डोनाल्ड ट्रंप के लिए बीते कुछ दिनों से लगातार एक के बार एक बड़ी टेंशन (Donald Trump Tension) देखने को मिल रही हैं. पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनके IEEPA के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को गैरकानूनी बताते हुए उन्हें तगड़ा झटका दिया, तो वहीं अब अमेरिकी शेयर बाजार (US Stock Market) से भी उनकी टेंशन बढ़ाने वाली खबर आई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका की वॉल स्ट्रीट से निवेशकों के पलायन का सिलसिला तेज होता जा रहा है.
बाजार का ट्रेंड, ट्रंप की टेंशन!
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी शेयर बाजार में इस समय जो ट्रेंड देखने को मिल रहा है, वह 'Buy America To Bye America' का है. वॉल स्ट्रीट से पलायन की रफ्तार तेज हो रही है. अमेरिकी निवेशक कम से कम 16 वर्षों में सबसे तेज गति से अपने ही शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. बीते कुछ दिनों की बात करें, तो बड़ी टेक कंपनियों का रिटर्न कम होने के चलते अमेरिकी निवेशकों को बेहतर प्रदर्शन करने वाले विदेशी बाजार ज्यादा लुभाने लगे हैं.
इसे ऐसे समझा जा सकता है कि AI सेक्टर में बूम ने बीते साल S&P 500 इंडेक्स को रिकॉर्ड हाई पर पहुंचाया था, लेकिन AI से होने वाले संभावित जोखिमों और इससे जुड़ी लागतों को लेकर चिंताएं बढ़ने के साथ ही Wall Street के शेयरों का आकर्षण कम हो गया है.
हैरान करने वाले हैं आंकड़े
LSEG/लिपर के आंकड़ों को देखें, तो बीते छह महीनों में अमेरिका में रहने वाले शेयर बाजार निवेशकों ने अमेरिकी इक्विटी से करीब 75 अरब डॉलर निकाले हैं, जिसमें से अकेले 2026 की शुरुआत से अब तक 52 अरब डॉलर का आउटफ्लो हुआ है, जो साल 2010 के बाद से वर्ष के पहले आठ हफ्तों में सबसे अधिक है. खास बात ये है कि ये टेंशन बढ़ाने वाले आंकड़े US Dollar के दुनिया की दूसरी अन्य करेंसियों के मुकाबले कमजोर होने के बावजूद आए हैं.
वहीं दूसरी ओर अमेरिकी निवेशकों ने इस साल 2026 में अब तक उभरते बाजारों के शेयरों में लगभग 26 अरब डॉलर का निवेश किया है, जिसमें साउथ कोरिया सबसे बड़ा ठिकाना बनकर उभरा है और वहां 2.8 अरब डॉलर का निवेश हुआ है. इसके बाद ब्राजील में 1.2 अरब डॉलर लगाए गए हैं.
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में ये हाल
आंकड़ों से पता चलता है कि बीते साल जनवरी महीने में जब डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी, उसके बाद से अमेरिका में रहने वाले निवेशकों ने यूरोपीय इक्विटी में लगभग 7 अरब डॉलर का निवेश किया है. जबकि, इससे पहले Donald Trump के पहले कार्यकाल के दौरान 2017 से 2021 तक कुल चार सालों में निवेशकों ने का अरबों डॉलर का आउफ्लो देखने को मिला था.
बैंक ऑफ अमेरिका ने कहा कहा?
बैंक ऑफ अमेरिका (BoA) के फरवरी के फंड मैनेजर सर्वे से भी पता चला कि अमेरिकी निवेशकों ने US Stocks से उभरते बाजारों के शेयरों की ओर पिछले पांच वर्षों में सबसे तेजी से रुख किया है. UBS के यूरोपीय इक्विटी स्ट्रेटजी और ग्लोबल डेरिवेटिव स्ट्रेटजी के चीफ गैरी फाउलर ने कहा है कि मैंने अमेरिका के वेल्थ बिजनेस विदेशों में अधिक निवेश करने की बात कर रहे हैं, क्योंकि बीते साल के अंत में उन्होंने डॉलर में विदेशी बाजारों के प्रदर्शन को देखा और उन्हें लगा वाह, मैं बहुत कुछ खो रहा हूं.
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी का ही परिणाम है कि जनवरी 2025 से अब तक डॉलर में 10% की गिरावट आई है. कार्मिग्नैक के पोर्टफोलियो एडवाइजर केविन थोजेट ने भी कहा कि उनकी टीम ने पाया है कि 2025 के मध्य से यूरोप में आने वाली अमेरिकी पूंजी का प्रवाह तेज हुआ है.
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप को दी ये बड़ी टेंशन
इस रिपोर्ट से पहले बीते 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया दिया था, जो राष्ट्रपति ट्रंप के लिए बड़ी टेंशन मानी गई. कोर्ट ने कहा था कि Donald Trump ने व्यापक आयात शुल्क लगाने के लिए आईईईपीए का हवाला देकर अपने अधिकारों का उल्लंघन किया. रिपोर्ट की मानें, तो अमेरिका मंगलवार 24 फरवरी से Supreme Court द्वारा रद्द किए गए अतिरिक्त शुल्कों की वसूली रोकने वाला है. अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा विभाग ने घोषणा की है.