका पर सवाल उठा चुके हैं और यहां तक कह चुके हैं कि अमेरिका इस गठबंधन से अलग भी हो सकता है.

Hormuz 'नाकाबंदी' के 24 घंटे
इस बीच अमेरिका की होर्मुज नाकाबंदी के 24 घंटे के अपडेट पर नजर डालें, तो अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा है कि पहले दिन कोई भी जहाज अमेरिकी नाकाबंदी को पार नहीं कर पाया. कम से कम छह कमर्शियल जहाजों को रोका गया और उन्होंने अमेरिकी निर्देशों का पालन करते हुए वापस मुड़ने का फैसला करते हुए ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश किया.

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