इस साल ग्लोबल मंदी की जो आशंका जताई जा रही थी वो केवल वैश्विक सुस्ती तक ही थमने का अनुमान है. इसकी वजह है कि अमेरिका में अब मंदी की आशंका खारिज हो गई है. उल्टा वहां की विकास दर को लेकर अब पूर्वानुमानों में बढ़ोतरी दिखाई जा रही है. दरअसल, OECD ने पूर्वानुमान जताया है कि उम्मीद से ज्यादा मजबूत अमेरिकी अर्थव्यवस्था इस साल वैश्विक मंदी को काबू में रखने में मदद कर रही है. लेकिन कमजोर चीनी अर्थव्यवस्था अगले साल आर्थिक रिकवरी के रास्ते में बड़ा ब्रेकर साबित हो सकती है.
2023 में घटेगी वैश्विक विकास दर
हालांकि अमेरिका के मजबूत प्रदर्शन ने दुनिया को इस साल मंदी से तो बचा लिया है. लेकिन इसके बावजूद EU और दूसरी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के कमजोर प्रदर्शन के असर से आर्थिक सुस्ती का साया गहरा गया है. OECD के मुताबिक पिछले साल ग्लोबल विकास दर 3.3 फीसदी रही थी. लेकिन इस साल वैश्विक ग्रोथ सुस्त होकर 3 परसेंट रह सकती है.
हालांकि ये नया अनुमान जून के आउटलुक से बेहतर है, क्योंकि तब OECD ने इस साल के लिए वैश्विक ग्रोथ का अनुमान महज 2.7 फीसदी लगाया था.
अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने दिखाया दम
जाहिर है इस साल के लिए ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन से ही बढ़ा है. OECD के मुताबिक इस साल अमेरिका 2.2 फीसदी की दर से विकास करेगा, वहीं जून में अमेरिका के लिए ग्रोथ का अनुमान महज 1.6 परसेंट था. लेकिन अगले साल अमेरिका की विकास दर धीमी होकर 1.3 फीसदी रहने की आशंका है. फिर भी ये आंकड़ा जून के 1 फीसदी के मुकाबले ज्यादा है
चीन बनेगा 2024 में बड़ी चुनौती
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के इस बेहतर प्रदर्शन ने ग्लोबल इकॉनमी को यूरो जोन, चीन और जर्मनी से लगे झटकों से उबरने में मदद की है. वहीं चीन को लेकर OECD का मानना है कि चीनी अर्थव्यवस्था इस साल 5.1 फीसदी के मुकाबले अगले साल 4.6 परसेंट की दर से विकास करेगी
OECD ने जून में चीन की विकास दर का इस साल का अनुमान 5.4 फीसदी और अगले साल के लिए 5.1 परसेंट लगाया था. OECD के मुताबिक कोविड-19 प्रतिबंधों को हटाने का जो फायदा चीन को मिला था वो अब सुस्त होने लगा है. इसके साथ ही चीन में रियल एस्टेट संकट लगातार गहराता जा रहा है.
यूरो जोन पर भी मंडराया संकट!
इसके अलावा OECD ने इस साल यूरो जोन के ग्रोथ आउटलुक को 0.9 फीसदी से घटाकर 0.6 परसेंट कर दिया है. अगले साल के लिए यूरो जोन के ग्रोथ अनुमान को 1.1 फीसदी रखा गया है लेकिन ये भी जून के 1.5 फीसदी के अनुमान से कम है. अगले साल के लिए कमजोर विकास दर अनुमान के बावजूद OECD ने सुझाव दिया है कि ब्याज दरों को केंद्रीय बैंक तब तक ऊंचा बनाएं रखें जबतक कि साफ तौर पर महंगाई का दबाव कम ना हो जाए.