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US-China रह जाएंगे पीछे... भारत का बजेगा डंका, एक्सपर्ट बोले- दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी बनेगा!

Good News For Indian Economy: भारत की अर्थव्यवस्था में दम है, ये बात आईएमएफ से लेकर वर्ल्ड बैंक तक तमाम एजेंसियां कह चुकी हैं. एक्सपर्ट्स अब यहां तक कह रहे हैं कि इंडियन इकोनॉमी अमेरिका और चीन को पीछे छोड़कर दुनिया में नंबर-1 बन सकती है.

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भारत छोड़ सकता है अमेरिकी-चीन को पीछे. (Photo: Reuters/ITG)
भारत छोड़ सकता है अमेरिकी-चीन को पीछे. (Photo: Reuters/ITG)

ट्रंप का टैरिफ (Trump Tariff) हो या इससे बढ़ी ग्लोबल टेंशन (Global Tension), सभी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई इकोनॉमी में बना हुआ है. आईएमएफ से लेकर विश्व बैंक तक सभी ने इसका लोहा माना है और ये रफ्तार आगे भी बनी रहने का अनुमान जाहिर किया हैे. वहीं अब एक और आउटलुक आया है, जो खुश करने वाला है. विदेशी एक्सपर्ट ने आंकड़े पेश करते हुए कहा है कि अमेरिका (US) हो या फिर चीन (China), सब पीछे छूट जाएंगे और भारत दुनिया में सबसे बड़ी इकोनॉमी (India World Largest Economy) बन सकता है. 

भारत के बाद होंगे अमेरिका और चीन!
ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑर्पोरेशन एंड डेवलपमेंट यानी OECD  के भारत को लेकर जो लॉन्गटर्म अनुमान हैं, अगर वे सही साबित होते हैं, तो फिर भारत सदी के अंत तक अमेरिका और चीन को पीछे छोड़कर विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. सिंगापुर नेशनल यूनिवर्सिटी (NUS) में ईस्ट एशियन इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर और मेरिक्स के सीनियर एसोसिएट फेलो बर्ट हॉफमैन ने ओईसीडी के अनुमानों का हवाला देते हुए इस बड़े बदलाव की संभावना जताई है. ये भारत के लिए Good News है. उन्होंने कहा कि सदी के अंत तक भारत अन्य अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़कर विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, जिसके बाद अमेरिका और फिर चीन का नंबर होगा. 

चीन से दोगुनी बड़ी इकोनॉमी होगा भारत
ओईसीडी द्वारा पिछले साल सितंबर 2025 में जारी अनुमानों पर नजर डालें, तो इनमें कहा गया था कि भारत 2060 तक अमेरिका को पीछे छोड़ देगा और सदी के अंत तक चीन से लगभग दोगुना बड़ा हो जाएगा. अमेरिका 2040 के दशक में ही तीसरे स्थान पर खिसक जाएगा. OECD का लॉन्गटर्म आउटलुक मूल रूप से इस बात की रिसर्च है, कि जनसांख्यिकी परिवर्तन किसी अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करते हैं? हॉफमैन ने एक ब्लॉग पोस्ट में बताया कि संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या डिविजन द्वारा 2024 में जारी किए गए अनुमानों के मुताबिक, चीन की जनसंख्या में पहले की अपेक्षा कहीं अधिक तेजी से गिरावट आएगी.

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यहां महत्वपूर्ण यह है कि चीन की अधिकांश जनसंख्या में गिरावट सदी के सेकंड हॉफ में होने की उम्मीद है. इस गिरावट के कारण 2100 तक चीन की जनसंख्या करीब 65 करोड़ तक आ जाएगी.  

