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कॉलेज की फीस से खरीदा रॉकेट के पार्ट्स, ये स्टॉर्टअप्स कर रहे हैं स्पेस को लेकर बड़ा काम... मिल रही है कामयाबी

पिछले कुछ साल में स्पेस की दुनिया में भारतीय युवाओं के स्टार्टअप ने कमाल किया है. अब देश में स्पेश स्टार्टअप की एक अलग इकोनॉमी तैयार हो गई और उन्हें जोरदार फंडिंग भी मिल रही है. हालांकि, हर सेक्टर की तरह इसकी भी कुछ चुनौतियां हैं, लेकिन युवाओं का जोश हर रोज नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है.

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नागा भारत डाका, पवन कुमार चंदना, स्काईरूट एयरोस्पेस
नागा भारत डाका, पवन कुमार चंदना, स्काईरूट एयरोस्पेस

भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो (ISRO)  ने आज चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है. भारत का ये तीसरा मून मिशन है. देश ने समय के साथ स्पेस के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल की है. अंतरिक्ष में भारत की सफलता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि मौजूदा समय एक स्टार्ट-अप समूह देश की स्पेस इकोनॉमी को आगे बढ़ा रहा है. ये स्टार्ट-अप लॉन्च सिस्टम की मैन्युफैक्चरिंग से लेकर सैटेलाइट सर्विस प्रदान करने जैसे बड़े काम को अंजाम दे रहे हैं. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ स्टार्ट-अप की जबरदस्त कहानी, जो हर रोज स्पेस के सेक्टर में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं.

मोइन एस.पी.एम., श्रीनाथ रविचंद्रन, फाउंडर, अग्निकुल कॉसमॉस

36 वर्षीय श्रीनाथ रविचंद्रन और 31 वर्षीय मोइन एस.पी.एम. कम लागत वाले रॉकेटों की अपनी सीरीज अग्निबाण को अंतरिक्ष में भेजने पर काम कर रहे हैं. रविचंद्रन के पास इलिनोइस यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की है. श्रीनाथ रविचंद्रन ने पहली बार इस बारे में तब सोचा था, जब वो लॉस एंजिल्स में कमर्शियल अंतरिक्ष डोमेन के लोगों के साथ काम कर रहे थे.

उन्होंने उपग्रह डिजाइन किए थे, लेकिन वे यह नहीं जानते थे कि पृथ्वी की कक्षा में उन्हें कैसे स्थापित किया जाए. रविचंद्रन ने बिजनेस टुडे को बताया कि जब मैंने भोलेपन से पूछा कि यह समस्या क्यों है, तो मुझे बताया गया कि यह या तो सही तरह के रॉकेट या फिर साझेदारों की गैरमौजूदगी के कारण था.

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रविचंद्रन, जो पहले एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और एक फाइनेंस पर्सन के रूप में काम कर चुके थे. वो एलोन मस्क के स्पेसएक्स कार्यक्रम के डेवलपमेंट पर नजर रख रहे थे. उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और भारत लौट आए. यहां उन्होंने मोइन एस.पी.एम के साथ अग्निकुल कॉसमॉस की स्थापना की. रविचंद्रन और मोइन साल 2017 में चेन्नई के एक मैदान पर क्रिकेट मैच के दौरान मिले थे. कंपनी को अभी तक 15 मिलियन डॉलर की फंडिग मिल चुकी है.

राहुल रावत, तनवीर अहमद, अनिरुद्ध एन. शर्मा, दिगंतारा रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज

राहुल रावत, तनवीर अहमद, अनिरुद्ध एन. शर्मा ने साल 2018 में दिगंतारा रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज की स्थापना की थी. ये कंपनी अंतरिक्ष गतिविधि की निगरानी के लिए लिए नैनो सैटेलाइट और अन्य कॉम्पोनेंट बनाती है. कंपनी के को-फाउडर राहुल रावत बताते हैं कि जब उन्हें शुरुआती कॉन्ट्रैक्ट मिला, तो उनके पास उसे पूरे करने के लिए पैसे नहीं थे. कॉन्ट्रैक्ट देने वाली कंपनी उनकी क्रेडिबिलिटी को चेक करना चाहती थी.

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ऐसे में राहुल और अनिरुद्ध ने अपने कॉलेज की फीस को कॉम्पोनेंट्स बनाने के कॉन्ट्रैक्ट में लगा दिया. उनके प्रोडक्ट्स को देखकर कॉन्ट्रैक्ट देने वाली कंपनी काफी प्रभावित हुआ और फिर ऐसे दिगंतारा रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज चल निकली. दिगंतारा रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज को कलारी कैपिटल से 2.5 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिल चुकी है.

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नागा भारत डाका, पवन कुमार चंदना, स्काईरूट एयरोस्पेस

स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना साल 2018 में नागा भारत डाका, पवन कुमार चंदना ने की. कंपनी  छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में ले जाने के लिए डिजाइन किए गए लॉन्च व्हीकल्स की छोटी-लिफ्ट जैसे प्रोडक्ट्स बनाती है. कंपनी ने अब तक 17 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है. 

भारत में बढ़ेगा निवेश

इन स्पेस के चेयरपर्सन पवन कुमार गोयनका कहते हैं कि अगले छह महीनों के भीतर कई और कंपनियां पूरी तरह सफलता का दावा करने में सक्षम होंगी और एक बार ऐसा होने पर बड़े पैमाने पर निवेश भी आएगा.

घरेलू फंडिंग सबसे जरूरी

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार से डेवलपमेंट पर कड़ी निगरानी रखने की उम्मीद की जाती है. इसलिए, इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण उदारीकरण होने में कुछ और साल लगेंगे. लॉ फर्म डीएसके लीगल में पार्टनर हेमांग पारेख कहते हैं कि आगे बढ़ने वाली मुख्य चुनौती निजी क्षेत्र की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त तकनीकी बुनियादी ढांचा प्रदान करना और विदेशी फंडिंग के जरिए से विदेशी प्लेयर्स के व्यावसायिक शोषण से बचने के लिए घरेलू फंडिंग उपलब्ध कराना होगा. फिलहाल ऐसा प्रतीत होता है कि भारत में एक प्रमुख कर्मशियल अंतरिक्ष केंद्र बनने की संभावना काफी उज्ज्वल है. 

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