मिडिल ईस्ट में युद्ध (Middle East War) ने दुनिया में हाहाकार मचाया हुआ है, खासतौर पर तेल गैस संकट ने आग में घी का काम किया है. हालात ये हैं कि पाकिस्तान से लेकर साउथ कोरिया तक कई देशों में कोरोना जैसे ऊर्जा सुरक्षा उपाय लागू कर दिए गए हैं. ईरान के कंट्रोल वाले होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से मुसीबत चरम पर पहुंच गई है. इस बीच ऊर्जा अर्थशास्त्री अनस अलहाजी ने ग्लोबल इकोनॉमी क्रैश होने की बड़ी वार्निंग (Crash Warning) दी है. उन्होंने कहा है कि ये युद्ध की टेंशन जल्द ही अंत तक नहीं पहुंचती है, तो फिर ये वैश्विक अर्थव्यवस्था के क्रैश (Global Economy Crash) का कारण बन सकता है.
सिर्फ कुछ हफ्ते, फिर गंभीर परिणाम
अलहाजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर एक पोस्ट में चेतावनी दी है कि कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के आर्थिक परिणाम कुछ ही हफ्तों में गंभीर हो सकते हैं. उन्होंने इस यु्द्ध और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के चलते ग्लोबल एनर्जी मार्केट में बढ़े जोखिमों पर फोकस करते हुए लिखा, 'अगर यह Middle East War जल्द खत्म नहीं हुआ, तो फिर मई की शुरुआत तक वैश्विक अर्थव्यवस्था क्रैश (Economy Crash In May) हो जाएगी.'
होर्मुज संकट और ग्लोबल इम्पैक्ट
इकोनॉमिस्ट ने होर्मुज संकट के बढ़ने के ग्लोबल इम्पैक्ट के बारे में बात करते हुए कहा कि दुनिया के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी Hormuz Strait के आसपास बढ़ते तनाव इसलिए भी गंभीर चिंता की बात है, क्योंकि यह तेल मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी रूट्स में से एक है और इससे होकर दुनिया के कुल तेल खपत का 20 फीसदी गुजरता है.
If this war doesn't end soon, the global economy would collapse by early May. https://t.co/MV8z99nN6j
— Anas Alhajji (@anasalhajji) March 25, 2026
ऐसे में होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाजों में किसी भी प्रकार की रुकावट ऊर्जा बाजारों और ग्लोबल ट्रेड पर गहरा प्रभाव डाल सकती है. अलहाजी के बताया कि इस संकट का असर मिडिल ईस्ट से अलग खासतौर पर यूरोप में पहले से ही महसूस किया जा रहा है. उन्होंने अलर्ट करते हुए कहा कि, 'यूरोप तेल-गैस की कमी, कीमतों में तगड़ा उछाल और रूसी तेल पर बढ़ती निर्भरता की ओर जा रहा है.' इस संकट से यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद उसके तेल पर निर्भरता कम करने के लिए EU की तमाम कोशिशें उलट सकती हैं.
एशियन मार्केट में तेल की कीमतों में उछाल
अलहाजी ने एनर्जी मार्केट में तेल की कीमतों में आए तेज उछाल की ओर इशारा किया और बताया कि एशिया में तेल की कीमतें (Crude Price In Asia) पहले ही 173 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो चुकी हैं, जो ईरान युद्ध से ग्लोबल टेंशन के कारण सप्लाई में रुकावट की आशंका को दर्शाती हैं. उन्होंने ये चेतावनी भी दी कि अगर तनाव आगे बढ़ता है और युद्ध लंबा खिंचता है, तो फिर तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक जा सकती हैं.
अमेरिका के रिजर्व का क्या होगा?
अर्थशास्त्री अनस अलहाजी ने अमेरिका द्वारा उठाए गए उपायों पर भी सवाल खड़े किए, उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा कि अमेरिकी स्ट्रेटिजिक भंडार से तेल जारी होने के बाद US Crude Oil Reserve का क्या होगा, जिसका उपयोग पहले आपूर्ति संकट के दौरान बाजारों को स्थिर करने के लिए होता रहा है. उन्होंने कहा कि एनर्जी इंफ्रा या समुद्री तेल रूट्स को प्रभावित करने वाला ये संघर्ष लंबा होता है, तो महंगाई, सप्लाई चेन में रुकावट और धीमी ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ जैसी आर्थिक दिक्कतें पैदा हो सकती हैं.