चीन से ज्यादा ग्रोथ करेगा भारत
Bert Hofman ने कहा कि 2100 में भारत में दुनिया की सबसे बड़ी श्रम शक्ति होगी. वर्क फोर्स में भागीदारी भी तेजी से बढ़ेगी और ये कामकाजी उम्र की आबादी के 50% से उछलकर 70% हो जाएगी. हॉफमैन का कहना है कि यह केवल जनसंख्या संबंधी आंकड़े नहीं हैं, बल्कि आउटलुक भी हैं. OECD स्थिर प्रतिफल के साथ कॉब-डगलस फ़ंक्शन (Cobb-Douglas Function) का इस्तेमाल करता है, जो देशों की जीडीपी को लेकर भविष्यवाणी करता है, कर्न्वजेंस रेट प्रभावी लेबर और प्रारंभिक कैपिटल/लेबर रेशियो पर निर्भर करता है. दोनों आउटलुक में भारत, चीन की तुलना में अधिक ग्रोथ करता नजर आता है. 

हालांकि, ओईसीडी का आउटलुक अटल सत्य नहीं है, लेकिन ये दीर्घकालिक चुनौतियों के साथ होने वाले बदलावों की ओर इशारा करते हैं. हॉफमैन ने कहा है कि पॉपुलेशन एक बड़ी भूमिका निभाती है, और सदी के अंत तक जीडीपी के आकार में चीन पर भारत का अनुमानित अंतर बहुत बड़ा है, जिससे ये कहना गलत न होगा कि तब तक भारत सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा.

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Indian Economy Growth

CEBR का भी ऐसा ही अनुमान 
न सिर्फ ओईसीडी ही नहीं, बल्कि सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड बिजनेस रिसर्च (CEBR) ने भी अपनी 'वर्ल्ड इकोनॉमिक लीग टेबल-2024' रिपोर्ट में ऐसा ही अनुमान लगाते हुए कहा था कि सदी के अंत तक भारत अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ देगा. रिपोर्ट में India GDP में बड़े बदलाव का अनुमान लगाया गया, जिसके मुताबिक India GDP, चीन की जीडीपी (China GDP) से 90% और US GDP से 30% अधिक होगी. इसमें भारत के लिए 2028 तक औसतन 6.5% की स्थिर ग्रोथ रेट रहेगी. 

भारत पर सबको है भरोसा 
OECE, CEBR या फिर बर्ट हॉफमैन के अलावा भी कई अन्य एक्सपर्ट भी भारत की ग्रोथ पर भरोसा जता रहे हैं. Davos 2026 के दौरान बीते सप्ताह वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कार्लाइल ग्रुप के को-फाउंडर डेविड रुबेनस्टीन ने भी Indian Economy को लेकर कुछ ऐसी ही बात कही थी. उन्होंने एक बिजनेस चैनल को दिए इंटरव्यू में अनुमान जाहिर करते हुए कहा था कि, 'मुझे लगता है कि मेरे जीवनकाल में, या आपके जीवनकाल में भारत दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी बन सकता है.' उन्होंने उम्मीद जताई थी कि दो या तीन दशक के भीतर ऐसा हो सकता है.

IMF से विश्व बैंक तक पॉजिटिव 
इंडियन इकोनॉमी को लेकर लगातार गुड न्यूज आ रही हैं. अगर ग्लोबल एजेंसियों की बात करें, तो World Bank ने बीते दिनों भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को बढ़ाते हुए 7.2% कर दिया था, जो जून 2025 में जताए गए पूर्वानुमान 6.3% से 0.9% ज्यादा है. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी भारत का लोहा माना और अपनी नई आउटलुक रिपोर्ट में भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान FY2025-26 के लिए पूर्व से 70 बेसिस पॉइंट बढ़ाते हुए 7.3% कर दिया है. दोनों ही एजेंसियों ने साफ किया था कि ट्रंप टैरिफ समेत तमाम ग्लोबल टेंशन के बावजूद इंडियन इकोनॉमी की रफ्तार तेज बनी रहेगी. इसके अलावा Deloitte ने FY2026 में इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ रेट 7.5% से 7.8% रहने का अनुमान जताया है.

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