डोनाल्ड ट्रंप अपने ही खेल में फंसे हुए नजर आ रहे हैं. ऐसा इसिलए क्योंकि ईरान से जंग अमेरिका भारी पड़ती जा रही है और अब इसका बुरा असर अमेरिकियों पर भी साफ दिखने लगा है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश में गैसोलीन (सबसे आम पेट्रोल) महंगा हो गया है और इसकी कीमत साल 2022 के बाद सबसे हाई पर पहुंच गई है. Iran War शुरू होने के बाद कीमतों में आग लगी है.
ईरान जंग, होर्मुज बंद से हाहाकार
अमेरिका में गैसोलीन के प्राइस में तगड़ा इजाफा देखने को मिला है और इसका भाव चार साल के हाई पर पहुंच चुका है. एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के साथ युद्ध ने खुद अमेरिका में महंगाई बढ़ाने का काम किया है, क्योंकि दुनिया की कुल खपत के करीब 20 फीसदी तेल-गैस की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण ईरानी कंट्रोल वाले होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट से Global Oil-Gas Crisis पैदा हुआ है. अमेरिका ही नहीं, बल्कि तमाम देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों (Petrol-Diesel Price) में तेजी आई है.
वाहन चालकों पर तगड़ी मार
रिपोर्ट में मोटर क्लब AAA के हवाले से कहा गया है कि रेगुलर गैसोलीन के एक गैलन की राष्ट्रीय औसत कीमत अब 4.02 डॉलर पर पहुंच गई है और ये कीमत ईरान के साथ अमेरिका का युद्ध शुरू होने से पहले की कीमत से एक डॉलर प्रति गैलन से भी ज्यादा है. ये ईंधन के दाम का राष्ट्रीय औसत है, यानी कुछ अमेरिकी राज्यों में ये इससे भी ज्यादा हो सकती है.

अमेरिका में डीजल की कीमतों की बात करें, तो अब औसतन 5.45 डॉलर प्रति गैलन हो गई हैं, जो युद्ध शुरू होने से पहले लगभग 3.76 डॉलर प्रति गैलन थी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि युद्ध लंबा चला तो फ्यूल की कीमतों में और भी इजाफा हो सकता है. इससे पहले अमेरिकी ड्राइवरों ने वहां मौजूद पंपों पर इतनी ज्यादा कीमत करीब चार साल पहले 2022 में देखी थी. जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था और तेल-गैस की कीमतों में आग लग गई थी.
क्रूड की कीमत बढ़ने का असर
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध पांचवें हफ्ते में एंट्री ले चुका है और इसे लेकर आने वाले एक-एक अपडेट का असर क्रूड ऑयल की अंतरराष्ट्रीय कीमत पर देखने को मिल रहा है. Crude Oil Price 114-115 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में कारोबार कर रहा है. कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा पेट्रोल-डीजल के प्राइस बढ़ने में अहम रोल होता है. इसकी वजह है कि क्रूड पेट्रोल का प्रमुख घटक है.