क्रिकेट अब सिर्फ खेल नहीं रहा- ये पैसा, पावर और पहचान का ऐसा मैदान बन चुका है, जहां एक शॉट करियर बदल देता है और एक सीजन जिंदगी. गांव की गलियों से निकलकर दुनिया के मंच तक पहुंचने वाले खिलाड़ी आज करोड़ों में खेल रहे हैं. इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) ने इस सपने को हकीकत बना दिया है.
अपने बच्चों के खिलाड़ी बनाइए, पढ़ाई जरूरी है, लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ खेल के भी गुर सिखाइए. अगर सचिन तेंदुलकर क्रिकेटर नहीं होकर किसी दूसरे प्रोफेशन में होते तो क्या इतनी बड़ी कामयाबी मिलती, अगर एमएस धोनी रेलवे में TC बनकर ही रह जाते, तो क्या दुनिया आज उनको जानती? खेल में आजकल सबकुछ है, पैसा है, शोहरत है और इज्जत भी.
खासकर क्रिकेट पर अब पैसों की बारिश हो रहे हैं, अच्छी बात है. तमाम ऐसे क्रिकेटर हैं, जो छोटे-छोटे गांव से निकलकर आए हैं, और अपनी कामयाबाी की कहानी खुद लिखी है, फिर उनपर पैसे भी बरस रहे हैं. खासकर आईपीएल (IPL) ने क्रिकेटरों को एक ऐसा मंच दे दिया है, जहां पैसे की पूरी गारंटी रहती है. हर चौके-छक्के पर पैसे बरसते हैं, क्योंकि दुनियाभर में आईपीएल को लेकर जबरदस्त दीवानगी है.
IPL में जमकर बरस रहे हैं पैसे
दरअसल, IPL का पूरा बाजारीकरण हो चुका है. मनोरंजन के साथ-साथ कमाई का एक पूरा फॉर्मेट तैयार हो चुका है. IPL टीमें चलाने वाली कंपनियों भी कमा रही हैं, तो खिलाड़ियों को भी उनका हिस्सा मिल रहा है. IPL आर्गेनाइजर भी छाप रहे हैं. यानी किसी को कम, किसी को ज्यादा, लेकिन कमाई में सबको हिस्सा मिल रहा है. पिछले 17 वर्षों में IPL का रोमांच बहुत तेजी से बढ़ा है. एक बार फिर IPL का मंच सज चुका है, चंद दिन के बाद देश में IPL की धूम मचने वाली है, जिसे दुनिया देखेगी.
लेकिन साल- 2026 में IPL शुरू होने से पहले दो आंकड़े सामने आए हैं. देखकर लगता है कि किसी बड़ी कंपनी का टर्नओवर है. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम 16,706 करोड़ रुपये में बिक गई. जबकि राजस्थान रॉयल्स की टीम $1.63 बिलियन (15,290 करोड़ रुपये) में बिकी है. दरअसल, जब आईपीएल की शुरुआत हुई थी तब किसी ने कल्पना नहीं की होगी, कि महज डेढ़ दशक में एक-एक आईपीएल की टीमें इतनी महंगी हो जाएंगी. दोनों डील्स से साफ है कि IPL अब बिलियन-डॉलर लीग बन चुका है. ग्लोबल निवेशक तेजी से इसमें पैसा लगा रहे हैं.
एक तरह से आईपीएल का बिजनेस मॉडल अबतक बिल्कुल सक्सेस रहा है. इसमें निवेश करने वाली कंपनियां मालमाल हो चुकी हैं. कंपनियों के पीछे प्रमोटर भी खेल का आनंद लेने के साथ-साथ तगड़ी कमाई भी कर रहे हैं. ये सब आईपीएल का मौजूदा वैल्यूवेएशन और एक-एक टीमों की कीमतें बता रही हैं.
हर टीम की जबरदस्त कमाई
यही नहीं, अभी तक आईपीएल टीमों के निवेशकों की बल्ले-बल्ले रही है. बड़ी से बड़ी कंपनियों में भी इतनी तगड़ी कमाई संभव नहीं है. यानी आईपीएल के पीछे जिनका भी बिजनेस माइंड है, वो तेजी से फल-फूल रहा है. तभी तो साल 2008 में जब आईपीएल की शुरुआत हुई थी, तब राजस्थान रॉयल्स टीम की वैल्यू करीब 67 मिलियन डॉलर (2008 में करीब 350 करोड़ रुपये) के आसपास थी, जो अब बढ़कर 15 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई. यानी 17 साल में करीब 40 गुना से ज्यादा का इजाफा हुआ है.
ताजा डील से पहले इस राजस्थान रॉयल्स टीम का मालिकाना हक Emerging Media-led consortium के पास था. यानी 350 करोड़ रुपये लगाने वाली कंपनी को 17 साल में कितना मोटा मुनाफा हुआ, ये आप देख सकते हैं. अब किसी दूसरे बिजनेस में 17 साल के दौरान 40 गुना कारोबार बढ़ जाना संभव नहीं है. यानी आईपीएल अब केवल खेल ही नहीं, एक सुपरहिट बिजनेस भी है.
बता दें, साल 2008 में मुंबई इंडियन टीम की वैल्यूवेएशन करीब 111.90 मिलियन डॉलर और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू टीम की 111.60 मिलियन डॉलर थी. जबकि उस समय सबसे सस्ती टीम राजस्थान रॉयल्स ही थी, जिसकी वैल्यूवेएशन करीब 67 मिलियन डॉलर थी.
जानिए कहां होती है कमाई?
इस बीच साल 2022 में दो नई टीमें लखनऊ सुपर जायंट्स और गुजरात टाइटंस जुड़ीं. आंकड़ों के मुताबिक 2021-22 ज्यादातर टीमों की वैल्यू 6000 से 8000 करोड़ रुपये के बीच थी, जो कि अब बढ़कर औसतन 12,000 से 16,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है.
रेवेन्यू के हिसाब से देखें तो आईपीएल में सबसे ज्यादा मीडिया राइट्स और डिजिटल व्यूअरशिप से कमाई होती है. साल 2023 से 2027 तक यानी 5 साल के लिए करीब 48,390 करोड़ रुपये में सौदा हुआ है. यानी हर साल करीब 10,000 करोड़ रुपये तक कमाई होती है. इसमें से करीब 50 फीसदी पैसा BCCI को मिलता है, और बाकी 50 फीसदी टीमों में बंटता है, यानी सिर्फ मीडिया राइट्स एक टीम को सालाना करीब 450 से 500 करोड़ रुपये की कमाई होती है.
इस बीच IPL की कुल वैल्यू भी करीब $18.5 बिलियन तक पहुंच चुकी है. वहीं टीम वैल्यू में भी लगातार डबल-डिजिट ग्रोथ देखी जा रही है. रेवेन्यू जेनरेट करने के मामले में फिलहाल मुंबई इंडियंस की टीम नंबर- 1 मानी जाती है, यह टीम सालाना 600 करोड़ रुपये से ज्यादा कमा लेती है, ये टीम 5 बार चैंपियन भी रही है.