डोनाल्ड ट्रंप जहां एक ओर अपने टैरिफ अटैक (Trump Tariff Attack) का सिलसिला जारी रखे हुए हैं और लगातार नई धमकियां देते हुए नजर आ रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर भारत अलग ही खेल कर रहा है. जी हां, टैरिफ टेंशन के बीच भारत, यूरोपीय यूनियन के साथ सबसे बड़ी डील (India-EU Trade Deal) करने वाला है और इसका ऐलान कल यानी 27 जनवरी को किया जा सकता है.
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) भी दिल्ली यात्रा पर हैं. रिपोर्ट्स में मामले से जुड़े अधिकारी रह रहे हैं कि India-EU FTA में 90% से ज्यादा व्यापारिक वस्तुओं पर शुल्क हटाने का टारगेट सेट किया गया है, वहीं उर्सुला वॉन ने इस समझौते को 'Mother Of All Deals' बताया है. आइए समझते हैं इस डील से कैसे भारत को फायदा होने वाला है?
'2 अरब लोगों का बाजार बनेगा'
EU की चेयरमैन उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दिल्ली यात्रा के दौरान भारत के साथ इस एफटीए (Free Trade Agreement) को लेकर खासी उत्साहित नजर आई हैं. उन्होंने दिल्ली पहुंचने के बाद अपना पहला संदेश शेयर करते हुए कहा कि India-EU संघर्ष, संरक्षणवाद और राजनीतिक अस्थिरता से ग्रस्त टूटी हुई दुनिया को ठीक करने में मदद कर सकते हैं. रिपोर्ट्स की मानें, तो 27 जनवरी को इस डील का ऐलान किया जा सकता है.

EU के साथ एफटीए से भारत को ये फायदा
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने भारत-ईयू ट्रेड डील को लेकर रविवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस एफटीए की घोषणा 27 जनवरी को होने की उम्मीद है. इससे घरेलू उद्योग को लागत कम करने में मदद मिलने और व्यापार का विस्तार करने में मदद मिल सकती है.
जीटीआरआई के फाउंडर अजय श्रीवास्तव का कहना है कि मुक्त व्यापार समझौते के तहत टैरिफ में कटौती (Tariff Cut) से मुख्य रूप से इनपुट लागत में कमी आएगी, व्यापार की मात्रा बढ़ेगी, जिनसे दोनों पक्षों के उत्पादकों और उपभोक्ताओं को फायदा होगा. इस मामले से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, India-EU FTA से 90% से ज्यादा सामानों पर टैरिफ कट या इसे हटाया जा सकता है और इससे खासतौर पर कपड़े, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स और आईटी सर्विसेज समेत अन्य सेक्टर्स को बड़ा लाभ होगा.
I’m so glad to be in India today.
— Ursula von der Leyen (@vonderleyen) January 25, 2026
India and Europe have made a clear choice.
The choice of strategic partnership, dialogue and openness.
Leveraging our complementary strengths.
And building mutual resilience.
We are showing a fractured world that another way is possible. pic.twitter.com/J04vNQbW30
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे अब तक की सबसे बड़ी डील बताते हुए कहा है कि यह ऐसा समझौता होगा जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा, जो वैश्विक जीडीपी (Global GDP) का लगभग एक चौथाई हिस्सा होगा. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर एक पोस्ट के जरिए भारत आने की खुशी जाहिर की.
136 अरब डॉलर का है कारोबार
FY2025 के ट्रेड डाटा को देखें, तो भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार 136.53 अरब डॉलर से अधिक का रहा. अगर आयात की बात करें, तो यूरोपीय संघ से भारत का माल आयात 60.7 अरब डॉलर रहा. इनमें हाई कैटेगरी मशीनरी 13 अरब डॉलर के साथ इंपोर्ट लिस्ट में सबसे ऊपर रही.
इलेक्ट्रॉनिक्स आयात का 9.4 अरब डॉलर रहा, जिसमें मोबाइल फोन के पुर्जे (3.7 अरब डॉलर) और सर्किट (890.5 मिलियन डॉलर) के मंगाए गए. इसके अलावा भारत ने 6.3 अरब डॉलर मूल्य के विमान, 3.8 अरब डॉलर मूल्य के मेडिकल उपकरण और साइंटिफिक उपकरणों का आयात किया, जबकि 1.4 अरब डॉलर मूल्य की खास दवाएं भी मगाईं.

भारत का EU को इतना एक्सपोर्ट
आयात के बाद अब नजर डालें, वित्त वर्ष 2025 में यूरोपीय संघ को भारत के निर्यात के बारे में, तो इसका मूल्य 75.9 अरब डॉलर रहा. इसमें मुख्य रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों का बड़ा योगदान रहा. लिस्ट में हालांकि, रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट 15 अरब डॉलर के निर्यात के साथ टॉप पर रहे. इनमें डीजल का निर्यात 9.3 अरब डॉलर और एटीएफ का निर्यात 5.4 अरब डॉलर का था. इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 11.3 अरब डॉलर का रहा, जिसमें 4.3 अरब डॉलर मूल्य के स्मार्टफोन शामिल थे.
कपड़ों का भारत से निर्यात मूल्य 4.5 अरब डॉलर था. वहीं अन्य प्रमुख निर्यात कैटेगरी में 50 लाख डॉलर की मशीनरी और कंप्यूटर,51 लाख डॉलर के जैविक रसायन, 49 लाख डॉलर मूल्य का लोहा और इस्पात और 30 लाख डॉलर की वैल्यू के फार्मा प्रोडक्ट्स शामिल थे. यूरोपीय संघ को जेम्स एंड ज्वेलरी का निर्यात 2.5 अरब डॉलर रहा, जिसमें मुख्य रूप से 1.6 अरब डॉलर मूल्य के कटे और पॉलिश किए गए हीरे शामिल थे. ऑटोमोबाइल निर्यात 2.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया.
भारत के हाथ होगा 27 देशों का बाजार
भारत के लिए यूरोपीय यूनियन के साथ ये व्यापार समझौता इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसका संभावित दायरा बहुत व्यापक है. ब्रसेल्स के लिए, भारत उसकी चीन पर निर्भरता कम करने और रणनीतिक रूप से सहयोगी माने जाने वाले देशों के साथ संबंध मजबूत करने में एक बड़े पार्टनर के रूप में उभरा है. इस डील से भारत के लिए यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों वाले बाजार तक अधिक पहुंच बनेगा और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा.