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Indian Company Ranking: टॉप 200 में से 27 भारतीय कंपनियां, चीन अब सिर्फ एक कदम आगे

Small and Mid-Size Publicly Listed Corporations: पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कंपनियों ने मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, लगातार बढ़ती कमाई और बेहतर मुनाफे के दम पर वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है.

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अब भारत की छोटी कंपनियों का धमाल. (Photo: ITG)
अब भारत की छोटी कंपनियों का धमाल. (Photo: ITG)

एशिया की सबसे तेजी से उभरती कंपनियों में भारत की मौजूदगी लगातार मजबूत हो रही है. इसका ताजा सबूत Forbes Asia की प्रतिष्ठित 'Best Under A Billion 2026' लिस्ट है. इस साल एशिया-प्रशांत क्षेत्र की 200 सर्वश्रेष्ठ छोटी और मझोली लिस्टेड कंपनियों में भारत की 27 कंपनियों ने जगह बनाई है. 28 कंपनियों के साथ चीन भारत से आगे है. यानी एशिया की नई ग्रोथ स्टोरी में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है.

यह उपलब्धि ऐसे समय आई है, जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में अनिश्चितता और ऊर्जा बाजार की अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है. इसके बावजूद भारतीय कंपनियों ने मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, लगातार बढ़ती कमाई और बेहतर मुनाफे के दम पर वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है. यही वजह है कि चीन के बाद सबसे ज्यादा कंपनियों के साथ भारत इस प्रतिष्ठित सूची में दूसरे स्थान पर है.

AI और नई टेक्नोलॉजी का बढ़ता दबदबा
इस साल की लिस्ट साफ संकेत देती है कि एशिया की ग्रोथ स्टोरी अब तेजी से नई टेक्नोलॉजी के इर्द-गिर्द घूम रही है. AI, सॉफ्टवेयर, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स से जुड़ी कंपनियां कुल चयनित कंपनियों का करीब 25 फीसदी हिस्सा हैं. इसके अलावा डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी, इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया है. इससे साफ है कि निवेश और ग्रोथ का फोकस तेजी से भविष्य की टेक्नोलॉजी वाले सेक्टर्स की ओर बढ़ रहा है.

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भारत के लिए क्यों अहम है यह उपलब्धि?
भारत का 27 कंपनियों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंचना सिर्फ एक रैंकिंग नहीं है. यह इस बात का संकेत है कि भारतीय मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियां अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं. वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं. डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, स्पेशियलिटी केमिकल्स और हाई-वैल्यू इंडस्ट्रियल सेक्टर्स में भारतीय कंपनियों की बढ़ती क्षमता इस प्रदर्शन में साफ दिखाई देती है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत की कंपनियों की वैश्विक हिस्सेदारी और बढ़ सकती है.

चीन पहले स्थान पर, भारत बेहद करीब
देशों की बात करें तो चीन 28 कंपनियों के साथ पहले स्थान पर रहा. वहीं भारत 27 कंपनियों के साथ दूसरे नंबर पर है. मलेशिया ने भी इस साल शानदार प्रदर्शन करते हुए 19 कंपनियों को लिस्ट में जगह दिलाई है. Forbes के मुताबिक, इसकी बड़ी वजह देश में तेजी से बढ़ता AI इंफ्रास्ट्रक्चर है. वहीं इस साल की लिस्ट में शामिल 200 कंपनियों में से 60 कंपनियां ऐसी हैं, जिन्होंने लगातार दूसरे साल अपनी जगह बरकरार रखी है. यह लगातार मजबूत प्रदर्शन और टिकाऊ कारोबारी मॉडल का संकेत माना जा रहा है.

कैसे चुनी जाती हैं ये कंपनियां?
Forbes Asia ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र की 19,000 से ज़्यादा लिस्टेड कंपनियों का विश्लेषण किया. इनमें सिर्फ उन्हीं कंपनियों पर विचार किया गया, जिनकी सालाना बिक्री 1 करोड़ डॉलर से 1 अरब डॉलर के बीच थी. चयन के दौरान कर्ज का स्तर, बिक्री और प्रति शेयर आय (EPS) में एक और तीन साल की ग्रोथ, साथ ही एक और पांच साल के औसत रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) जैसे वित्तीय मानकों को आधार बनाया गया. इसके अलावा कंपनियों की लाभप्रदता, वित्तीय मजबूती और दीर्घकालिक प्रदर्शन का भी आकलन किया गया. यह मूल्यांकन 10 जुलाई 2026 तक उपलब्ध सार्वजनिक वित्तीय आंकड़ों के आधार पर किया गया.

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भारत के लिए बड़ा संदेश
Forbes Asia की यह लिस्ट सिर्फ एक रैंकिंग नहीं है. यह इस बात का संकेत है कि भारतीय कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर गुणवत्ता, नवाचार और वित्तीय प्रदर्शन के दम पर अपनी अलग पहचान बना रही हैं. चीन से सिर्फ एक कंपनी पीछे रहना दिखाता है कि एशिया की नई आर्थिक तस्वीर में भारत तेजी से एक मजबूत ग्रोथ इंजन बनकर उभर रहा है. आने वाले बरसों में अगर यही रफ्तार बनी रही, तो इस सूची में भारत के शीर्ष स्थान पर पहुंचने की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता.

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