उद्योग जगत के लिए शुक्रवार का दिन दुख भरा रहा. केपीआईटी टेक्नोलॉजीज (KPIT Technologies) के संस्थापक और चेयरमैन एस.बी. रवि पंडित का 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उन्होंने पुणे में आखिरी सांस ली.
दरअसल, कंपनी ने 8 मई 2026 को स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के माध्यम से उनके निधन की जानकारी दी. वे भारतीय आईटी और ऑटोमोबाइल जगत के एक बड़े नाम थे. पिछले तीन दशकों में उन्होंने न केवल केपीआईटी को एक ग्लोबल सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मोबिलिटी कंपनी के रूप में स्थापित किया, बल्कि भारत को इस फील्ड में आगे बढ़ाने का काम किया.
रवि पंडित ने केपीआईटी टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक और चेयरमैन के रूप में कंपनी को ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर की दुनिया में एक बड़ा नाम बनाया. आज यह कंपनी 15 देशों में काम करती है और दुनिया की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनियों के साथ मिलकर ऑटोनॉमस ड्राइविंग, इलेक्ट्रिफिकेशन और क्लीन मोबिलिटी पर काम कर रही है.
रवि पंडित की पढ़ाई-लिखाई
एस.बी. रवि पंडित चार्टर्ड अकाउंटेंट थे. उन्होंने अमेरिका के प्रतिष्ठित MIT स्लोन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से पढ़ाई की थी. उन्हें इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी के 'फेलो' के रूप में भी चुना गया था.
KPIT के अलावा रवि पंडित 'कीर्तने एंड पंडित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स' (KPCA) के भी चेयरमैन थे. इसके अलावा उन्होंने 'पुणे इंटरनेशनल सेंटर' और 'जनवाणी' जैसे संस्थानों की सह-स्थापना की. वह 'मराठा चैंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर' (MCCIA) के अध्यक्ष भी रहे.
सरकारी और नीतिगत भूमिका
रवि पंडित केवल व्यापार तक सीमित नहीं थे. वे पर्यावरण और भविष्य की ऊर्जा को लेकर बहुत गंभीर थे. उन्होंने भारत सरकार के 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनका सपना था कि भारत खेती और ऊर्जा के लिए हाइड्रोजन जैसे साफ ईंधन का इस्तेमाल करे, जिसके लिए उन्होंने HRIDAY नाम की एक खास पहल भी शुरू की थी.
रवि पंडित एक लेखक भी थे. उन्होंने 'Leapfrogging to Pole-Vaulting' नामक एक पुरस्कार विजेता पुस्तक का सह-लेखन किया, जिसमें भारत के विकास के लिए दृष्टिकोण साझा किए गए हैं.
रवि पंडित का निधन भारतीय उद्योग जगत और विशेष रूप से ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी क्षेत्र के लिए एक बड़ी क्षति है. उन्हें एक ऐसे दूरदर्शी नेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने तकनीक के माध्यम से भविष्य की मोबिलिटी को नई दिशा दी.