अमेरिका-ईरान युद्ध (US Vs Iran) से चरम पर पहुंची मिडिल ईस्ट टेंशन दुनिया के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. दुनिया की तेल जरूरतों को पूरा करने में अहम रोल निभाने वाला होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल-गैस का संकट इन देशों की इकोनॉमी को नुकसान पहुंचा रहा है. पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका से लेकर ब्रिटेन और भारत तक में ईंधन की कीमतें बढ़ाई गई हैं. भारत में भी एक ही हफ्ते में दो बार Petrol-Diesel Price Hike का बम फूट चुका है.
तेल आयात पर ज्यादा निर्भर देशों में की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं. भारत की बात करें, तो देश में तेल संकट के बुरे असर को लेकर लगातार वॉर्निंग मिल रही हैं. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के बाद अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ओर से भी भारत के लिए अलर्ट आया है. IMF ने कहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे ही जारी रही, तो ये भारत में बड़े वित्तीय जोखिमों का कारण बन सकता है.
तेल बिगाड़ देगा भारत का गणित
अमेरिका-ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 फीसदी के आसपास का इजाफा देखने को मिला है. हालांकि, बुधवार की तुलना में गुरुवार को तेल की कीमतें कमजोर होकर 107 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गई है, लेकिन तमाम उतार-चढ़ाव के बाद भी ये 100 डॉलर के पार बना हुआ है.
आईएमएफ ने चेतावनी देते हुए कहा है कि Middle East युद्ध के चलते होर्मुज बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, ये एक बार फिर भारत में महंगाई के आउटलुक के साथ ही राजकोषीय गणित के लिए खतरा बनती जा रही हैं. वैश्विक निकाय ने कहा कि तेल का लगातार महंगा होना भारत के लिए वित्तीय जोखिमों की वजह साबित हो सकता है. न सिर्फ भारत बल्कि ये अन्य ऐसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए विशेष रूप से खतरा है, जहां ईंधन की महंगाई का परिवहन, रसद, खाद्य पदार्थों की कीमतों और घरेलू उपभोग पर बड़ा प्रभाव पड़ता है.
तो लोग गरीबी में चले जाएंगे...
IMF की यह चेतावनी भारत के लिए एक नाजुक समय में आई है, जबकि मिडिल ईस्ट संकट का गहरा प्रभाव देखने को मिल रहा है. दरअसल, अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 80 फीसदी से ज्यादा Crude Oil भारत आयात करता है. ईरान और होर्मुज के आसपास सप्लाई में रुकावट की आशंकाएं गहराने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. इकोनॉमिस्ट इससे भारत के चालू खाता घाटे, महंगाई की स्थिति और रुपया पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंतित हैं.
आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव से भारतीय परिवारों के खर्च करने की क्षमता को बड़े स्तर पर कम कर सकती है. अगर समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो और भी लोग गरीबी की ओर धकेल दिए जा सकते हैं. इस बीच आईएमएफ ने आगाह किया कि खराब ढंग से तैयार सहायता उपाय वित्तीय रूप से महंगे और मुश्किल भरे साबित हो सकते हैं और महंगाई के साथ ही सार्वजनिक कर्ज का बोझ बढ़ा सकते हैं और लंबे समय के लिए राजकोषीय दबाव पैदा कर सकते हैं.
IMF ने बताया- आखिर क्या करें?
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक, वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए पॉलिसी मेकर्स को अब महंगाई कंट्रोल करने के साथ ही राजकोषीय और राजनीतिक दबाव के मद्देनजर पहले से कहीं अधिक सावधानी से संतुलन बनाना पड़ सकता है. IMF ने अपने नोट में सलाह दी है कि सरकार को कमजोर परिवारों और छोटे व्यवसायों को अस्थायी समर्थन देना चाहिए. आईएमएफ ने व्यापक ईंधन राहत के बजाय मौजूदा कल्याणकारी योजनाओं के जरिए अस्थायी समर्थन की सिफारिश की है.